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त्रिलशा नंदन वीर के जयकारों से गूंजी पौषधशालाएॅ 

जन्मवाचन समाप्ती पर पालनाजी का जूलुस निकला

मन्दसौर। गुजराती की एक सुक्ति का अर्थ है-जन्म लेना, जीना और मर जाना आर्डिनरी है लेकिन जाग जाना एक्सट्रा आर्डिनरी है। जागने की प्रक्रिया का संबंध 84 लाख योनियों के साथ जुड़ा है। जन्म और मृत्यु के बीच की प्रक्रिया में जागृत जिंदगी केवल मनुष्य योनी में ही संभव है। मनुष्य जीवन में सोने से कुछ हासिल नहीं होगा, हमें जागना होगा।

उक्त उद्गार सोमवार को संजय गांधी उद्यान में 99 वर्षीय वयोवृद्ध साध्वी सुदर्शना श्रीजी म.सा. की उपस्थिति में प्रभु जन्म वाचन पर मेवाड़ मालव ज्योति साध्वी श्री चंद्रकला श्रीजी ने कही। साध्वीजी ने कहा कि तीन बड़े माने जाते हैं। देवता में बड़े रिद्धिशाली, पशुओं में बड़े शक्तिशाली और मनुष्य में बड़े बुद्धिशाली माने जाते हैं। सिंह वनराज है क्योकि बगैर सेना के भी वह शक्तिशाली है। मनुष्यों में बुद्धिशाली बड़ा होता है। बुद्ध पुरुषों की तरह एक क्षण जी लेना श्रेष्ठ है, बुद्धुओं की तरह हजार वर्ष जीने की अपेक्षा। बुद्ध और बुद्धु में केवल एक मात्रा का ही फर्क है लेकिन कोई किसी को आज बुद्धु कह दे तो भौहें तन जाती है। हम चाहते हैं हमें लोग बुद्धिमान कहे, बुद्धिहीन नहीं।

 

साध्वीजी ने कहा कि मनुष्य जीवन में जो बुद्धिशाली होता है वह श्रेष्ठ माना जाता है लेकिन मार्ग कोन सा पकड़ रखा ये महत्वपूर्ण होता है। जो अपने जीवन की शक्ति, वस्तुओं को ऐसी चीजों में लगाता है जो मौत के बाद उसका साथ निभाने वाली नहीं वह बुद्धु और जो मौत के बाद साथ निभाने वाली चीजों में ध्यान लगाता है वो बुद्ध होता है उसके बाद प.पू. साध्वीजी श्री चंद्रकला श्रीजी के मुखारविंद से प्रभुजी का जन्म वाचन प्रारंभ हुआ।

प्रभु जन्म वाचन की समाप्ति पर उपस्थित जन समुदाय द्वारा अक्षत से प्रभु जी को बधाया गया व महाआरती की गई जन्म वाचन के पूर्व चढ़ावे का लाभ लिया। जिसमें पालनाजी के चढ़ावे का लाभ अनिलकुमार वरदीचंद धींग ने लिया। उसके बाद सपनाजी के चढ़ावे का लाभ क्रमशः दिनेश कुमार मेहता, आनंदीलाल चंडावला, महेंद्रकुमार चौरडि़या, पारसमल जीणवाला, राजेंद्र कुमार जीणवाला, दशरथमल जीणवाला, प्रकाशचंद्र डोसी, नेमीचंद कोठारी, महेंद्र भांडावत ने लिया। प्रभुजी के जन्म वाचन के समापन के बाद पालना जी का जुलूस अनिल कुमार धींग के निवास पर पहुंचा जहां पर पालना जी पर विराजमान प्रभु जी की आरती धींग परिवार द्वारा की गई।

महावीर स्वामी जमोत्सव पर निकला वरघोड़ा। पिपलियामंडी। स्थानीय श्वेताम्बर जैन मंदिर में चल रहे पर्युषण पर्व के पांचवे दिन जैसे ही पुज्य जिनप्रियाश्रीजी म. सा.  ने कल्पसूत्र ग्रंथ में भगवान महावीर स्वामी के जन्म का वाचन किया पुरा आराधना भवन जय जयकार से गूंज उठा। प्रभूश्री को अक्षत व श्रीफल से वधाया ओर केसरिया रंग के छापे लगाकर सभी ने एकदूजे को बधाई देकर महोत्सव की खुशियां मनाई गई। भगवान के पालनाजी के चढ़ावे के लाभार्थी श्री सुरेशकुमार दख परिवार बना। तत्पश्चात लाभार्थी परिवार के निवास पर चौदह स्वप्न संग वरघोड़ा बैंड बाजों के साथ पहुँचा। जिसमे बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद थे। उक्त जानकारी अशोक कुमठ ने दी।

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