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श्री चिंतामण गणेश मंदिर – कागदीपुरा

भगवान श्री पशुपतिनाथ मंदिर के सामने शिवना तट के पार 65 सीढिय़ों पर चढ़कर टेकरी चिंतामणि गणपति मंदिर कागदीपुरा में स्थित है। बताया जाता है कि मंदिर करीब 1300 से 1400 वर्ष प्राचीन है। मंदिर नागर शैली पर बना होकर वास्तु शास्त्रांतर्गत बना हुआ है। सूर्य की प्रथम किरण प्रतिमा आती है, यह एक सिद्धपीठ है। मंदिर पूर्वा मुख है एवं प्रतिमा गणेश यंत्र पर पदमासन पर विराजित है। यहां पर कवि कालिदास के द्वारा सूर्य उपासना की गई है। मंदिर का मुख्य द्वारा सीढिय़ो के नीचे बना था। मंदिर की विशेषता यह है कि मेनगेट पर भक्ति मुद्रा में दो-दो भक्त माला जप रहे है। अंदर सभा मंडप में रासलीला करती आठ प्रतिमा स्थापित है।

16 खंभो पर शिल्पियों द्वारा अपने-अपने ढंग से कलाकृति की गई है। गर्भगृह के द्वार पर एकादश अवतार की प्रतिमा स्थापित है। गर्भगृह में गणेश प्रतिमा के ऊपर गणेश बीजयंत्र स्थापित है। इससे प्रतिमा का तेज बना रहता है। मंदिर के बाहर परिक्रमा में 24 अवतार है। इसमें सूर्य, भैरव एवं नृसिंह अवतार प्रमुख है। इस मंदिर का रख-रखाव पूर्व में ओखाफ कमेटी डिपार्टमेंट ग्वालियर द्वारा किया जाता था। बड़े बुजुर्गों के मुताबिक इस मंदिर की स्थापना का भी एक रहस्य है। कहते हैं कि इस मंदिर का निर्माण न होकर यह हवा में उड़कर इस ऊंचे स्थान पर स्थापित हुआ था। इस मंदिर का पत्थर इसके प्राचीन होने का गवाह है।