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डेंगू से शासकीय चिकित्सालय के डॉक्टर की मौत : स्वास्थ्य विभाग अपने ही चिकित्सक को बचा नहीं पाया

मंदसौर। जिले का स्वास्थ्य विभाग कितना खोखला हो गया है इस बात का अंदाजा अब इसी से लगाया जा सकता है कि गरोठ के अस्पताल में पदस्थ डॉ टीकम चौहान की डेंगू के कारण मौत हो गई। जिला स्वास्थ्य विभाग स्वाइन फ्लू और डेंगू जैसी घातक बिमारियों के लिए कितना सजग है यह बुधवार को सभी को ज्ञात हो गया। मंगलवार को डॉ चौहान की डेंगू के कारण उज्जैन अस्पताल में मौत हो गई वहां पर उन्हें आईसीयू में भी रखा गया था लेकिन बुधवार को उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। यही स्थिति जानलेवा बीमारी स्वाईन फ्लू के मामले में भी हो रही है इस बीमारी से भी निपटने के लिए जिले का स्वास्थ्य विभाग नाकाम हो रहा है। और इस बीमारी के मरीज को भी जिला चिकित्साल्स से रैफर ही किया जा रहा है।

डेंगू से पहली मौत
डॉ चौहान को विगत 7 से 8 दिनों से बुखार आ रहा था बुखार नहीं जाने पर उन्हें इंदौर के लिए रैफर किया गया था लेकिन बीच में ही उनकी तबियत ज्यादा खराब होने से उन्हें उज्जैन के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां पर उन्हें मंगलवार को आईसीयू में वेंटीलेटर पर रखा गया था। लेकिन स्वास्थ्य विभाग अपने ही डॉक्टर को ही नहीं बचा सका। जिले में डेंगू के कारण मौत का यह पहला मामला है।

स्वाईन फ्लू से हो चुकी है पॉच मौते
स्वाईन फ्लू से निपटने में भी जिले का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से नाकाम रहा है। स्वाईन फ्लू जैसी बीमारी से भी अब तक मंदसौर जिले में पांच लोग अपनी जान गंवा चुके है वहीं एक दर्जन से ज्यादा को स्वाईन फ्लू पॉजीटिव आया है।

जिला चिकित्सालय सिर्फ मल्हम पट्टी तक सिमित
जिले का बड़ा अस्पताल याने जिला चिकित्सालय भी रैफर चिकित्सालय बनकर रह गया है। जिला चिकित्सालय सिर्फ मल्हम पट्टी तक सिमित रह गया है और इसे सुधारने के लिए कोई विशेष प्रयास भी नहीं किए जा रहे है।

ग्रामीण क्षेत्रोें में स्थिति ज्यादा खराब
स्वाईन फ्लू और डेगू जैसी घातक बीमारियों से निपटने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा खराब है। ग्रामीण क्षेत्रों में इन बीमारियों के मरीजों को प्राथमिक उपचार ही ठीक ढंग से नहीं मिल पा रहा है।

सीएमएचओ स्वयं निष्क्रिय
स्वाईन फ्लू और डेंगू जैसी घातक बीमारियां जिले में अपने पैर पसार रही है। वैज्ञानिक युग में लोगों को बीमारी के कारण अपनी जान गंवाना पड़ रही है। लेकिन जिले के जिम्मेदार अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग के मुखिया सीएमएचओ महेश मालवीय अभी भी निष्क्रिय है। घातक बिमारियां पैर पसार रही है लेकिन फिर भी वे फिल्ड में नजर नहीं आ रहे है लगता है उनको मौतों से कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। जिले को चुस्त और दुरूस्त सीएमएचओ की आवश्यकता है थके हुए सीएमएचओं की नहीं।

अब याद आई रोगी कल्याण समिति को, बुलाई बैठक
बारीश के बाद से स्वाईन फ्लू और डेंगू जैसी घातक बिमारियां फैलने लगती है। समय रहते किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया अब तक स्वाईन फ्लू से पॉच और डेंगू के कारण एक डॉक्टर की जान जा चुकी है तो जिले की सिर्फ नाम की रोगी कल्याण समिति की नींद उड़ी है और जिम्मेदारों ने आज 6 दिसंबर को दोपहर 12.30 बजे समिति की बैठक बुलाई है। लेकिन संभवतः यह बैंठक भी अन्य बैठकों की तरह चाय नाश्ते तक की सिमट जाएगी।

 

गरोठ चिकित्सालय की स्थिति अत्यंत दयनीय

अपने ही विभाग कि लापरवाही के कारण शासकीय हॉस्पिटल में पदस्थ डॉ टीकम चौहान की डेंगू के कारण मृत्यु होने पर स्वास्थ्य के नाम पर बड़े-बड़े दावे करने वालो की पोल उजागर हो गई है। हॉस्पिटल में जांच के दौरान पहले भी दो मरीज सामने आ चुके है। उसी समय स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उसी वार्ड के आस पास कुछ जगह चेक कर दवाइयां डाली उसके बाद किसी ने ध्यान नही दिया। डेंगू के लक्षण के बाद नगर में स्वास्थ्य टीम ने डॉ चोहान के मकान से चारो दीशाओ में 100 घरो के आस पास जांच की जिसमे चोहान के मकान के पीछे वाले खेत के पास पानी की टंकी में डेंगू का लार्वा पाया गया। डेंगू के लक्षण ओर लोगों को जागरूक करने के लिए पूरे नगर में डेंगू मलेरिया अधिकारी की टीम ने घूम कर जागरूक किया।

लेकिन बीएमओ रमेशचन्द्र कुकड़े जिस जांच का दावा कर रहे हैं उस मोहल्ले वासियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग से अभी तक कोई जांच करने नहीं आया है वही खड़ावदा रोड वार्ड नंबर 1 के पार्षद धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि जो कि हॉस्पिटल खड़ावदा रोड डॉक्टर टीकम चौहान के क्लीनिक के नजदीक के निवासी हैं ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा पिछले 2 महीनों में हमारे वार्ड व मोहल्लों में कोई जांच नहीं की गई वह साथ ही नगर परिषद के द्वारा भी नालीयों कि सफाई नहीं करवाई जा रही है वहीं बीएमओ अपने अस्पताल के अमले के साथ डा टिकम चोहान कि अंतिम यात्रा मे शामिल होने के लिए गरोठ से धार जिले की ओर रवाना हुए थे।

मृतक डॉक्टर स्वयं अपना इलाज कर रहे थे

सीएमएचओ महेश मालवीय ने बताया कि जिले में डेंगू इलाज के लिए सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर पर्याप्त सुविधाएं है एवं पर्याप्त दवाईयां भी उपलब्ध है। डेंगू से मृतक डॉक्टर चौहान के बारे में आपने बताया कि वे स्वयं अपना ईलाज कर रहें थे उन्होनंे किसी की इस संबंध में बताया भी नहीं। स्थिति ज्यादा बिगढने पर उन्होने गरोठ के डॉ विजयवर्गीय को बताया तो वहां से उन्हें रैफर कर दिया गया। यह भी जानकारी मिली है कि डॉ चौहान के परिजन को भी डूेंग था और उनका भी इलाज इंदौर में चल रहा था। डॉ चौहान भी देखने उन्हें वहां गए थे। शायद वहीं से उन्हें भी डेंगू के लक्षण दिखने लगे थे।

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