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ढाई सौ करोड़ की नगर पालिका और एक भी मोहल्ला समिति नहीं

मंदसौर (राजेश पाठक )। नगर पालिका मंदसौर क्षेत्र में कई मोहल्ले और कॉलोनी बनी हुई लेकिन शासन के द्वारा हर वार्ड में मोहल्ला समिति के माध्यम से नगर पालिका पार्षद के साथ सामंजस्य बिठाकर मोहल्ला समिति के माध्यम से वार्ड का विकास करने का जो हसीन ख्वाब संजोया था वह पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। मोहल्ला समिति गठित करने का नियम सन 2011 में अस्तित्व में आया था लेकिन आज तक मंदसौर में किसी भी वार्ड में कोई भी मोहल्ला समिति गठित नहीं हो पाई है। आज नगरपालिका ढाई सौ करोड़ के बजट वाली हो गई है और पार्षद और प्रशासनिक अधिकारी अपने अपने सुविधा के अनुसार क्षेत्र के विकास में पानी की तरह पैसा खर्च कर रहे हैं। और जो पैसा खर्च हो रहा है वह सीधे सीधे जनता का है जबकि होना यह चाहिए और समिति के सदस्यों की अनुशंसा पर मोहल्ले का विकास होना चाहिए। परंतु नागरिकों , प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं की उदासीनता की वजह से एक भी मोहल्ला समिति आज तक अस्तित्व नहीं आ पाई है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यही है की पार्षदगण और नगर पालिका प्रशासन इसको लागू कर कर अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी नहीं मारना चाहते और सबसे बड़ी बात शहर का आम नागरिक अपने हक और अधिकारों को लेना जानता ही नहीं। वह सिर्फ रोना जानता है जबकि मोहल्ला समिति के माध्यम से वह क्षेत्र के पार्षद और नगर पालिका के कार्यो की गुणवत्ता पर बहुत अच्छे से नजर रख सकता है। ये अधिकार उसे मोहल्ला समिति के माध्यम से प्राप्त हो सकते हैं।

कौन बना सकता मोहल्ला समिति- भारत हर नागरिक जो 18 वर्ष से ऊपर आयु का हो , जो मोहल्ले का निवासी हो, मोहल्ला समिति की विधियों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हो, मोहल्ला समिति द्वारा नियत की गई सदस्यता शुल्क देने के लिए सहमत हो, जो किसी अन्य मोहल्ला समिति का सदस्य न हो, जो किसी अपराध के दोष सिद्ध ना ठहराया गया हो, ऐसा व्यक्ति मोहल्ला समिति का सदस्य हो सकता है।

मोहल्ला समिति के कार्य – नगर पालिका द्वारा उपलब्ध करवाई जाने वाली सेवाओं जैसे की सफाई का प्रबंधन, जल प्रदाय, स्ट्रीट लाइटिंग, अपशिष्ट प्रबंधन, तथा मोहल्ले में किए जाने वाले निर्माण एवं सुधार कार्य पर नजर रखना, तथा संबंधित अधिकारी को इस स्थिति से अवगत कराना, उसमें सुधार एवं संबंध में सुझाव देना, अतिक्रमण तथा अवैध निर्माण के बारे में नगरपालिका को सूचना देना, उन्हें रोकने हटाने के लिए नगरपालिका को सहयोग प्रदान करना है, नगरपालिका के करो, शुल्क एवं उपभोक्ता प्रभारों का समय पर भुगतान करने के लिए निवासियों को स्मरण करवाना, मोहल्ला समिति में निवासियों के बीच सौहार्द और एकता की भावना को बढ़ावा देना, सांस्कृतिक एवं खेलकूद गतिविधियों का आयोजन करना, सुरक्षा प्रबंधों को सुदृढ़ करना ,सड़कों और नालियों की मरम्मत उनका रखरखाव,पुस्तकालय, वाचनालय, सामुदायिक केंद्र आदि का संचालन करवाना, वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण संबंधी कामों का जिम्मा लेना और इस कार्य में अन्य एजेंसियों को सहयोग करना, भूजल की रिचार्जिंग के लिए समुचित उपाय करना, बरसाती पानी का संग्रहण के लिए प्रेरित करना, अपने क्षेत्र में किसी संक्रामक रोग का प्राकृतिक आपदा की घटना के बारे में नगरपालिका को सूचित करना तथा उसकी रोकथाम उपायों में सहयोग प्रदान करना, मोहल्ले में निवासरत ऐसे व्यक्तियों को चिन्हित करना जो सरकार की हितग्राही मूलक योजनाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र हैं, आदि ऐसे अनेक कार्य हैं जो मोहल्ला समिति के माध्यम से मोहल्ले के लोगों को विश्वास में लेकर करवाई जा सकते हैं। जिससे पार्षद और नगर पालिका अधिकारियों के द्वारा जो भ्रष्टाचार होने संभावना होती है वह सीधे सीधे खत्म हो जाती है। मोहल्ला समिति के माध्यम से क्षेत्र का वास्तविक विकास होने की पूरी संभावना बनी रहती है।

पुरे प्रदेश में सिर्फ भोपाल में बनी थी मोहल्ला समिति – भोपाल में एक एनजीओ के जागरूकता के चलते मोहला समिति अस्तित्व में आयी थी, लेकिन मंदसौर में कई एनजीओ सरकारी पैसो का हेर फेर कर रहे है वे इस कार्य को करने में कोई रूचि नहीं ले रहे है।

युवा वर्ग को आगे आना चाहिए – मोहल्ला समिति में युवा वर्ग को बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेना चाहिए। ऐसे युवा जो आगे चलकर सामाजिक क्षेत्र या राजनितिक क्षेत्र में काम करना चाहते है उनके लिए मोहल्ला समिति एक शानदार मंच हो सकता है जिसके माध्यम से वे अपनी क्षमता को सिद्ध कर सकते है। इसमे वे लोग भी आगे आ सकते है जो पार्षद बन कर वार्ड की जनता की सेवा करना चाहते थे लेकिन पार्टी ने उन्हें इस लायक नहीं समझा वे मोहल्ला समिति के माध्यम से वार्ड की सेवा कर अपनी उपयोगिता और ताकत दिखा सकते है।

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