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त्‍यौहार व मेलें

भारत एक ऐसा देश है जो विविधता में एकता का उदाहरण है क्योंकि यहाँ हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई तथा जैन आदि धर्म एक साथ निवास करते हैं। कुछ त्योहारों को राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है जबकि कुछ क्षेत्रीय स्तर पर मनाये जाते हैं। पद्धति और धर्म के अनुसार उत्सवों को अलग-अलग वर्गों में वर्गीकृत किया गया है। भारत सभी क्षेत्रों में अलग अलग संस्कृति है। यहाँ उत्तर भारत में अलग संस्कृति, राजस्थान में राजस्थानी, गुजरात में गुजरती,दक्षिण व पूर्व भारत में बिलकुल अलग संस्कृति मिलेगी। इसी प्रकार सम्पूर्ण भारत की मूल भाषाए भी अलग अलग है।

पूरी दुनिया में भारत को पारंपरिक और सांस्कृतिक उत्सव के देश के रुप में अच्छी तरह से जाना जाता है क्योंकि ये बहुधर्मी और बहुसंस्कृति का देश है। भारत में कोई भी हर महीने उत्सवों का आनन्द ले सकता है। यह एक धर्म, भाषा, संस्कृति और जाति में विविधताओं से भरा धर्मनिरपेक्ष देश है, ये हमेशा मेलों और त्योहारों के उत्सवों में लोगों से भरा रहता है। हर धर्म से जुड़े लोगों के अपने खुद के सांस्कृतिक और पारंपरिक त्योहार है। पूरे राष्ट्र में सभी धर्मों के लोगों द्वारा कुछ पर्व मनाये जाते हैं। ये अपने पीछे के महत्वपूर्ण इतिहास, रीति रिवाज और विश्वास के अनुसार अलग अंदाज में हर एक पर्व को मनाते हैं। हर एक उत्सव का अपना एक इतिहास, पौराणिक कथाएँ और मनाने का विशेष महत्व है। विदेशों में रह रहे भारत के लोग भारत के उत्सवों को बहुत उत्साह और जुनून के साथ मनाते हैं।
मन्‍दसौर शहर में भी अनेक धर्म व जातियों के लोग निवास करते है व अपने अपने उत्‍सव बड़ी धूम धाम से मनाते है पूरे विश्‍व में जो भारत की अनेकता में एकता की पहचान है उसको चरितार्थ करने में मन्‍दसौर भी अपनी एक अनोखी भूमिका निभाता है।

होली

होली भारत का एक प्रमुख त्यौहार है। होली के दिन खाली जगह पर बहुत सारी सूखी झाड़िया रखी जाती है। सामान्यतया यह सूखी झाड़िया कांटेदार बेर के पेड़ की होती हे। लेकिन कभी – कभी आसानी से जलने वाले किसी भी सूखे झाड़ीनुमा पेड़ या पोधे को काटकर भी रख देते है। यह झाड़िया शंकुरूपी आकृति में रखी जाती है। इस शंकुरूपी आकृति को होली कहते है। यह होली कितनी बड़ी या कितनी ऊँची बनाएँगे यह नियत नहीं होता हे। लोगो की जितनी इच्छा होती हे उतनी ऊँची होली बनाते हे। सामान्यतया प्रत्येक मोहल्ले व प्रत्येक गाँव में एक होली बनाते है। लेकिन आजकल शहरो में कई लोग व्यक्तिगत स्तर पर भी होली बनाकर जलाते है। कुछ बच्चे या बड़े समूह में चंदा इकट्ठा कर के भी इस कार्यक्रम को अंजाम देते है। इसे शाम के समय शुभ मुहूर्त में जलाया जाता है। होली जलाने के दूसरे दिन लोग एक दूसरे के ऊपर रंग डालते है। यह दूसरा दिन धुलंडी का त्यौहार कहलाता है।

दीपावली

दीपावली 4 दिनों का त्यौहार होता है। दीपावली के प्रथम दिन धनतेरस का त्यौहार होता है। इस दिन खरीददारी की जाती है। शाम को माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। धनतेरस के दूसरे दिन रूपचौदस मनाया जाता है। इस दिन लोग जल्दी उठकर नहाते है। ऐसा माना जाता है की इससे रूप निखरता है तथा सुन्दर बनते है। इसके अगले दिन दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है। नए नए तथा सुन्दर सुन्दर कपडे पहने जाते है। बच्चे व बड़े बहुत सारे पटाखे जलाते है। पटाखे विशेषतया शाम को 7 से 8 बजे बाद जलाते है ताकि अँधेरे में उनका सुन्दर नजारा दिखे। इस दिन शाम को आसमान में आतिशबाजी का सुन्दर नजारा देखने को मिलता है। इस दिन शाम को घर की छत पर व घर के बाहर के दरवाजों के यहाँ बहुत सारे छोटे छोटे दीपक जलाये जाते है। भगवान के पूजाघर में दीपक रखते है। तथा उस दीपक में बेर का छोटा फल , मीठे गन्ने का छोटा टुकड़ा इत्यादि रखते है। शाम को माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। दीपावली के अगले दिन खेखरे का त्यौहार होता है। खेखरे पर गायो को रंगो से रंगा व खेलाया जाता है।

