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थोड़ी सी बारिश के बाद फसलों की बुवाई हुई शुरू

मंदसौर। जिले में इस बार अभी तक मानसून ने दस्तक तो दे दी है पर अभी जिले में कहीं भी बोवनी लायक बारिश नहीं हुईहै। इसके बाद भी कईगांवो में लोगों ने मानसून के सक्रिय होने की आस में बोवनी शुरु कर दी है। जबकि कृषि वैज्ञानिकों का कहना हैकि जब तक 4 से 5 इंच बारिश ना हो जाएं और खेत की जमीन 4 से 5 इंच अंदर तक गीली ना हो, तब तक बुवाईना करें। कई किसान रबी की फसल जल्द ही बुवाईकी योजना बनाकर समय से पहले ही बुवाईकार्यमें व्यस्त हो गए है। हालांकि मानसून अभी 25 जून के बाद ही सक्रिय होने की संभावना जताईजा रही है। जिले में अभी 2.7 इंच औसत वर्षा ही दर्ज की गई है।

बीज निरोग होगा तो फसल का अधिक होगा उत्पादन

बीज फसलों के अधिक उत्पादन में अहम भूमिका निभाता है। यदि बीज निरोग, स्वस्थ व ओजपूर्ण है तो फसल भी अच्छी होगी। इसके लिए जरुरी है कि बीज स्वस्थ रोग रहित एवं कीटो से ग्रसित न हो अच्छे बीज के चुनाव के उपरांत उनका उचित बीजोपचार अतिआवश्यक है। उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास आरएल जमरा ने बताया कि फसल में रोग मुख्य रूप से बीज या मृदा द्वारा फैलते है। जो उपज घटाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते है चूँकि अधिकांश पौधों के रोग आंशिक अथवा पूर्णरूप से बीज जनित होते है अत: बीजोपचार रोगों को रोकने का सस्ता व प्रभावी तरीका है। बीज उपचारित करने से बीजजनित रोगाणु नष्ट हो जाते है, बीज सडऩे गलने से बचता है और प्राथमिक संक्रमण भी नहीं हो पाता है। छोटी अवस्था में पौधे मुलायम और नाजुक होते है अत: इस अवस्था में बीजोपचार रोंगों से उनकी रक्षा करता है और पौधे स्वस्थ रहते हुए अच्छी बढ़वार करते है। बीजोपचार करने में नहीं के बराबर लागत आती है। यदि बीज उपचारित किए हुए नहीं है तो बोनी के पूर्व बीजोपचार आवश्यक रूप से करना चाहिए ताकि अधिक उत्पादन लेकर अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सके।

 

सरल एवं बहुत सस्ती बीजोपचार विधियां

नमक घोल द्वारा उपचार –

रोगजनक को बीज से अलग करने का सबसे उपयुक्त तरीका बीज को नमक के घोल में डालना है। इस विधि में 20 प्रतिशत तक के नमक के घोल में बीज को डालते हैं ऐसा करने से रोगजनक के सूक्ष्म भाग तेरकर ऊपर आ जाते है जो बीज खराब व हल्के होते है साथ पर आ जाते हे। इनको अलग कर लिया जाता है। निचे तलहटी में एकत्रित बीजों को बोने के लिए काम में लेते है।

गर्म जल द्वारा –

इस विधि में 50-6 0 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर 15 मिनट तक बीज को गर्म पानी में गर्म करते है। इस तापमान पर रोगजनक नष्ट हो जाता हे परन्तु बीज अंकुरण पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है गर्म जल विधि का प्रयोग अधिकांश विषाणु एवं जीवाणु की रोकथाम के लिए किया जाता है।

रसायनों द्वारा उपचार –

बीजोपचार के लिए थायरम 2 ग्राम के साथ कार्बेन्डाजिम 1 ग्राम प्रति किलो की दर से बीज उपचारित करें इसके अलावा किसान भाई कार्बेन्डाजिम 2.5 ग्राम प्रति किलो की दर से बीज उपचारित कर सकते हैं। इसके अलावा कार्बोक्सिन एवं कैप्टान फंफूद नाशक दवाओं का प्रयोग भी बीजोपचार के लिए किया जा सकता है। बीज उपचार के लिए किसान बीज उपचार यन्त्र का प्रयोग कर सकते हैं। बीज उपचार यन्त्र के अभाव में मटका या प्लास्टिक बोरो का प्रयोग भी बीज उपचार के लिए किया जा सकता है।

जिले में अभी 70.5 मिमी औसत वर्षा दर्ज

जिले में इस वर्ष अबतक औसतन 70.5 मिमी (2.7 इंच) वर्षा दर्ज की गई है। जबकि पिछले 24 घन्टों में जिले में औसतन 25.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। अधीक्षक भू-अभिलेख से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में विगत 1 जून से अबतक वर्षामापक केन्द्र मंदसौर में 80 मिमी, सीतामऊ में 70.4 मिमी, सुवासरा में 75.2 मिमी, गरोठ में 5.5 मिमी, भानपुरा में 72.2 मिमी, मल्हारगढ़ मे 86 मिमी, धुधंडका में 103.5 मिमी, शामगढ़ में 37.7 मिमी, संजीत में 79.8 मिमी एवं कयामपुर में 95.4 मिमी वास्तविक वर्षा दर्ज की गई है। गत वर्ष इसी अवधि में जिले में वर्षामापक केन्द्र मंदसौर में 12 मिमी, सीतामऊ में 69.4 मिमी, सुवासरा में 79.4 मिमी, गरोठ में 121.3 मिमी, भानपुरा में 34.1 मिमी, मल्हारगढ मे 25 मिमी, धुधंडका में 23 मिमी, शामगढ़ में 34.5 मिमी, संजीत में 91 मिमी एवं कयामपुर में 25.2 मिमी वास्तविक वर्षा दर्ज की गई थी।

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