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दुधाखेड़ी की घटना का जिम्मेदार कौन?

दूधाखेड़ी मंदिर में हुए हादसे ने लाखों श्रद्घालुओं की आस्था को चोट पहुंचाई है। बाद में वर्तमान गर्भगृह से लगभग 100 फुट दूरी पर माताजी की प्रतिमा की स्थापना तो कर दी गई है और श्रद्घालुओं ने वहां पूजा-पाठ भी शुरू कर दिया है। माताजी पर लोगों का विश्वास पहले की तरह ही कायम भी हो गया है पर अब मुख्य बात यह है कि इस लापरवाही के जिम्मेदारों की पहचान कौन-सी जांच समिति करेगी। गर्भगृह के छोड़े गए चबूतरे को सीमेंट कांक्रीट की दीवार से बाइंडिंग नहीं कर केवल पत्थरों की चुनाई कर दी गई।

दूधाखेड़ी में जिम्मेदार कौन
दूधाखेड़ी हादसे में जिम्मेदार कौन है? यह तय करने के लिए हालांकि लंबी प्रक्रिया चलेगी। पर प्राथमिक रूप से जो इसके निर्माण से जुड़े हुए थे, वे सभी लोग जांच के दायरे में होना चाहिए। लोगों से बातचीत और जिम्मेदारियों के लिहाज से इन लोगों की भूमिका की जांच होना चाहिए।

1. कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह
जिम्मेदारी- कुछ माह पहले ही दूधाखेड़ी माताजी मंदिर समिति में फेरबदल के बाद कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह उसके अध्यक्ष बने थे। उनके अध्यक्ष बनने के बाद ही मंदिर परिसर में निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ। अब वहां जो भी निर्माण हो रहा था उसकी पूरी जवाबदारी अध्यक्ष पर भी रहेगी।

2. लोनिवि के कार्यपालन यंत्री एसके बंसल
जिम्मेदारी- निर्माण एजेंसी होने से लोनिवि के कार्यपालन यंत्री एसके बंसल की देखरेख में ही पूरा कार्य होना था। विभाग के ढेर सारे कार्य होने से मंदसौर से लगभग 125 किमी दूर दूधाखेड़ी माताजी मंदिर पर निर्माण देखने रोज-रोज वे जा भी नहीं पाते थे। खुदाई से संबंधित बड़े फैसले लेत समय भी बंसल को मौके पर उपस्थित रहना था।

3. लोनिवि के एसडीओ कमल जैन
जिम्मेदारी- लोक निर्माण विभाग निर्माण एजेंसी होने से कार्यपालन यंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर एसडीओ कमल जैन वहां के पूरे प्रभारी थे। प्रतिदिन निर्माण की मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी भी जैन की ही थी। गर्भगृह के आस-पास हुई खुदाई के दौरान की पूरी तकनीकी जवाबदारी भी उनकी ही थी। मिट्टी के सेंपल, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जवाबदारी भी इनकी ही थी।

4. प्रभारी डीपीसी अनिल भट्ट
जिम्मेदारी- अनिल भट्ट के पास अभी डीपीसी का प्रभार है। वे पशुपतिनाथ मंदिर समिति में सह सचिव हैं। रेडक्रॉस के मानसेवी सचिव का जिम्मा भी उनके पास है। इधर कलेक्टर ने अपनी तरफ से उन्हें दूधाखेड़ी मंदिर में चल रहे निर्माण का प्रभारी भी नियुक्त किया था। अब उन्होंने अपनी जिम्मेदारी कितनी निभाई यह भी जांच समिति को देखना होगा।

5. मोहक स्टोन क्राफ्ट के ठेकेदार
जिम्मेदारी- श्री दूधाखेड़ी माताजी मंदिर के नवनिर्माण का ठेका मोहक स्टोन क्राफ्ट अहमदाबाद को दिया गया था। मंदिर निर्माण का अनुभव होने के बाद भी जिस तरह से ठेकेदार के लोग कार्य कर रहे थे उससे उनकी लापरवाही झलकती है। अभी पुलिस ने भी केवल ठेकेदार पर ही मामला दर्ज किया है।

