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दूधाखेड़ी माताजी मंदिर पर निर्माण हुआ शुरू, गर्भगृह पहले बनेगा

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श्री दुधाखेड़ी माताजी मंदिर में मंदसौर-नीमच जिले के साथ ही राजस्थान व मप्र के काफी बड़े हिस्से से श्रद्धालु आते हैं यहां प्रतिमाह खुलने वाली दानपेटी में से औसतन 25 लाख रुपए का दान प्राप्त होता है। मान्यता है कि यहां लाइलाज बीमारी लकवा व पोलियो के रोगी आते हैं और ठीक होकर भी जाते हैं। प्रबंध समिति की बैठक 6 माह से हुई ही नहीं थी। केवल कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह, विधायक चंदरसिंह सिसौदिया व लोक निर्माण विभाग के गरोठ एसडीओ कमल जैन ही मुख्य रूप से मंदिर का कार्य देख रहे थे। जानकार बुजुर्गों का कहना है कि हमारी राय को कभी नही माना गया। यहां की मिट्टी जोगड़ी है, इतनी खुदाई नहीं होना चाहिए। साथ ही इनका कहना था कि पहले अस्थायी मंदिर बनाकर प्रतिमाएं स्थापित हो जाएं फिर खुदाई हो पर ऐसा नहीं किया गया। वर्षोर् से यहां सेवा दे रहे वरिष्ठ भाजपा नेता तेजसिंह सोलंकी ने भी कहा कि मंदिर बहुत अच्छा है इसे मत तोड़ो केवल परिसर बनाया जाए। सरपंच किशोर पाटीदार ने कहा कि मुझे आज तक पूछा नहीं गया। हर बार पंचायत के लोगों की बात अनसुनी कर दी गई।

लोगों में अभी भी रोष
सरपंच किशोर पाटीदार ने बताया कि धार्मिक स्थल हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है पर यहां चंद लोगों ने अपनी हठधर्मिता से जन भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया। उसकी परिणति से यह हादसा हुआ। बिना सोचे समझे विभिन्न समाजों द्वारा बनाई गई धर्मशालाओं को ध्वस्त कर दिया गया। लोगों के रहने की इस सर्दी में कोई व्यवस्था नहीं है। कई बार प्रशासन शासन के प्रतिनिधियों को कहां पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। बीमार श्रद्धालु सर्दी में खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं। यहां जो निर्माण चल रहा है वह दान राशि से चल रहा है। जब लोगों के दान से मंदिर का निर्माण हो रहा है तो लोगों की राय क्यों नहीं ली।

धार्मिक भावनाओं से हुआ खिलवाड़
सरपंच ने कहा कि लोगों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया गया। नियमों, भावनाओं व तकनीकी जानकारी की अवहेलना कर इस मंदिर का निर्माण हो रहा था। इसके कारण यह दुखद हादसा हुआ। अन्य धार्मिक स्थलों के निर्माण में शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से ज्यादा समाजजनों की भूमिका प्रभावी रहती हैं पर यहां इसकी सरासर अवहेलना हुई। मंदिर क्षेत्र मे स्तिथि अब पूरी तरह सामान्य हो गई है पर शासन प्रशासन जनप्रतिनिधियों को श्रद्धालुओं के विश्वास पर खरा उतरना होगा।

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