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तैलिया तालाब: जिला प्रशासन द्वारा गठित टीम आखिरकार पहुॅच ही गई वेस्ट वीयर, जॉच अंजाम तक पहुॅचे

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मामला – तैलिया तालाब को जमींदोज करने का

मंदसौर। प्रशासन राजनेताओं और भूमाफियाओं के महागठबंधन के कारण 484 बीघा में फैला दान से बना तैलिया तालाब की लगभग 100 बीघा जमीन पर रसूखदारों का कब्जा कराने की नीयत से जो खेल तत्कालिन कलेक्टर स्वतंत्रकुमार सिंह के नेतृत्व में खेला गया। उसके उजागर होने से कई चमकदार चेहरों पर रौनक ही चली गई है। जमीन के इस खेल से नगर में जो बवाल मचा उसका सारा श्रेय आरटीआई कार्यकर्ता तरूण शर्मा एवं मिडिया जगत को ही जा रहा है। इस मामले में सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों शंकाओं के घेरे में है। ऐसे में उठे बवाल को शांत करने के लिये कलेक्टर ओ पी श्रीवास्तव ने तालाब की जॉच का बेड़ा उठाया,कमेटी गठित कि और आखिरकार गठित कमेटी ने सोमवार को तालाब पर बने वेस्ट वियर की नपती कर यह खंगालने का प्रयास किया कि वास्तव में वेस्ट वियर की उंचाई लगभग 6 से 12 इंच कम क्यों व किसके कहने पर की गई। ताकि जमीन की भूमि खाली रहें और उस पर जल नहीं पूॅजीपति अठखेलियॉ करते रहें।

सोमवार को तैलिया तालाब पहुॅचे दल में अति कलेक्टर अर्जुन डाबर, जलसंसाधन मंदसौर कार्यपालन यंत्री श्री निनामा, गांधीसागर जलसंसाधन के कार्यपालन यंत्री सहित नगर पालिका का तकनीकी अमला भी था। जिसने वेस्ट वीयर की नपती की है। जॉच दल अपनी रिपोर्ट आज मंगलवार को कलेक्टर सौंप सकता है। जॉच की रिपोर्ट में कौन दोशी है यह तो रिपोर्ट के सौंपे जाने के बाद ही सामने आ पायेगी। लेकिन यह तो तय है कि तैलिया तालाब महागठजोड़ के लिये गले की हड्डी साबित हो रहा है। जो न उगलते बन रहा है न निगलते।

जॉच अंजाम तक पहुॅचे, दोषी हो दण्डित

वैसे तैलिया तालाब की जमीन पर भूमाफियाओं का निरंतर कब्जा होता रहा है। शिकायतों पर जॉच भी होती है। लेकिन जॉचे अंजाम तक नहीं पहुॅचने के कारण रसूखदरों के हौंसले बुलन्द होते गये और वे तैलिया तालाब की छाती पर कब्जा करते गये। कहीं यह जॉच भी ठण्डे बस्ते में नहीं चली जायें। नहीं तो तालाब जमीन पर नहीं इतिहास की पुस्तकों में ही सिमट जायेगा।

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