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दैनिक व्यवहार की छोटी छोटी बातों से अपराध की जड़े जमती है -राठौर

मल्हारगढ़। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ विजय राठौर ने कहा कि दिनों दिन बढ़ते हुए बाल अपराध हमारे सामाजिक जीवन के लिए एक चुनौती हैं। छोटे-छोटे बच्चों में अपराधी प्रवृत्तियाँ संसार के सभी देशों में एक गंभीर समस्या बन गई है। किन्तु बच्चों के जीवन में दैनिक व्यवहार की छोटी-छोटी बातों से ही अपराध की जड़ें जमती हैं। बहुत से बच्चे घर से स्कूल का नाम करके जाते हैं किन्तु वहाँ अनुपस्थिति लगती रहती है और ये अपने दूसरे साथियों के साथ खेलते रहते हैं, घूमते हैं। कई तो स्कूल में छुट्टी की अर्जी दे देते हैं। घर के सोचते हैं बच्चा पढ़ने गया है लेकिन वह खेल कूद के लिए घर से जाता है, यह वे बहुत समय तक नहीं जान पाते। फीस के पैसों की चाट पकौड़ी उड़ाई जाती है। बहुत से बच्चे सिनेमा,खेल,तमाशे, पतंगबाजी आदि में पैसा उड़ा देते हैं। जब पैसे की और जरूरत पड़ती है तो मित्रों से पूरा कर लेते हैं फिर घर में चोरी करने लगते हैं। ये ही बच्चे आगे चलकर जेब काटते हैं। सार्वजनिक सम्पत्ति को हानि पहुँचाते हैं। श्री राठौर ने कहा कि बहुत से बच्चों में अपने साथी, छोटे भाई बहन आदि को मारने पीटने की आदत पड़ जाती है। लेकिन यही प्रवृत्ति आगे नृशंस हत्या मार-पीट, छुरा घोपने, जैसी बुराइयों में बदल जाती है। एक लम्बे अभ्यास के बाद उनका ऐसा स्वभाव बन जाता है कि दूसरों को मारने,पीटने, पीडि़त करने में उन्हें आनन्द आने लगता है। वे अकारण ही इस तरह की हरकतें करने लगते हैं। चौदह वर्षीय एक लड़के ने आठ वर्षीय एक लड़के को पेड़ से लटका कर मार दिया। पूछने पर उसने बताया ‘मेरे मन में ऐसी ही तरंग उठी थी।’माता-पिता, अभिभावक, अध्यापकों की आज्ञा न मानना, उन्हें परेशान करना, दुर्वचन कहना, उन्हें दुःखी पीडि़त देखने में प्रसन्नता का अनुभव करने की प्रवृत्तियाँ भी बच्चों में दिनों दिन बढ़ती जा रही हैं। छोटे-छोटे बच्चों तक में ये प्रवृत्तियाँ देखने को मिलती हैं। और ये ही आगे चलकर उनका अपमान करते, लड़ने-झगड़ने यहाँ तक कि हत्या तक कर देने में बदल जाती है।

महिला अपराधों की अगर बात की जाए तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हम एक आर्थिक और राजनीतिक शक्ति पुंज के रूप में उभर रहे हैं. हमारे संविधान ने हमें जो अधिकार और अवसर दिए हैं उन्हें भी प्रमुखता मिल रही है.

इस अवसर पर राज्य योजना आयोग की सदस्य श्री मति सुनीता देशमुख ने सभी को बाल अपराध,महिला हिंसा व इससे कैसे बचा जा सकता है उसकी जानकारी दी। श्री देशमुख ने कहा कि महिला हिंसा के बढ़ते अपराधों को रोकना होगा,इसके लिए हर बालिका,महिला को आगे आकर स्वयम की जागरूकता का परिचय देना होगा तभी इन अपराधों में कमी आएगी। महिला को डांटना,दाँत से काटना,डराना,छेड़ना,घूरना,प्रताडि़त करना और महिला के साथ जबरदस्ती करना यह सभी अपराध की श्रेणी में आते है अगर ऐसी कोई घटना होती है तुरन्त इनके खिलाफ कार्यवाही होना चाहिए।

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