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दुधाखेड़ी हादसे की जांच में हो रही ढिलाई

उज्जैन संभागायुक्त रविंद्र पस्तोर ने सोमवार को जारी आदेश में गरोठ में पदस्थ लोक निर्माण विभाग के उपयंत्री व प्रभारी एसडीओ कमल जैन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में जैन का मुख्यालय लोनिवि के मुख्य अभियंता उज्जैन कार्यालय में रहेगा। आदेश में लिखा गया है कि प्रबंध समिति के निर्णय के पालन में निर्माण का कार्य लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री को सौंपा गया था लेकिन प्रभारी एसडीओ कमल जैन ने उत्तरदायित्व का निष्ठापूर्वक निर्वहन नहीं किया। उल्लेखनीय हैं कि 20 जनवरी को हुई इस घटना के लिए श्रद्धालुओं ने भी कमल जैन को ही दोषी बताया था और निलंबन व गिरफ्तारी कि मांग की थी। उपयंत्री कमल जैन 15 वर्षों से गरोठ में पदस्थ हैं। निर्माणाधीन भानपुरा बायपास में कमल जैन की भूमिका संदिग्ध रही। स्वीकृत सड़क को बार-बार बदला गया।

प्रशासन दूधाखेड़ी से उठे प्रश्नों का जवाब दे
पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा ने दूधाखेड़ी मंदिर प्रकरण में कार्यपालन मंत्री के विरुद्ध की गई कार्रवाई को ठीक बताते हुए कहा है कि जनाक्रोश के कारण ही संभव हुआ है। अन्यथा एक छोटे से विभागीय कर्मचारी की बलि चढ़ाकर वरिष्ठ अधिकारी बचना चाहते थे। फिर भी अनेक प्रश्न अनुत्तरित हैं। प्रशासन एवं जननेताओं का दायित्व है कि उनके उत्तर सार्वजनिक कर जनता को विश्वास में लें।

– दूूधाखेड़ी मंदिर के प्रथम चरण में कितनी राशि व्यय होना प्रस्तावित थी तथा उसकी उपलब्धता किस मद से होना थी।

– लोक निर्माण विभाग के मापदंडों के अनुरूप राशि के प्रोजेक्ट को किस स्तर से अनुमोदन की आवश्यकता होती है। यदि यह तर्क दिया जाता है कि कार्य दूधाखे़ड़ी मंदिर समिति का होने के कारण विभाग के मापदंडों का अनुपालन आवश्यक नहीं था तो क्या समिति ने इसके लिए कार्यपालन यंत्री को अधिकृत किया था ।

– मंदिर की दुर्घटना होते ही सब इंजीनियर को क्यों निलंबित किया गया, कार्यपालन यंत्री को क्यों नहीं, बाद में क्या कारण बने तथा उच्च अधिकारियों की जांच के दौरान कौन से तथ्य पाए गए जिनके कारण कार्यपालन यंत्री के विरुद्ध कार्रवाई की गई।

– क्या यह सही नहीं हैं कि दूधाखेड़ी मंदिर के अतिरिक्त स्टेडियम में भी आयुक्त द्वारा जांच संस्थापित की गई थी। स्टेडियम, युवराज क्लब, पशुपतिनाथ मंदिर में निर्माण और खरीदी में हूई अनियमितताओं पर संबंधित समितियों ने क्या कार्रवाई की है।

– इन सभी समितियों में कलेक्टर ही अध्यक्ष थें। तब क्या कलेक्टर का उत्तरदायित्व निर्धारित किया गया है।

जांच समिति अध्यक्ष ने कहा-मांगने के बाद भी नहीं दिया जा रहा रिकॉर्ड
27 जनवरी को दूधाखेड़ी मंदिर में जांच के लिए आए समिति अध्यक्ष उज्जैन संभाग के अपर आयुक्त डॉ. अशोक भार्गव के साथ पूरे समय मंदिर प्रबंध समिति अध्यक्ष कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह उपस्थित रहे। कलेक्टर नेरेकॉर्ड मंदसौर कार्यालय में होने की बात करते हुए अगले दिन उज्जौन भेजने का वादा किया। परंतु अगले दिन भी रिकॉर्ड उज्जैन नहीं भेजे गए। अपर आयुक्त डॉ. भार्गव ने 28 जनवरी को भी रेकॉर्ड भेजने के लिए कलेक्टर को फोन किया था। जांच समिति अध्यक्ष भार्गव उत्तरप्रदेश में चुनाव पर्यवेक्षक की ड्यूटी होने से 29 जनवरी को चले गए। अब वे तीन सप्ताह में लौटेंगे। ऐसे में जांच समिति ने 28 जनवरी की देर शाम शिकायत की जांच के संबंध में अपना अंतरिम प्रतिवेदन संभागायुक्त को प्रस्तुत कर दिया। स्थल निरीक्षण के दौरान गंभीर अनियमितताएं एवं लापरवाही का उल्लेख कर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा सहयोग नहीं करने काभी उल्लेख किया गया है। प्रतिवेदन में कलेक्टर एवं प्रबंध समिति द्वारा शिकायत संबंधी रेकॉर्ड व दस्तावेज उपलब्ध नहीं करानेके कारण अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जांच नहीं होने का उल्लेख है।

– दूधाखेड़ी माता मंदिर से संबंधित रिकॉर्ड उज्जैन भेज दिया गया है। रिकॉर्ड ज्यादा होने से फोटोकॉपी कराने में समय लग गया था। संभागायुक्त ने कमल जैन को निलंबित कर दिया है। – स्वतंत्र कुमार सिंह, कलेक्टर

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