Breaking News

नई अफीम नीति घोषित, किसानो में जशन का माहोल!

Hello MDS Android App

अफीम नीति में इस नए प्रावधान से मध्य प्रदेश और राजस्‍थान में करीब 30 हजार किसानों को नए अफीम के पट्टे मिल सकते हैं। नई अफीम नीति से पूरे मालवा ओर मेवाड़ में जश्‍न का माहौल है। सांसद सुधीर गुप्‍ता जी के अनुसार मंत्रालय ने अफीम नीति जारी कर दी है। वेबसाइट पर शुक्रवार को पाएगी। सांसद ने दावा किया कि इस नीति से अफीम किसानों को दीपावली का तोहफा मिला है। करीब 30 हजार किसानों के पट्टे बहाल हो रहे हैं। पहली बार केंद्र सरकार द्वारा किसानों के लिए इतनी उदार नीति बनाई गई। इसमें 49 की औसत पर पट्टे देने के अलावा बहाल होने वाले पट्टों को 12 आरी की अनुमति देने जैसे प्रावधान है।

सांसद सुधीर गुप्ता ने शुक्रवार की अपराह्न पत्रकारों के बीच अफीम नीति को लेकर बात की। उन्होंने बताया कि विदेशों में अफीम की डिमांड बढऩे के कारण रकबा भी बढ़ाया है। इससे करीब दस हजार और किसानों को इस अफीम नीति से फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि ईरान जैसे देश में 90 टन अफीम भारत से आयात करने में रुचि दिखाई है। करीब चार हजार हैक्टेयर क्षेत्र का अफीम रकबा बढऩे से एक लाख और लोगों को रोजगार मिलेगा। वर्ष 2016-17 में अफीम फसल के कारण कुल डेढ़ लाख लोगों को रोजगार मिलेगा।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी की गई अफीम नीति में मध्यप्रदेश और राजस्थान के उन किसानों को भी अफीम के नए पट्टे जारी किए जाएंगे, जिन्‍होंने वर्ष 2015-16 में 49 किलो प्रति हैक्‍टेयर या उस से अधिक अफीम सरकार को तुलवाई हो।
उत्‍तरप्रदेश में 47 किलो प्रति हैक्‍टेयर की औसत देने वाले किसानों को अफीम के पट्टे जारी किए जाएंगे।
इस आधार पर माना जा रहा है कि 2015-16 में अफीम की खेती करने वाले अधिकांश किसानों को फिर से पट्टा मिल जाएगा।
इस नई अफीम नीति में खास बात यह है कि जिन अफीम किसानों के पांच सालों का औसत 103 प्रतिशत बैठता है तो वे भी अफीम के पट्टे के पात्र होंगे।
नई अफीम नीति घोषित होने से मध्यप्रदेश के मालवा और राजस्‍थान के मेवाड़ में जश्‍न का माहौल है। किसान इसे केंद्र सरकार द्वारा दिवाली पर दिया गया तोहफा मान रहे हैं।
दरअसल, अफीम की खेती मेवाड़ और मालवा में व्यापार की रीढ़ की की हड्डी मानी जाती है। इसलिए माना जा रहा है कि अब नई अफीम नीति से इलाके में कारोबार और अच्छा होगा।

नई अफीम नीति की बड़ी बातें

  • -2017-18 के फसल सत्र के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान में 60 किलो ग्राम प्रति हैक्‍टेयर और उत्‍तर प्रदेश के लिये 54 किलो ग्राम प्रति हैक्‍टेयर की औसत निर्धारित की गई है।
  • -नई अफीम नीति में अलग-अलग बंधनों के तहत सन् 1997-98 से लेकर 2015-16 तक के अफीम किसानों को निर्धारित नियम के तहत आने पर 12 आरी के पट्टे दिए जाएंगे।
  • -2013-14, 2014-15 और 2015-16 में संपूर्ण पोस्‍त की जुताई करने वाले अफीम किसानों को भी अफीम का पट्टा मिलेगा।
  • – सन् 1997-98 के पश्‍चात न्‍यूनतम पांच वर्ष तक अफीम जमा करवाने वाले किसान को भी अफीम का पट्टा दिया जाएगा।
  • -2015/16 में जिन किसानों ने न्‍यूनतम फसल रख कर बाकी फसल उखड़वाई होगी उन्‍हें भी अफीम का पट्टा मिलेगा
  • -नई अफीम नीति में राहत की बात यह है कि 2015-16 के जो पात्र किसान हैं उनको 20 आरी का पट्टा मिलेगा।
  • -1997-98 से अब तक अलग-अलग परिस्थिति में अफीम की काश्‍त करने वाले किसानों को विभिन्न बंधनों के तहत के तआरी के नए पट्टे जारी होंगे।
  • -इस मान से मध्य प्रदेश में इस बार 15 से 20 हजार नए अफीम के पट्टे जारी हो सकते हैं।
  • -नई अफीम नीति में किसान अपने अफीम पट्टे की बुआई दो भाग में भी कर सकता है और वो चाहे तो दूसरे का खेत लीज पर लेकर भी अफीम की खेती कर सकता है।
  • -उन अफीम किसानों को अफीम का पट्टा नहीं मिल पाएगा, जिनकी अफीम में किन्‍हीं कारणों से मिलावटी पाई गई है।
  • -वहीं, सरकार ने फसल वर्ष 2017-18 के लिए एमपी और राजस्थान में 60 किलो प्रति हैक्‍टेयर और उत्‍तरप्रदेश में 54 किलो प्रति हैक्‍टेयर की औसत निर्धारित की है।

About The Author

I am Brajesh Arya

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *