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तेलिया तालाब भूमाफियानेताओं का कब्जा, तत्कालीन कलेक्टर भी सवालो के घेरे मे… समय बताएगा तालाब को लेकर कौन तलब होता है?

Story Highlights

  • कर्फ्यू की रात तेलिया तालाब छोटा हुआ, सौ बीघा जमीन डूब से बाहर आई, नेताओं को फायदा हुआ 

भूमाफियानेताओं को लाभ पहुंचाने के लिए तत्कालीन कलेक्टर ने तेलिया तालाब की डूब क्षेत्र की जमीन (एमडब्ल्यूएल यानी मैग्जीमम वाटर लेबल) को मुक्त कर दिया। यह भी तब किया जब जिले में किसान आंदोलन के बाद कर्फ्यू दौरान लागू था। इसी दिन एक अन्य प्रकरण में कलेक्टर के प्रशासनिक कार्य में व्यस्तता का हवाला देकर प्रकरण को आगे बढ़ाया था तालाब का क्षेेत्र नक्शे में कम किए जाने का खुलासा शुक्रवार को आरटीआई एक्टिविस्ट तरुण शर्मा ने किया। खुलासे के बाद पार्षद जनहित में मुद्दा उठाने की बात कहते हुए फैसले की जानकारी नहीं होने की बात कह रही है तो विधायक पार्षद के आवेदन को केवल फार्वर्ड करने की बात कह रहे हैं। इस बीच तत्कालीन कलेक्टर ने आदेश से खुद को अनभिज्ञ बताते हुए उसके गलत होने पर अपील के प्रावधान की बता कह रहे हैं। इस फैसले के बाद नगर के प्रमुख जलस्रोत पर भू माफियाओं का कब्जा बढ़ने की पूरी संभावना बन गई है।

तेलिया तालाब के डूब क्षेत्र में हुए भराव के बाद बनी कॉलोनियों के निवासियों की समस्या दूर करने के उद्देश्य से पार्षद विद्या पुखराज दशोरा ने 17 मई 2016 काे तत्कालीन कलेक्टर स्वतंत्रकुमार सिंह को एक आवेदन दिया। इसकी प्रति सांसद सुधीर गुप्ता, विधायक यशपालसिंह सिसौदिया नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार को भी दी। आवेदन में मंदसौर विकास योजना 2001 का हवाला देकर तेलिया तालाब पर प्रस्तावित सड़क निर्माण कराने तथा तालाब की एमडब्ल्यूएल सीमा नपा तथा नगर एवं ग्राम निवेश द्वारा स्थल सत्यापन का सर्वे करवाया जाने की अपील की गई। इसको अाधार बनाकर विधायक ने 23 मई को पत्र क्रमांक 1093 कलेक्टर को अावश्यक कार्रवाई के लिए लिखा। इस पर तत्कालीन कलेक्टर ने जांच के लिए एक कमेटी बनाई। इसी की रिपोर्ट पर कलेक्टर ने 6 जून 2017 को आदेश जारी कर तालाब की सीमा कम कर दी। इसका सीधा लाभ क्षेत्र के बड़े भूस्वामी विधायक सिसौदिया, सांसद सुधीर गुप्ता उनके परिवार सदस्य, गनेड़ीवाल परिवार सहित कई लोगोें को मिल गया।

यहांपार्षद ने दी गलत जानकारी- पार्षददशोरा ने पत्र में 2001 में मंदसौर विकास योजना का हवाला दिया जबकि विकास योजना का प्लान 2003 में लागू हुआ था। पार्षद ने पत्र में 2004 से 2008 के अंतराल में यशनगर, केशवकुंज अन्य भूमियों को एमडब्ल्यूएल सीमा के बाहर मान्य किए जाने की जानकारी दी। जबकि 2003 में खुद जल संसाधन विभाग ने एसडीएम को पत्र जारी डूब क्षेत्र में हो रहे निर्माण रोकने तथा पटवारी खसरे में प्रविष्टि करवाने की बात कही थी।

भूजलस्तर काफी नीचे, पेयजल की भी अत्यधिक समस्या

मंदसौरनगर का भूजलस्तर काफी नीचे तथा पेयजल की अत्यधिक समस्या है। इसके कारण यह नगर एक जल समस्या मूलक क्षेत्र है। इसके समाधान के लिए तेलिया तालाब का गहरीकरण, ट्यूबवेल खनन पर पूर्णत: प्रतिबंध वर्षा जल संग्रहण प्रणाली काे प्रभावशील किया जाना प्रस्तावित किया। साथ ही नए तालाब के निर्माण की योजना भी नगरपालिका द्वारा किए जाना प्रस्तावित की गई।

