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तेलिया तालाब का पानी होने लगा है हरा, नालियो का गंदा पानी मिल रहा है तालाब मे

Story Highlights

  • गंदे पानी को रोकने की कोई योजना नहीं, सीवरेज लाइन प्रोजेक्ट में भी नहीं है यह क्षेत्र
  • 4 साल पहले बना था 90 लाख रुपए का प्रोजेक्ट, नई परिषद नहीं दे रही ध्यान
  • तेलिया तालाब के पानी का रंग हरा हो गया है।
  • वायडी नगर थाने के पीछे से निकल रहे नाले का पानी तालाब में मिल रहा है।
  • मेघदूत नगर तरफ से तालाब में आने वाले नाले में गंदगी के कारण जलकुंभी से भर गया है।
  • गांधी नगर की ओर से आ रहा गंदा पानी।

मंदसौर। तेलिया तालाब  मंदसौर की आधी आबादी की प्यास बुझाता है अब उसके अस्तित्व पर ही खतरा बना हुआ है। तालाब एवं उसके पानी को बचाने के लिए नगर पालिका दोहरी नीति अपना रही है। तालाब में मिल रहे गंदे पानी को रोकने के लिए नए सीवरेज प्लान में अभी तक कोई योजना नहीं है। जबकि इसमें 16 कॉलोनियों के साथ ही औद्योगिक क्षेत्र की तमाम फैक्टरियों का गंदा पानी सीधे मिल रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल-एनजीटी द्वारा तालाब के अधिकतम जल भराव क्षेत्र में किसी भी निर्माण पर रोक के बावजूद प्रभावशालियों को अपनी जमीनें ऊंची करने का मौका दिया जा रहा है। गंदा पानी मिलने से तालाब का पानी प्रदूषित हो रहा है पानी का रंग भी हरा हो रहा है।

तेलिया तालाब में वर्षों से महू-नीमच राजमार्ग पर मंडी से आगे तक बनी लगभग 16 कॉलोनियों एवं फैक्टरियों का गंदा पानी मिल रहा है। इसमें नपा की विकसित की हुई मेघदूत नगर, गृह निर्माण मंडल की गांधी नगर और कर्मचारी आवास निगम सहित अन्य निजी कॉलोनियां शामिल हैं। इन कॉलोनियों से निकल रहे गंदे पानी की समस्या हल नगर पालिका नहीं कर पा रही है। चार साल पहले कॉलोनियों के गंदे नालों के पानी को जिपं के पास स्थित नाले में पहुंचाने के लिए 90 लाख रुपए का प्रोजेक्ट तैयार हुआ था, इसकी फाईल दिल्ली में एपको तक भी पहुंची थी पर वर्तमान नगर पालिका ने इस पर ध्यान नहीं दिया। इस कारण तालाब सौंदर्यीकरण, पैदल पुल एवं अन्य कार्यों पर दो करोड़ खर्च करने के बाद भी तालाब का पानी शुद्घ नहीं है।

एक नाले में ही डाल रहे सारी गंदगी: मुल्तानपुरा तरफ से आ रहा नाला ही तेलिया तालाब में पानी की आवक का एकमात्र स्रोत है। और इसी नाले में मेघदूत नगर, यश नगर, गांधी नगर, कर्मचारी कॉलोनी सहित 16 कॉलोनियों के साथ ही औद्योगिक क्षेत्र व बायपास की फैक्टरी का रसायन युक्त जहरीला पानी नपा द्वारा डाला जा रहा है। जो सीधे तालाब में पहुंच रहा है। इसी कारण तालाब का पानी प्रदूषित होकर हरा हो गया है।

90 लाख के प्रोजेक्ट पर नहीं हुआ काम:: चार वर्ष पहले जिला योजना समिति की बैठक में सदस्य बाबा पंचोली ने तालाब में मिलने वाली गंदे पानी की समस्या उठाई थी। इसके बाद जिला योजना समिति ने कॉलोनियों के गंदे पानी को तालाब में मिलने से रोकने के लिए 90 लाख का एक प्रोजेक्ट तैयार किया। इसमें नवनिर्मित ऑडिटोरियम के यहां से एक नाला शा. कन्या महाविद्यालय के किनारे होते हुए जिपं के सामने स्थित नाले में डालने की योजना तैयार की गई थी। यह प्रोजेक्ट दिल्ली एपको को भी भेजा गया था। उसके बाद नपा चुनाव में नई परिषद आ गई और वर्तमान परिषद ने इस प्रोजेक्ट पर काम नहीं किया, जिसके कारण यह महती योजना कारगर साबित नहीं हो पाई।

एनजीटी का आदेश का पालन ही नहीं: तालाब के अस्तित्व पर मंडराते खतरे को लेकर कुछ लोग तालाब को बचाने के लिए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण(एनजीटी) तक भी गए हैं। नपा के पूर्व सभापति डॉ. दिनेश जोशी ने ही एनजीटी में तालाब की जमीन पर बढ़ते अतिक्रमण को लेकर याचिका दायर की थी। जिस पर 17 फरवरी 2016 को एक आदेश हुआ है। इसमें न्यायाधीश दिलीपसिंह ने तेलिया तालाब के 1974 के नक्शे के आधार पर अधिकतम जल भराव क्षेत्र से 90 मीटर तक किसी भी तरह के निर्माण पर प्रतिबंध लगाया था। इसके बावजूद नपा में अपने-अपने हिसाब से अनुमतियां दी जा रही हैं। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों में तालाब बचाने को लेकर कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।

कुएं-बावड़ियों का जलस्तर बढ़ाता है तैलिया तालाब: तेलिया तालाब से शहर के लगभग 75 प्रश भूमिगत जल स्रोत रिचार्ज होते हैं। मेघदूत नगर, यश नगर, गांधी नगर, अभिनंदन नगर, संजीत नाका क्षेत्र की कॉलोनियां, रामटेकरी सहित अन्य क्षेत्रों के कुएं-बावड़ियों, नलकूपों का जलस्तर बनाए रखने में तालाब की महत्वपूर्ण भूमिका है। तेलिया तालाब पहले जल संसाधन विभाग के अधीन था, नपा ने 2010 में तेलिया तालाब को हस्तांतरित कराया है।

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