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देशहित में अफीम की खेती बंद की जाए : अफीम, डोड़ाचूरी की तस्करी से देश में बड़ रही है नशाखोरी

पोस्तादाने का दो नम्बर के कारोबार से शासन को हो रहा है करोड़ों रूपये का नुकसान

मन्दसौर। देश के नीमच व गाजीपुर की अफीम फेक्ट्रीयों में करोड़ों रूपये कीमत की 5 हजार टन अफीम का स्टॉक पड़ा है। विदेशों में भी अफीम व इससे बनने वाले अल्कोलाईड की मांग नहीं है। मन्दसौर जिले में अफीम की खेती से उत्पादित पोस्तादाना की प्रतिवर्ष कोई 100 करोड़ रूपये से अधिक का दो नम्बर का व्यवसाय हो रहा है तथा करीब इतने ही करोड़ों रूपये की डोड़ाचूरी की तस्करी हो रही है। मध्यप्रदेश के अफीम उत्पादक क्षेत्रों को यदि आतंक, तस्करी, कालाबाजारी व भ्रष्टाचार से मुक्त करना है तो तत्काल अफीम की खेती को बंद कर देना चाहिये। 
उक्त बात एक बयान में सामाजिक कार्यकर्ता श्री राजेन्द्र अग्रवाल ने कही। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के मन्दसौर, नीमच, रतलाम, शाजापुर एवं आगर जिलों में कोई 30 हजार किसान शासकीय पट्टों के आधार पर अफीम की खेती कर रहे है। इस अफीम की खेती से प्रतिवर्ष करोड़ों रूपयों की अफीम, पोस्तादाना व डोड़ाचूरा पैदा होता है। परन्तु शासन की अस्पष्ट नीति के कारण पूरा क्षेत्र करोड़ों रूपयों के अवैध व्यापार में लगा हुआ है। पोस्तादाता पर 5 प्रतिशत सेलटैक्स एवं 2 प्रतिशत मण्डी टैक्स के अलावा इसके करोड़ों रूपये के व्यापार पर इनकम टैक्स को यदि देखा जाये तो पूरा का पूरा व्यापार दो नम्बर का होकर शासन को करोड़ों रूपयों का चूना मिलीभगती से लगाया जा रहा है वहीं क्षेत्र में काले धन की बम्पर आवक हो रही है। 
श्री अग्रवाल ने कहा कि डोड़ाचूरी की तस्करी ने भी कमाल कर रखा हैं। करोड़ों रूपये की डोड़ाचूरी की तस्करी, कालाधन मंदसौर जिले में बेहताशा आ रहा है। चन्द तस्कर, अधिकारी, आबकारी विभाग, विक्रेता विभाग, कृषि उपज मण्डी और पुलिस प्रशासन की सांठगांठ से अफीम, डोड़ाचूरा की तस्करी और पोस्तादाना की कालाबाजारी बेरोकटोक हो रही है। भूमाफियां भी इस काले धन से खूब फल-फूल रहे है। पैसा जमीनों में बेहताशा लग गया है। चार माह पूर्व जो किसान आंदोलन मंदसौर जिले में हुआ था उसमें भी अफीम व डोड़ाचूरा तस्करों का हाथ शासन ने माना है। वर्तमान में मंदसौर-नीमच-रतलाम जिले की राजनीति भी इन तस्करों के कारण भटक गई है। सत्ता तथा विपक्ष सब इनसे आर्थिक मदद के कारण दबे हुए है। कुछ माह पूर्व गोदामों में रखा हुआ डोड़ाचूरा नष्टीकरण के मामले में भी गोलमाल कर करोड़ों रूपयों की हेराफेरी की। 
श्री अग्रवाल ने कहा कि अफीम की खेती से करीब 30 हजार क्विंटल पोस्तादाना की उपज होती है। लेकिन मंदसौर, नीमच व जावरा आदि की कृषि उपज मण्डीयों मंे पोस्तादाना की आवक मात्र करीब 3 हजार क्विंटल की बताई जाती है। पोस्तादाना के भाव कोई 30 से 40 हजार रू. क्विंटल माना जाये तो करीब 27 हजार क्विंटल पोस्तादाना का दो नम्बर का व्यापार होता है जिससे शासन को करोड़ों रूपयों का नुकसान हो रहा है। दो नम्बर का यह कारोबार तथा डोड़ाचूरे की तस्करी को देखा जाये तो पिछले पांच वर्षों में हजारों करोड़ का कालाधन मंदसौर में आया है। पोस्तादाने के दो नम्बर का काम नीमच के एक व्यापारी का हरियाणा में पकड़ा गया करोड़ों रूपये का मामला वहां की पुलिस ने उजागर किया। पोस्तादाने के दो नम्बर के साथ ही डोड़ाचूरे के पावडर की तस्करी भी धड़ल्ले से हो रही है। अधिकारी मालामाल हो रहे है। 
श्री अग्रवाल ने कहा कि डोड़ाचूरी की तस्करी भारी मात्रा में पिछले वर्षों के मुकाबले इस वर्ष पकड़ी गई। अधिकारियों से सांठगांठ कर तस्करी हो रही है। पंजाब, हरियाणा तथा अन्य प्रांतों में नशाखोरी बढ़ रही है। कल तक 100रू. किलो बिकने वाला डोड़ाचूरा आज तस्करी में 2 हजार रू. किलो तक बिक रहा है। शासन को देश में नशाखोरी को बन्द करना है तो डोड़ाचूरी के खिलाफ नीति बनाकर कदम उठाना होंगे। केन्द्र सरकार तस्करी, भूमाफियाओं, आतंक, कालेधन, भ्रष्टाचार से क्षेत्र को मुक्त करना है तो तत्काल अफीम की खेती को बंद करे। अफीम उत्पादक किसानों को अफीम की खेती से नाम मात्र की राशि प्राप्त होती है जबकि इस धंधे में लिप्त तस्कर अधिकारी कालाबाजारी करने वाले दो नम्बर के धंधेबाज करोड़ों रूपये के वारे-न्यारे कर रहे है। शासन इन सब बातों को ध्यान में रख कदम उठाये। श्री अग्रवाल ने कहा कि वे शिघ्र ही केन्द्रीय वित्त मंत्री व म.प्र. के मुख्यमंत्री को इस संबंध में पत्र लिखकर सारी स्थिति से अवगत करायेंगे। 

Post source : राजेन्द्र अग्रवाल (सामाजिक कार्यकर्ता, मंदसौर) मो.नं. 9425923475

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