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तापेश्वर महादेव अभिषेक से भक्तों की भावना भी रहेगी कायम, भावना का होगा सम्मान-तत्काल खोला जाना चाहिये 

श्री पशुपतिनाथ मूर्तिक्षरण को लेकर 25 अक्टूबर को एक सार्वजनिक वृहद बैठक श्री पशुपतिनाथ मंदिर सभागृह में प्रबंध समिति द्वारा आयोजित हुई। जिसमें अभिषेक को लेकर पक्ष-विपक्ष ने सुझाव दिये। नियमित अभिषेकार्थियों की भगवान भोलेनाथ का अभिषेक की भावना का भी सम्मान हो और मूर्ति क्षरण भी न हो इसके लिये श्री पशुपतिनाथ और श्री तापेश्वर महादेव के मध्य दरवाजे पर जो ताला लगा हुआ रहता है उसे खोल देना चाहिये जिससे तापेश्वर पर जलाभिषेक-पूजन आदि करके श्री पशुपतिनाथ के दर्शन करने से अभिषेक व दर्शन की पूर्ति एक साथ हो जावेगी।

माँ शिवना के किनारे स्थित तापेश्वर महादेव प्रथम सर्वाधिक प्राचीन मंदिर है। यह वही मंदिर है जिसकी रक्षा में शिवलोकवासी सन्त मस्तरामजी ने अपने प्राणों की आहूती दी थी। 1961 में भगवान श्री पशुपतिनाथ की स्थापना से पूर्व शिवना तट पर नगरवासी शिवभक्तों की पूजा-उपासना-साधना-भजन-रात्री जागरण का यह मुख्य पूजा स्थल था। श्री पशुपतिनाथ की स्थापना के बाद भगवान श्री पशुपतिनाथ के दर्शनोपरान्त अथवा दर्शन से पहले भगवान तापेश्वर के दर्शन पूजन अभिषेक का क्रम निरन्तर जारी रहा परन्तु कुछ वर्षों से पशुपतिनाथ गर्भगृह तथा तापेश्वर मन्दिर के मध्य दरवाजे पर ताला किन किरणों से जड़ा गया यह तो प्रबंध समिति ही खुलासा कर सकती है। ताला लगाने से तापेश्वर महादेव मन्दिर अलग-थलग पड़ गया है और पहले जहां स्थानीय तथा विशेषकर बाहर के यात्री श्री पशुपतिनाथ दर्शन के बाद तापेश्वर महादेव दर्शन का लाभ भी लेते थे ताला लगा होने से वंचित रह जाते है।

श्री पशुपतिनाथ दर्शन के पश्चात् तापेश्वर महादेव मन्दिर जाने के बीच दरवाजे पर ताला लगाने का मुद्दा 25 अक्टूबर को मूर्तिक्षरण रोकने की नगर की सार्वजनिक सभा में भी उठाया गया था। क्षेत्रीय विधायक श्री यशपालसिंहजी सिसौदिया ने भी इसे खोला जाकर तापेश्वर महादेव का श्री पशुपतिनाथ के दर्शनार्थियों-शिवभक्तों द्वारा अभिषेक संबंधी जिक्र किया था।

यदि तापेश्वर महादेव मंदिर की तरफ का ताला खोल दिया जाये तो इससे यह सहजता हो जायेगी जो दर्शनार्थी भगवान का नियमित अभिषेक करते रहे है वे अभिषेक स्वतंत्र रूप से तापेश्वर  महादेव का करने के पश्चात् भगवान श्री पशुपतिनाथ के दर्शन कर अभिषेक और दर्शन दोनों का पुण्य लाभ ले सकते है। इससे अभिषाकार्थियांे की भावना का सम्मान भी होगा। साथ ही अभिषेक के कारण मूर्ति क्षरण होने का पक्ष-विपक्ष में जो विगत 19 वर्षों से जारी है वह भी थमेगा क्योंकि यह सही है कि फिलहाल जो विशेष मूर्तिक्षरण नीचे के चार मुखों का क्षरण प्र्रतिरोधक विशेषज्ञों से करवाने के बाद भी नहीं रूक पाया है और भगवान करे ऐसा नहीं हो फिर इसी रूप  में यदि बढ़ते-बढ़ते उपर के मुखों तक यह क्षरण बढ़ गया तब क्या होगा। उस अनपेक्षित कल्पना मात्र से हम सिहर न उठे इसलिये भावना से उपर भगवान को स्थान देकर हमारा प्रथम कर्तव्य भगवान श्री पशुपतिनाथ और उनकी महिमा को अनन्त काल तक सुरक्षित रखने के लिये यदि भावना को सीमित करना पड़े तो निसंकोच कर देना चाहिये क्योंकि भगवान श्री पशुपतिनाथ है तब तक  हमारी आस्था-भावना है और जब पशुपतिनाथ ही नहीं रहेंगे तो फिर हम किसके प्रति अपनी भक्ति-भावना-आस्था प्रकट करेंगे। इसलिये जब तक हम जीवित रहे तब तक और हमारे बाद हमारी पीढि़या अनन्तकाल तक भगवान श्री पशुपतिनाथ की नयनाभिराम दिव्य छबि के दर्शन करती रहे। इसका विचार भी हमें करना होगा। रहा प्रश्न तापेश्वर महादेव गेट खोलने का तो विश्वास है कि 6 अक्टूबर को होने वाली प्रबंध समिति की बैठक में गेट का ताला खोला जाने संबंधी उचित निर्णय लिया जावेगा। जिससे भगवान श्री पशुपतिनाथ मेले में आने वाले मेलार्थी तथा अभिषेकार्थी भगवान श्री पशुपति के दर्शनोपरान्त भगवान तापेश्वर महादेव के दर्शन पूजन-अर्चन- अभिषेक आदि का भी पुण्य लाभ ले सकेंगे।

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