आरटीआई एक्टिविस्ट ने भी दी थी कलेक्टर को जानकारी

आरटीआईएक्टिविस्ट शर्मा ने बताया 3 मई 2016 को कलेक्टर मंदसौर से कार्रवाई को लेकर मांग की थी। इसमें उन्हें बताया था कि तालाब डूब क्षेत्र में निजी भूमि स्वामियों द्वारा भराव किया जा रहा है। इसके बाद भी कलेक्टर ने कोई कार्रवाई नहीं की। उलटे भूस्वामियों को लाभ पहुंचा दिया। तालाब का क्षेत्रफल 484 बीघा था। इसमें अब नए नक्शे के अनुसार करीब 100 बीघा भूमि तालाब से बाहर हो गई है। पार्षद ने जो मजबूरी बताई है, वह भी गलत है। सूचना के अधिकार में मिली जानकारी के अनुसार जल संसाधन विभाग ने तालाब के एफटीएल एमडब्ल्यूएल में किसी सर्वे नंबर को बाहर करने हेतु कोई एनओसी जारी नहीं की।

लबालब भरे तेलिया तालाब का जलस्तर अभी से होेने लगा कम

शहर के 30 प्रतिशत से ज्यादा हिस्से के भूजल को रिचार्ज करने वाले तेलिया तालाब में नवंबर माह में ही जलस्तर कम होने लगा है। मानसून सीजन में लबालब भरे तालाब का पानी अभी से किनारों से उतरने लगा है। इसका कारण लगातार तालाब के क्षेत्र में होने वाला अतिक्रमण और कब्जा है। नपा के स्वामित्व वाले इस तालाब के सीमांकन नहीं होने से इसका संरक्षण नहीं हो पा रहा है। जिले में इस बार बारिश कम होने व तालाब का पानी तेजी से कम होना चिंता का कारण बनेगा।

शहर के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित तेलिया तालाब पर मानसून की कम बारिश का असर अभी से दिखने लगा है। हर बार मानसून सीजन की नमी और आवक बनी रहने से तालाब में अक्टूबर माह तक पानी की आवक बनी रहती है। इस बार सितंबर माह में ही आवक कमजोर होने से तालाब का जलस्तर प्रभावित होने लगा है। जिले में इस बार 29.5 इंच बारिश हुई जो औसत बारिश 33.5 इंच से 4 इंच कम है। हमेशा तालाब के किनारों से पानी दिसंबर माह के अंत तक कम हो जाता था लेकिन इस बार यह दिसंबर माह की शुरूआत में ही कम होने लगा है।

कम हो रहा जलभराव क्षेत्र- तालाब का बचाने की बढ़ी मुहिम 2011 में चली थी। तालाब के डूब क्षेत्र की जमीन 126.884 हेक्टेयर का सीमांकन करने पर राजस्व विभाग को 5.5 हेक्टेयर यानि 27 बीघा जमीन अतिक्रमण में मिली थी। हर साल तालाब के जलस्तर की कमी के बाद अतिक्रमण का मामला उठता है पर कार्रवाई नहीं होती है। जून 2017 में नपा और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम बनी लेकिन जांच होेने से पहले ही मानसून आ गया और सीमांकन रिपोर्ट तक तैयार नहीं हुई। रिकार्ड के मुताबिक तालाब की बेस समुद्र सतह से 439.37 मीटर है। जब तालाब में पानी भरता है तो यह जलस्तर 441.80 मीटर यानि 8 फीट ऊंचा होता है। मेघदूत नगर क्षेत्र, ऋषियानंद, रेवास देवडा क्षेत्र जलभराव वाले क्षेत्र में मिट्टी डालकर खेताें की जमीन लगातार ऊंची की जा रही है। इससे तालाब की जलभराव क्षमता कम हो रही है।

नपा अध्यक्ष प्रहलाद बंधवार ने बताया कि तेलिया तालाब के सीमांकन के लिए नपा और राजस्व विभाग की संयुक्त जांच के लिए प्रक्रिया जून माह में शुरू हो गई थी। प्रक्रिया पूरी होने से पहले मानसून सीजन से पानी की आवक होने से नपा जांच रिपोर्ट तैयार नहीं कर पाई है। इस बार जलस्तर कम होने के साथ ही नपा तालाब की सीमा को रिकार्ड के आधार पर तय किया जाएगा। तालाब की सीमा में हुए कब्जों को हटाया जाएगा।

सरकारी रिकार्ड के मुताबिक तेलिया तालाब का निर्माण 1900 में हुआ था। पूरी क्षमता से तालाब भरने पर इसमें 30 एमसीएफटी यानि 1.42 मिलियन क्यूबिक घनमीटर पानी संग्रहित होता है। इस तालाब में बुगलिया नाला, यश नगर नाला, मेघदूत नगर नाला, ऋषियानंद कॉलोनी नाले से पानी आता है। अगस्त-सितंबर माह तक तालाब पूरी क्षमता से भरता है। इसके जलभराव से रामटेकरी, नरसिंहपुरा, संजीत रोड, नई आबादी, मेघदूत नगर सहित कई क्षेत्रों के भू-जलस्रोत रिचार्ज होते हे।

