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ड्राइविंग लाइसेंस खो जाए तो मिल जाएगा डुप्लीकेट

Mandsaur। सभी वाहन चालकों के लिए ड्राइविंग लाइसेंस रखना अनिवार्य होता है। अगर आपका ड्राइविंग लाइसेंस खो जाए या चोरी हो जाए तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है और नहीं एजेंटो के चक्कर काट कर मोटी राशि खर्च करने जरूरत है। आप सीधे एफआई दर्ज कराकर उसकी कॉपी लेकर आरटीओ कार्यालय पहुंचे। मात्र 200 रुपए के शुल्क चार्ज के बाद आपके पते पर सप्ताहभर में ड्राइविंग लाइसेंस पहुंच जाएगा।

परिवहन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अगर डीएल (ड्राइविंग लाइसेंस) किसी भी कारण से खो जाए तो वाहन चलाने के लिए आपको तुरंत डुप्लीकेट ड्राइविंग लाइसेंस की जरूरत होगी। इसके लिए आपके पास अपने डीएल की फोटोकॉपी होनी चाहिए। ट्रांसपोर्ट विभाग द्वारा इस मामले को लेकर सलाह दी जाती है कि जब भी आप नया डीएल बनवाएं तो उसकी एक फोटोकॉपी, डिजिटल स्कैन कॉपी कराके फ्यूचर के लिए अपने पास सुरक्षित रख लें। फोटोकॉपी नहीं रखें तो कम से कम अपना लाइसेंस नंबरए इश्यू किए जाने की डेट और उसकी एक्सपायरी डेट जरूर नोट कर लेनी चाहिए। ये डीटेल्स न होने पर डुप्लीकेट डीएल बनवाने में आपको काफी पापड़ बेलने पड़ सकते हैं। कभी कभी तो रनिंग डीएल की डीटेल्स न होने पर लोगों को फि र से नया डीएल ही बनवाना पड़ेगा।

 

मात्र 200 रुपए की फीस पर मिलेगा डुप्लीकेट
लाइसेंस खो जाने की कंडीशन में डुप्लीकेट लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आपको उसी ऑफिस में एप्लाई करना होगाए जहां से आपको ओरिजिनल डीएल इश्यू किया गया था। डुप्लीकेट डीएल बनवाने की फीस तो अलग अलग राज्यों में डिफ रेंट हो सकती है, लेकिन फि र भी हमारे यहां पर डुप्लीकेशन की फीस 200 रुपए के आसपास होगी। डुप्लीकेट डीएल बनवाने के लिए आपको ओरिजिनल डीएल खो जाने की पुलिस थाने में कराके वहां से FIR या NOC की कॉपी लानी होगी। इस कॉपी को ही ऑफिस में दिखाकर डुप्लीकेट डीएल बनवाने का प्रोसेस शुरु होगा। ये ध्यान रहे कि डुप्लीकेट डीएल की वैलिडिटी उतनी ही होगी जितनी आपके ओरिजिनल डीएल की थी। अगर डीएल खोने के 6 महीने के भीतर आपने RTO जाकर प्रक्रिया शुरु नहीं की तो डुप्लीकेट डीएल बनने में आपको ज्यादा समय और पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।

 

डीएल की डुप्लीकेट कॉपी लेने के लिए यह होंगे डॉक्यूमेंट 
– डुप्लीकेट डीएल पाने के लिए अधिकारी के नाम सादे कागज पर एक लिखित एप्लीकेशन या फॉर्म भरके देना होगा
– डीएल खो जाने की पुलिस रिपोर्ट की एफआईआर कॉपी
– वैलिड आईडी और एड्रेस प्रूफ की फोटोकॉपी
– एक सेल्फ डिक्लेरेशन फार्म में फिजिकल फि टनेस का सुबूत
– खुद का पता लिखा खाली रजिस्टर्ड लिफाफा

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