ईद

ईद मुस्लिम समाज का एक प्रमुख त्यौहार है। ईद के दिन अल्लाह को विशेष आग्रह के साथ याद करते है। खुशिया मनाते है। एक दूसरे के गले मिलते है तथा दावत देकर खुशियो का इज़हार करते है।

रक्षा बंधन

रक्षा बंधन का त्यौहार भाई बहिन का त्यौहार है। बहने पूजा की एक थाली सजाती है , जिसमे दीपक , लाल कन्कु , पानी की लोटी , थोड़े से चावल , मिठाई . राखी इत्यादि रखती है। इस थाली से बहने भाई की आरती उतारती है। इस दिन सभी बहने अपने भाई के सिर पर लाल कंकु का तिलक लगाकर भाई की कलाई पर राखी बांधती है। कई बहने भाई की आरती नहीं उतारकर सीधे राखी बांधती है। राखी एक खूबसूरत डिजाइनदार डोरा होता है। डोरे पर फूलनुमा डिजाइनदार व सुन्दर संरचना होती है। इसके बदले में भाई बहिन को उपहार देते है। तथा बहन की रक्षा का वचन देते है। शादीशुदा बहिन को लेने रक्षा बंधन के कुछ दिन पहले भाई उसकी बहन के पति के घर जाता है। रक्षाबंधन के दिन घर में अच्छे अच्छे पकवान तथा मिठाईया बनाकर खाई तथा खिलाई जाती है। रक्षाबंधन बहुत ख़ुशी का त्यौहार है।

विजया दशमी

विजया दशमी के दिन रावण जलाया जाता है। इस दिन किसी बड़े खाली मैदान में रावण का बहुत बड़ा पुतला बनाया जाता है। रावण के पुतले से दूर किसी दूसरे स्थान पर एक व्यक्ति भगवान राम जैसी वेशभूषा पहनकर तैयार होता है तथा भगवान राम बनता है। यहाँ पर भगवान राम के साथ लक्ष्मण तथा भगवान हनुमान इत्यादि भी बनते है। तथा वहा से सभी साथ में सुन्दर रथ में सवार होकर बैठकर गाजे बाजे से बेंड बाजो व ढोल नगाड़ो के साथ रावण को जलाने के लिए रवाना होते है। तथा शहर में घूम कर एवं सवारी निकालकर रावण दहन के स्थान पर पहुँचते है। रावण के पुतले से कुछ मीटर की दुरी पर किसी को माता सीता बना कर बिठाते या बिराजमान करते है। भगवान राम व अन्य पहले माता सीता से मिलते है। माता सीता से मिलने के बाद रावण दहन किया जाता है। इस प्रकार भगवान राम रथ में बैठकर रावण के पुतले के पास पहुँचते है। फिर तीर मारकर भगवान श्री राम उस रावण का दहन करते है। सभी लोग मुख्यतया रावण दहन को देखने आते है। कई बार रावण दहन के बाद पटाखो इत्यादि की आतिशबाजी भी की जाती है। यह बुराई पर अच्छाई की विजय का त्यौहार है।

नवरात्री

नवरात्री का त्यौहार नो दिनों तक मनाया जाता है। इन नो दिनों तक माँ दुर्गा की स्थापना व पूजा की जाती है। प्रथम दिन किसी पवित्र व अच्छी जगह माँ दुर्गा की प्रतिमा की स्थापना की जाती है। नो दिन तक प्रत्येक शाम को लोग इस प्रतिमा के चारो और गरबा व डांडिया नृत्य करते है। नो दिन तक माता दुर्गा की इस जगह पूजा की जाती है। नौवे दिन माँ दुर्गा की प्रतिमा को पानी में पधराया जाता है।

श्री कृष्ण जन्मास्टमी

श्री कृष्ण जन्मास्टमी को भगवान श्री कृष्ण का जन्मदिन मनाया जाता है। इस दिन भगवन श्री कृष्णा की पूजा व्रत इत्यादि किये जाते है। इस दिन चौराहे इत्यादि जगह पर रस्सी से मटकी बाँधी जाती है। यह दही की छोटी मटकी होती है। वहा के लड़के मानव पिरामिड बनाकर उस दही की मटकी को हाथो से फोड़ते है। इस प्रकार भगवान श्री कृष्णा के बचपन के शोक को दोहराते है।