कम बारिश से बढ़ी किल्लत, रामघाट पर दो दिन का ही पानी

इस वर्ष बारिश कम होने से पानी की किल्लत अभी से होने लगी है। अलगे 7 माह तक शहर की प्यास बुझाने के लिए कालाभाटा बांध में 23 फीट पानी ही बचा है। बारिश और उसके बाद चल रहे नदी में बहाव से भराया रामघाट बैराज में अब दो दिन का पानी बचा है। पिछले साल की तुलना में 35 दिन पहले ही कालाभाटा के गेट खोलकर पानी रामघाट पर लाया जाएगा। इधर नपा अमले द्वारा मोटर लगाकर बैराज की डाउन स्ट्रीम से पानी उलीचकर जैसे-तैसे 15 दिन निकाले हैं लेकिन अब बैराज पर दो दिन की सप्लाय का पानी ही शेष बचा है।

रामघाट पर जलस्तर बढ़ाने के लिए नगर पालिका 2 दिसंबर को कालाभाटा बांध का एक गेट खोलकर रामघाट पानी लाएगी। 2016 में बारिश के बाद कालाभाटा बांध के गेट पहली बार 6 जनवरी 17 को खोले गए थे और इस बार दिसंबर की शुरुआत में ही कालाभाटा का पानी लेना पड़ रहा है। इस साल कुल 26 इंच बारिश शहर में हुई है। कम बारिश के कारण कुओं में अभी से ही पानी टूटने लगा है। तेलिया तालाब भी खाली होने लगा है। बारिश थमने से ढाई माह बाद ही यह स्थिति है तो गर्मियों की शुरुआत में ही शहर में जलसंकट गहरा सकता है। कालाभाटा बैराज पर 15 नवंबर से ही पानी खत्म होने लगा था। नपा के जलकार्य अमले ने मोटर लगाकर बैराज के दूसरे छोर में नदी व आस पास के अधिग्रहित कुओं का पानी बैराज में डालकर 15 दिन निकाल लिए हैं। अब बैराज पर महज 2.7 फीट पानी भरा हुआ है। रामघाट में भरे पानी से शहर में दो दिन की सप्लाय हो जाएगी। उसके बाद कालाभाटा के गेट खोलकर रामघाट का जल स्तर 10 फीट किया जाएगा।

एक माह पहले खोलना पड़ रहे गेट

इस साल 16 सितम्बर के बाद बारिश नहीं हुई जबकि गत वर्ष 15 अक्टूबर तक शिवना में पानी की आवक थी। इसके कारण भी शहर में जलसंकट की आहट अभी से होने लगी है। नपा का दावा है कि जून तक शहर को पानी बराबर मिलता रहेगा। शहर में सप्लाय के लिए गत वर्ष कालाभाटा के गेट पहली बार 6 जनवरी को खोले थे, जबकि इस साल 35 दिन पहले खुल जाएंगे।

पानी कम, सप्लाई बढ़ी

पानी की किल्लत के बीच पिछले वर्षों की तुलना में 2 लाख गैलन प्रतिदिन सप्लाय बढ़ी है। नपा के अनुसार शहर में प्रतिदिन लगभग 26 लाख गैलन से अधिक पानी सप्लाय होता है, पिछले वर्ष 24 गैलन प्रतिदिन सप्लाई हो रही थी। नए फिल्टर प्लांट से 500 क्वार्टर और किटियानी की टंकी भर रही है। नल कनेक्शन भी बढ़े हैं। नपा के अधिग्रहित कुओं में भी पानी तेजी से टूट रहा है।

कालाभाटा के गेट आज खोलेंगे

रामघाट बैराज पर दो सप्लाई का पानी बचा है। अब कालाभाटा बांध के गेट खोलकर रामघाट का जलस्तर 10 फीट किया जाएगा। इससे 25 दिसंबर तक सप्लाय कर लेंगे। अभी कालाभाटा पर 23 फीट पानी है। पिछले साल पहली बार 6 जनवरी को गेट खोले थे। इस बार पानी कम है। कुओं में भी पानी कम होने लगा है। सप्लाय भी बढ़ गई है। 26 लाख गैलन पानी प्रतिदिन सप्लाय हो रहा है। पेयजल संकट नहीं हो इसके लिए प्रयास कर रहे हैं। रामघाट पर 15 नवंबर को ही पानी खत्म हो गया था हमने मोटर लगाकर बैराज के आगे से एवं कुओं से पानी खींचकर बैराज में डाला जिससे नवंबर का काम तो चल गया। गर्मी में दिक्कत ज्यादा आएगी लेकिन शहर में बराबर सप्लाय होती रहेगी। स्थिति देखकर निर्णय लेंगे।

-पुलकित पटवा, सभापति, जलकार्य समिति, नपा

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