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दशपुर दर्शन

मंदसौर का प्राचीन नाम है ‘दशपुर’ भारत के ह्रदय राज्य मध्य प्रदेश में स्थित मंदसौर एक खूबसूरत प्राचीन शहर है, जो अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के साथ अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए भी जाना जाता है। लगभग 5530 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला यह जिला ऐतिहासिक भ्रमण के लिए एक खास विकल्प है। अतीत पर नजर डालें तो पता चलता है कि इस शहर को पहले दशपुर के नाम से संबोधित किया जाता था, जो पहले ग्वालियर रियासत का हिस्सा था। अगर आप कला-संस्कृति और इतिहास में दिलचस्पी रखते हैं, तो आपको यहां जरूर आना चाहिए।पुरातात्विक और ऐतिहासिक विरासत के साथ आपको यहां हिन्दू और जैन मंदिरों की बड़ी श्रृंखला भी देखने को मिलेगी। इस लेख के माध्यम से जानिए पर्यटन के लिहाज से मंदसौर आपको किस प्रकार आनंदित कर सकता है, जानिए यहां के शानदार स्थलों के बारे में।

इस नगरी का पोराणिक और धार्मिक महत्व सर्वज्ञात है। मंदसौर के प्राचीन मंदिर एवं पूजा स्थल  जहां एक ओर पुरातत्व शास्त्र की बहुमूल्य धरोहर हैं, वहीं दूसरी ओर ये हमारी आस्‍था एवं विश्वास के आदर्श केंद भी हैं। यहां आने वाले श्रद्धालु इन मन्दिरों एवं स्थलों पर जाकर मन की शान्ति एवं आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

मध्यप्रदेश के मालवा में शिवना तट पर भारत की प्राचीनतम, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक नगरी दशपुर अवस्थित है। दशपुर का इतिहास हमारे देश की सांस्कृति धरोहर है। इसे कालिदास की नगरी के नाम से भी जाना जाता है।

दशपुर गुप्त काल में भारत का प्रसिद्ध नगर था, जिसका अभिज्ञान मंदसौर (ज़िला मंदसौर, पश्चिमी मालवा, मध्य प्रदेश) से किया गया है। लैटिन के प्राचीन भ्रमणवृत्त पेरिप्लस में मंदसौर को ‘मिन्नगल’ कहा गया है। कालिदास ने ‘मेघदूत’ में इसकी स्थिति मेघ के यात्राक्रम में उज्जयिनी के पश्चात् और चंबल नदी के पार उत्तर में बताई है, जो वर्तमान मंदसौर की स्थिति के अनुकूल ही है-

‘तामुत्तीर्य ब्रज परिचितभ्रू लताविभ्रमाणां, पक्ष्मोत्क्षेपादुपरिविलसत्कृष्णसारप्रभाणां, कुंदक्षेपानुगमधुकरश्रीजुपामात्मबिंम्बं पात्रीकुर्व्वन् दशपुरवधूनेत्रकौतूहलनाम्’।

अभिलेख

दशपुर से 533 ई. का एक अन्य अभिलेख, जिसका संबंध मालवाधिपति यशोवर्मन से है, सौंधी ग्राम के पास एक कूपशिला पर अंकित पाया गया था। यह अभिलेख भी सुंदर काव्यमयी भाषा में रचा गया है। इसमें राज्यमंत्री अभयदत्त की स्मृति में एक कूप बनाये जाने का उल्लेख है। अभयदत्त को पारियात्र और समुद्र से घिरे हुए राज्य का मंत्री बताया गया है। दशपुर में यशोवर्मन के काल के विजय स्तंभों के अवशेष भी है, जो उसने हूणों पर प्राप्त विजय की स्मृति में निर्मित करवाए थे। एक स्तंभ के अभिलेख में पराजित हूणराज मिहिरकुल द्वारा की गई यशोवर्मन की सेवा तथा अर्चना का वर्णन है-

‘चूडापुष्पोपहारैर्मिहिरकुल नृपेणार्चितंपादयुग्मम्।’

इनमें से प्रत्येक स्तंभ का व्यास तीन फुट तीन इंच, ऊँचाई 40 फुट से अधिक और वज़न लगभग 5400 मन था। मंदसौर के आसपास 100 मील तक वह पत्थर उपलब्ध नहीं है, जिसके ये स्तंभ बने हैं।

प्राचीन जैन तीर्थ स्थल

मंदसौर से गुप्त काल के अनेक मंदिरों के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं, जो क़िले के अन्दर कचहरी के सामने वाली भूमि में आज भी सुरक्षित हैं। कहा जाता है कि 14वीं शती के प्रारम्भ में अलाउद्दीन ख़िलजीने इस महिमामय नगर को लूट कर विध्वंस कर दिया और यहाँ एक क़िला बनवाया, जो खंडहर के रूप में आज भी विद्यमान है। दशपुर की गणना प्राचीन जैन तीर्थों में की गई है। जैन स्तोत्रग्रंथ तीर्थमालाचैत्य वंदन में इसका नामोल्लेख है- ‘हस्तोडीपुर पाडलादशपुरे चारूप पंचासरे’। वराहमिहिर ने बृहत्संहिता में दशपुर का उल्लेख किया है। मंदसौर को आज भी आस-पास के गांवों के लोग ‘दसौर’ नाम से जानते और पुकारते हैं, जो दशपुर का अपभ्रंश है। मदंसौर ‘दसौर’ का ही रूपान्तरण है।

