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त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की जलाधारी जैसी ही बनेगी भगवान पशुपतिनाथ प्रतिमा की जलाधारी

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  • 200 किलो चांदी से बनना है जलाधारी, निर्माण कार्य हुआ प्रारंभ

अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ मंदिर में चांदी की जलाधारी बनाने का काम सोमवार से प्रारंभ हो गया। सोमवार को कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह ने पशुपतिनाथ मंदिर पहुंचकर जलाधारी के डिजाईन का अवलोकन किया। इसके साथ ही अन्य दिशा-निर्देश भी दिए। कलेक्टर ने कहा कि यह डिजाइन त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग में बनाई गई चांदी की जलाधारी जैसी ही है। ठेकेदार ने ज्योतिर्लिंग में भी चांदी की जलाधारी का निर्माण किया है।

जलाधारी में 3 स्थानों पर अंकित होगा ‘ऊँ’

त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग में बनाई गई चांदी की जलाधारी की जो डिजाईन ठेकेदार ने मंदिर समिति को प्रस्तुत की है। उसमें 3 स्थानों पर ‘ऊँÓ अंकित होगा। वहीं दो स्थानों पर ऊँ नम: शिवाय: लिखा जाएगा। इसके अलावा जलाधारी के सेंंटर भाग में सर्प की आकृति अंकित की जाएगी। वहीं एक डमरु व दो शंख की आकृतियां भी जलाधारी की डिजाइन में अंकित की गई है।

200 किलो चांदी से बनना है जलाधारी

रविवार को नासिक के ठेकेदार ने जलाधारी का अंतिम डिजाइन मंदिर समिति के समक्ष प्रस्तुत किया। मंदिर प्रबंध समिति के सदस्यों एवं मंदिर समिति के सहसचिव अनिल भट्ट की उपस्थिति में जलाधारी की इस डिजाइन के अनुसार ही जलाधारी बनाने की मंजूरी दी गई। अब जलाधारी बनाने में पीतल का उपयोग नहीं किया जाएगा। केवल चांदी की ही परत चढ़ेगी। उल्लेखनीय है कि मंदिर समिति ने जलाधारी पर चांदी की परत चढ़ाने के लिए 200 किलो चांदी खरीदी है।

अब नहीं बनेेगा पीतल का गेज

मंदिर समिति की करीब 3 माह पहले हुई बैठक में निर्णय लिया गया था कि जलाधारी की मजबूती के लिए पहले पीतल का गेज लगाया जाएगा। इसके बाद उस पर 200 किलो चांदी की परत चढ़ाई जाएगी। बैठक में 14 गेज (मोटाई) की चांदी की जलाधारी व 4 गेज की पीतल की जलाधारी लगाने का निर्णय लिया गया था। रविवार को मंदिर कार्यालय में हुई बैठक में निर्णय लिया गया कि अब जलाधारी में पीतल का गेज नहीं लगाया जाएगा। अब 14 गेज की ही चांदी की परत जलाधारी पर चढ़ाई जाएगी। इससे मंदिर समिति को दो फायदे होंगे। एक और जहां पीतल नहीं लगेगा वहीं दूसरी और ठेकेदार को पीतल का गेज बनाने का मेहनताना भी नहीं देना पड़ेगा। इस निर्णय से मंदिर समिति के करीब 2 लाख रुपए बचेंगे।

त्र्यंबकेश्वर  ज्योतिर्लिंग में बनाई गई चांदी की जलाधारी जैसी ही भगवान पशुपतिनाथ की चांदी की जलाधारी बनेगी। जलाधारी निर्माण पर निगरानी के लिए 8 सदस्यीय समिति बनाई गई है। 14 गेज की चांदी की जलाधारी करीब 50 साल तक खराब नहीं होने की गारंटी ठेकेदार ने मंदिर प्रबंध समिति को दी है।

– स्वतंत्र कुमार सिंह, कलेक्टर एवं अध्यक्ष पशुपतिनाथ मंदिर प्रबंध समिति, मंदसौर

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