गणेश चतुर्थी

गणेश चतुर्थी पर हिन्दू भगवान गणेशजी की पूजा की जाती है। कई प्रमुख जगहों पर भगवान गणेश की बड़ी प्रतिमा स्थापित की जाती है। इस प्रतिमा का नो दिन तक पूजन किया जाता है। बड़ी संख्या में आस पास के लोग दर्शन करने पहुँचते है। नो दिन बाद गाजे बाजे से श्री गणेश प्रतिमा को किसी तालाब इत्यादि जल में पधराया जाता है।

महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि हिन्दू भगवान शिव का त्यौहार है। इस दिन लोग शिव मंदिर में दर्शन करने जाते है। इस दिन शिव मंदिरो में भारी भीड़ लगती है। इस दिन मंदिरो में भगवान शिव को विशेष श्रंगार कराया जाता है। इस दिन लोग भगवान शिव की पूजा व्रत इत्यादि करते है।

गणगोर

गणगोर के दिन लडकिया माता गणगोर की पूजा करती है। यह पूजा विशेष स्थान पर की जाती है। इस पूजा में पेड़ो की पत्तिया, हरी गास व फूल इत्यादि का प्रयोग किया जाता है। इस दिन कई जगहों पर मेला लगता है। इन मेलो में लोगो की भीड़ पड़ती है।

मकर संक्रांति

मकर संक्रांति प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिन सभी घरो में तिल के लड्डू व तिल के पकवान बनाये जाते है। बच्चे व बड़े मैदान में खेलते है। इस दिन गिल्ली डंडा, सितोलिया व क्रिकेट इत्यादि खेले जाते है।

क्रिसमस

क्रिसमस ईसाई समाज का एक प्रमुख त्यौहार है। इस दिन भगवान यीशु को याद करते है। किसी पेड़ को बहुत सारे रौशनी के रंगबिरंगे छोटे छोटे बल्ब इत्यादि से सजाकर उसे क्रिसमस ट्री बनाते है। इस दिन श्रद्धावान व्यक्ति विशेष पोशाक व गोल लम्बी टोपी पहनकर सांताक्लॉज बनता है। यह शांताक्लाज बच्चो को उपहार बाटता है। माता पिता बच्चो को उपहार देते है। घर में अच्छे अच्छे पकवान बनाकर खाए तथा खिलाये जाते है। तथा यह दिन बहुत ख़ुशी से मनाया जाता है। भारत में इस दिन सरकारी छुट्टी घोषित होती है।

बसंत पंचमी

बसंत पंचमी के दिन मौसम सुहाना होता है। बसंत पंचमी को कई जगह मेला लगता है। इस मेले में लोग खाने पिने का आनंद लेते है। मेले में बच्चो के लिए खिलोने इत्यादि मिलते है। बसंत पंचमी के दिन लोग समूह में उद्यान इत्यादि में घूमने जाते है।

गुरु पूर्णिमा

गुरु पूर्णिमा का दिन अत्यंत ही पवित्र माना जाता है। इस दिन लोग गुरु की पूजा व व्रत इत्यादि करते है। इस दिन लोग गरीबो को दान पुण्य करते हैै।

कार्तिक पूर्णिमा

कार्तिक पूर्णिमा के दिन को बहुत पवित्र माना जाता है। यह हिन्दू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक मॉस की पूर्णिमा को आता है। इस दिन दान पुण्य व्रत करना श्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन भगवान की पूजा की जाती है।

मन्दसौर जिले के प्रमुख मेलों की सूची
क्र. स्‍थान का नाम दिवस तहसील
  • 1
श्री पशुपतिनाथ महादेव मेला, मन्‍दसौरकार्तिक कृष्‍ण 11मन्‍दसौर
  • 2
नालछा माता मेला, मन्‍दसौरआषाढ़ सुदी 15मन्‍दसौर
  • 3
मोती बाबजी मेला, चन्‍द्रपुराश्रावण बदी 02मन्‍दसौर
  • 4
नाहर सैय्यद का मेलाफाल्‍गुन पूर्णिमामन्‍दसौर
  • 5
हँसमुखा ऋषभदेव जैन तीर्थ, धमनारचैत्र वदी 08मन्‍दसौर
  • 6
कोटेश्‍वर महादेव, सीतामऊचैत्र कृष्‍णा अमावस्‍यासीतामऊ
  • 7
मोड़ी माताजी मेला, सीतामऊश्रावणी अमावस्‍यासीतामऊ
  • 8
रामनवमी मेला, सुवासराचैत्र सुदी 01सुवासरा
  • 9
शिवजी का मेला, शामगढ़वैशाखगरोठ
  • 10
कालेश्‍वरजी का मेला, साठखेड़ाआश्विनगरोठ
  • 11
ताखाजी का मेला, नावलीवैशाख सुदी 15भानपुरा
  • 12
दुधाखेड़ी माता जी मेलाआश्विन सुदी 09भानपुरा
  • 13
रामदेवजी का मेला, मल्‍हारगढ़भादवा 02मल्‍हारगढ़
  • 14
बही पार्श्‍वनाथ, बहीपौष कृष्‍ण 10मल्‍हारगढ़