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नई अफीम नीति से किसानों में खुशी की लहर, एनडीपीएस एक्ट में दोष मुक्त किसान भी होंगे पात्र, बड़ी संख्या में पट्टे होंगे बहाल

मंदसौर। केन्द्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा वर्ष 2018-19 की नई अफीम नीति की घोषणा आज कर दी गई। कई सालों बाद ऐसा क्षण आया है कि किसानों में हर्ष की लहर हुई। पूर्व में यह अफीम नीति अक्अुबर के पहले या दूसरे सप्ताह में घोषित की जाती थी जिस कारण कई किसान बोवनी में देरी को भी फसल पर बुरा असर मानते थे। क्योंकि अफीम नीति में देरी के बाद किसानों को अफीम फसल बोने में भी देर होने के कारण बाद में उसकी गुणवता और औसत पर फर्क पड़ता था। परंतु क्षेत्रिय सांसद सुधीर गुप्ता द्वारा इसके संबंध में वित्त मंत्री एवं अधिकारियों से इइस पर चर्चा कर समय से अफीम नीति जारी करवा दी गई। साथ ही नई नीति में ऐसे सैकड़ो किसान लाभान्वित हुए जिनके पट्टे किसी ना किसी कारण से कट्टे है। यह संख्या बड़ी तादात में हो सकती है। क्योंकि कटे हुए पट्टो की बहाली के लिए पिछले वर्षो में मंत्रालय द्वारा कोई कार्रवाई नही की गई। परंतु इस वर्ष ऐसे वह तमाम पट्टे जो तकनीकी या मौसम की मार से प्रभावित हुए हो या जिन पर कोई प्रकरण विचाराधीन हुआ हो । ऐसे तमाम किसानों के पट्टे केन्द्र सरकार द्वारा पुनः बहाल कर दिए गए है।

इन किसानों को मिली राहत
1. जिन किसानों की अफीम जांच में इन्फीरियर (घटिया ) घोषित हुई थी। जिनके पट्टे कट गए थे वे पुनः बहाल हुए।
2. 1999 से लेकर 2003 तक औसत से एक किलो कम देने पर कट्टे हुए पट्टे पुनः बहाल हुए।
3. पिछले पांच वर्षो में जिन्होने औसत पूरी दी व तकनीकी कमी के चलते कटे, वे भी पात्र होंगे।
4. जिन किसानों पर एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई हुए और वे दोषमुक्त हुए हो तो वह किसान भी पात्रता की श्रेणी में आ गए।
5. किसानों ने 4.9 प्रति हेक्टेयर की दर से मार्फिन प्रतिशत दिया हो या औसत 52 किलो प्रति हेक्टेयर रहा हो वे भी पात्र होंगे।
6. वर्ष 2004 से लेकर 2015 तक केंद्रीय नारकोटिक्स विभाग के लाइसेंस शर्तों के उल्लंघन के कारण काटे गए पट्टे को पुन बहाल किया जाएगा। मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तरप्रदेश के सभी किसानों को दस-दस आरी के पट्टे मिलेंगे। वर्ष 2018-19 में सभी किसानों को 5.9 प्रति हेक्टैयर मार्फिन प्रतिशत देना अनिवार्य रहेगा, तभी उन्हें अगले साल 2019-2020 में पट्टे की पात्रता होगी।

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