तोड़-फोड़ पथराव पर प्रकरण दर्ज
शनिवार शाम को भानपुरा रोड पर रुपरा पुलिया के पास ग्रामीणों द्वारा पुलिस पर किए गए पथराव व वाहनों में तोड़फोड़ के मामले में गरोठ थाने में अज्ञात लोगों पर प्रकरण दर्ज किया गया है। वहीं भानपुरा थाने में ठेकेदार के खिलाफ भादसं की धारा 295(धार्मिक भावना भड़काना) के तहत प्रकरण दर्ज हुआ है। आगजनी व पथराव व तोड़-फोड़ के मामले में यहां भी अज्ञात लोगों पर प्रकरण दर्ज हुआ है।

– संभागायुक्त के यहां से ही जांच के बिंदू तय होंगे। वही से अधिकारी तय हुए हैं। इधर दूधाखेड़ी में भी एक निगरानी समिति बन गई है। सोमवार को उनकी मीटिंग भी हुई है। अब निर्माण संबंधी कार्य वही देखेगी।- स्वतंत्र कुमार सिंह, कलेक्टर।

सबकी अपनी-अपनी बात
– यह लंबी जांच का विषय है कि दोषी कौन है। प्रथम दृष्टया में निर्माण करने वाला है। उसके बाद जांच में जिसकी भी लापरवाही सामने आए वही जिम्मेदार है।- सुधीर गुप्ता, सांसद,

– किसी एक के ऊपर जिम्मेदारी नहीं है। समिति पर जिम्मेदारी होना चाहिए। यह जांच का विषय है कि कौन कितना जिम्मेदार है। प्रबंध समिति में शासकीय व अशासकीय सदस्य भी थे। अब निर्माण पर नजर रखने के लिए एक निगरानी समिति बना रहे हैं। -देवीलाल धाकड़, जिलाध्यक्ष भाजपा व अशासकीय सदस्य,श्री दूधाखेड़ी माताजी मंदिर प्रबंध समिति।

– जिम्मेदार तो निर्माण एजेंसी ही है। कहीं न कहीं लापरवाही तो हुई है। इसलिए इन लोगों पर भी एफआईआर नहीं हुई है तो होना चाहिए। -चंदरसिंह सिसौदिया, विधायक, गरोठ व पदेन सदस्य श्री दूधाखेड़ी माताजी मंदिर प्रबंध समिति।

सारी औपचारिकताओं के पहले मंदिर तोड़ने की क्या जल्दी थी
इधर पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा ने भी मुख्यमंत्री के नाम लिखे एक पत्र में सवाल उठाए हैं कि आखिर वह कौन सा कारण था कि गरोठ एसडीएम की जगह कलेक्टर मंदिर समिति के अध्यक्ष बने? क्या समिति के पास 51 करोड़ रुपए थे या सरकार देने वाली थी या सरकार ने ऋण लेने की अनुमति दी थी? सारी औपचारिकताओं के पहले मंदिर तोड़ने की क्या जल्दी थी। विकास का मतलब निर्माण ही रह गया है आप ही की सरकार स्टेडियम और दूधाखेड़ी मंदिर में भ्रष्टाचार की जांच आदेशित करती है किसी को डर नहीं लगता है। वास्तव में होगी जांच या हर बार की तरह लीपापोती की तैयारी !

गर्भगृह के आसपास से मलबा हटाया- श्री दूधाखेड़ी माताजी मंदिर परिसर में सोमवार को वातावरण शांतिपूर्ण रहा। श्रद्घालुओं ने माता रानी के दर्शनों का लाभ लिया। 22 जनवरी को विधि-विधान के साथ दूधाखेड़ी माताजी की प्रतिमा की अस्थायी स्थापना के बाद लोगों के दर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया। सोमवार को एसडीएम प्रकाश नायक, नायब तहसीलदार सत्यनारायण तलावत एवं पुलिस प्रशासन की उपस्थिति में कार्य प्रारंभ हुआ। माताजी के गर्भगृह के आसपास जेसीबी से मलबा हटाने का कार्य प्रारंभ हुआ। साथ ही माता रानी प्रतिमा के अस्थायी स्थापना वाले चबूतरे के आसपास फर्शीकरण व आरसीसी निर्माण कार्य हुआ। चबूतरे के आसपास बिखरे मलबे को भी साफ कराया गया।

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