पशुपतिनाथ मंदिर- शिवाना नदी के तट पर स्थित पशुपतिनाथ मंदिर मंदसौर में सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है जहां विशेष शिवलिंग की पूजा की जाती है, जिससें भगावान शिव के आठ चेहरे हैं। यह हिन्दू वास्तुकला का आम रूप है, जहां आपको मंदिर की चारों दिशाओं में चार दरवाजे दिखाई देंगे। मंदिर के प्रवेश द्वरा पश्चिम दिशा की ओर ही खुलते हैं। यह एक प्रसिद्ध मंदिर है जहां दर्शन के लिए दूर-दराज से श्रद्धालुओं और पर्यटको का आगमन होता है। यहां शिवलिंग की ऊंचाई 7.5 फीट की है। श्रावण महीने के दौरान यहां भक्तों का भारी जमावड़ा लगता है, अगर आप भी भोलेनाथ के भक्त हैं तो यहां जरूर आएं।

मंदसौर का किला – मंदसौर के ऐतिहासिक स्थलों में आप मंदसौर का किला देख सकते हैं। यह शहर का प्राचीन किला है जो ऐतिहासिक रूप से काफी ज्यादा मायने रखता है। अतीत से जुड़े पन्ने बताते हैं कि इस किले पर तिमुर द्वारा आक्रमण किया गया था, जिसके बाद दिल्ली सल्तनत बहुत कमजोर हो गई थी। उस दौरान दिलावर खान मलावा प्रांत के गवर्नर थे। इतिहास की बेहतर समझ के लिए यहां की यात्रा की जा सकती है। वर्तमान में यह किला एक खंडहर के रूप में यहां मौजूद है।

तेलिया तालाब- मंदसौर के प्राकृतिक आकर्षणों में आप यहां के तेलिया तालाब की सैर का प्लान बना सकते हैं। अपने शांतिप्रिय माहौल के साथ यह मंदसौर के सबसे आरामदायक स्थलों में गिना जाता है। यह स्थल पारिवारिक भ्रमण के लिए काफी खास है, जहां आप अपने परिवार या पार्टनर के साथ एक क्वलिटी टाइम स्पेंड कर सकते हैं। पार्क के पास एक हिंदू मंदिर भी स्थित है, इस मंदिर के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटक भी आते हैं। सुबह और शाम का यहां का काफी खास होता है। प्रकृति का कुछ अलग अनुभव करने के लिए आप यहां का प्लान बना सकते हैं।

गांधी सागर अभयारण्य – मंदसौर के प्राकृतिक आकर्षणों में आप यहां के गांधी सागर अभयारण्य की सैर का प्लान बना सकते हैं। यह वन्य क्षेत्र 368.62 वर्ग किमी के क्षेत्र में मंदसौर और नीमच जिलों की सीमा पर स्थित है। इस खूबसूरत अभयारण्य को यहां की चंबल नदी दो भागों में अलग करती है, जिस वजह से एक भाग निमाच जिले के अंतर्गत आ जाता है और दूसरा मंदसौर जिले के अंतर्गत। यह अभयारण्य पर्यटकों के लिए सालभर खुला रहता है। आप यहां विभिन्न वनस्पति प्रजातियों के साथ असंख्य जीवों को भी देख सकते हैं जिसमें चिंकारा, तेंदुआ, जंगली कुत्ता, मगरमच्छ आदि शामिल है। जैव विविधता के मामले में यह एक समृद्ध क्षेत्र है।

इतिहास

गुप्त सम्राट कुमारगुप्त द्वितीय के शासनकाल (472 ई.) का एक प्रसिद्ध अभिलेख मंदसौर से प्राप्त हुआ था, जिसमें लाट देश के रेशम के व्यापारियों का दशपुर में आकर बस जाने का वर्णन है। इन्होंने दशपुर में एक सूर्य के मंदिर का निर्माण करवाया था। बाद में इसका जीर्णाद्वार हुआ, और यह अभिलेख उसी समय सुंदर साहित्यिक संस्कृत भाषा में उत्कीर्ण करवाया गया था। तत्कालीन सामाजिक, धार्मिक तथा सामाजिक अवस्था पर इस अभिलेख से पर्याप्त प्रकाश पड़ता है।

कैसे करें प्रवेश – मंदसौर मध्यप्रदेश का एक प्रसिद्ध जिला है, जहां आप तीनों मार्गों से आसानी से पहुंच सकते हैं। यहां का नजदीकी हवाईअड्डा इंदौर एयरपोर्ट(देवी अहिल्या बाई होल्कर एयरपोर्ट ) है। रेल मार्ग के लिए आप मंदसौर रेलवे स्टेशन का सहारा ले सकते हैं। अगर आप चाहें तो यहां सड़क मार्गों से भी पहुंच सकते हैं, बेहतर सड़क मार्गों से मंदसौर राज्य के बड़े शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।