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नई सरकार अब बेरोजगार युवाओं को देगी बेरोजगारी भत्ता

मंदसौर। जिस तरह नईसरकार से किसानों को कर्जमाफी का इंतजार है उसी तरह युवाओं को भी रोजगार की आस है। चुनाव के पहले कांग्रेस ने किसानों से कर्जमाफी और युवाओं से रोजगार का वादा और बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया था और यह कांग्रेस के वचन पत्र में भी शामिल है। ऐसे में जिन दो बड़े मुद्दों से कांग्रेस सरकार में आई है, उन पर अमल का इंतजार है। युवाओं का नईसरकार से चुनाव पूर्व किए वादें को निभाने की आस है। चुनाव में युवाओं को रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा था। ऐसे में अब कांग्रेस के लिए युवाओं को रोजगार व बेरोजगारों को भत्ता देना सबसे बड़ी चुनौती होगा। जिले में वर्तमान में ३५ हजार युवा बेरोजगार है। पांच सालों में केवल ६ हजार को ही रोजगार मिल पाया है। यह आंकड़े तो रोजगार कार्यालय के है। जहां सिर्फ५ प्रतिशत युवा ही पंजीयन कराने पहुंचते है। आंकड़ों से हटकर बात करें तो जिले में करीब सवा लाख युवाओं को रोजगार की तलाश हैऔर वह बेरोजगार होकर काम की तलाश में भटर रहे है।

बेरोजगारों की बढ़ रही संख्या रोजगार के नहीं बढ़ रहे अवसर
जिले में साल दर साल बेरोजगार युवकों की संख्या बढ़ती जा रही है। लेकिन उस मात्रा में रोजगार के अवसर नहीं मिल रहे है। यही कारण है कि साढ़े चार साल में जिले के अंदर केवल ५ हजार ६३७ बेरोजगारों को रोजगार के अवसर मिले है। रोजगार कार्यालय अधिकारियों की माने तो इनमें से सबसे अधिक निजी क्षेत्र में रोजगार मिला है। और सरकारी और अद्र्ध शासकीय क्षेत्र में केवल २६७ लोगों को ही रोजगार मिला है।इसके अलावा बड़ी संख्या उनकी भी है जिन्होंने रोजगार कार्यालय में पंजीयन तो नहीं कराया लेकिन रोजगार की तलाश उन्हें भी है। जिले में उद्योगों के अलावा बड़ी निजी कंपनियों का नहीं आना इसका बड़ा कारण है।

६ लाख की राशि खर्च, फिर भी नहीं दिख रहा कही रोजगार
जिला रोजगार कार्यालय के अनुसार एक साल में हर तीन माह में एक बार रोजगार मेला लगाया जाता है। उसमें निजी कंपनियों को आमंत्रित किया जाता है। इस पूरे रोजगार शिविर का खर्च ३० से ५० हजार तक आता है। एक साल में चार रोजगार मेला का आयोजन किया जाता है।यानि की एक साल में करीब १ लाख २० हजार रूपए खर्च किए जाते है। और इन सालों के शिविरों को खर्च जोड़े तो कुल १८ से १९ शिविर लगाएं गए है। जिनमें केवल ५ हजार ४०० लोगों को निजी कंपनियों में रोजगार मिला है। एक साल में रोजगार मेलों पर ६ लाख की राशि खर्चहो रही है, लेकिन रोजगार कही पर भी नहीं दिख रहा है।

गिनती के युवाओं को ही मिला रोजगार
रोजगार से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष२०१३ में रोजगार कार्यालय द्वारा शिविर लगाएं गए जिसमें १४२० युवक-युवतियों को रोजगार मिला। इसके बाद २०१४ में आंकडा घट कर १२०५ पर रह गया। इसके बाद २०१५ मेंं रोजगार का आंकड़ा ७६० तक पहुंचा और फिर २०१६ में १६१५ युवक-युवतियों को रोजगार मिला। सबसे कम रोजगार का आंकड़ा २०१७ में रहा। इस वर्ष में सबसे कम ६२२ युवक युवतियों को रोजगार मिला।और २०१८ में १३५३ युवक-युवितयों को रोजगार मिला। इसके अलावा कईपंजीकृत युवाओं को बेरोजगार ही रह गए और जिले में अनेक ऐसे युवा भी है, जो पंजीकृत भी नहीं है और उन्हें रोजगार भी नहीं मिला है।

रोजगार के अवसर नहीं बेरोजगारी का बड़ा कारण
जिले में कई ऐसे युवक है। जिनको होम सिकनेस है। वे जिले या उनके नगरीय क्षेत्र में ही रहकर कार्य करना चाहते है।और शहर, जिले व क्षेत्र में न तो बडे उद्योग है और न हीं कई निजी कंपनियां यहां काम कर रही है। ऐसे में युवाओं को यहीं पर रोजगार नहीं मिल पा रहा है। जब जिले में रोजगार के अवसर तलाशते हैतो बड़े उद्योगों के नहीं होने के कारण उनको यहां पर निराशा हाथ लगती है।

निजी कंपनियों में सीधे रोजगार भी बड़ा कारण
कई निजी कंपनियों व अन्य जगहों पर सीधे ही युवा को रोजगार मिल जाता है। ऐसे में रोजगार कार्यालय में बेरोजकार युवक जो रोजगार की आस में पंजीयन कराते है, उन तक रोजगार पहुंचता ही नहीं है। विभाग एक साल में चार बार शिविर लगाता है। लेकिन निजी कंपनियों में टारगेट के अनुरुप रोजगार मिल रहा है।सरकारी नौकरी में अब पंजीयन कार्यालय का पंजीयन करवाना आवश्यक नहीं रहने के कारण आंकड़ा बहुत कम है।

सुनियोजित प्लान है
सरकार के पास इसके लिए सुनियोजित योजना है। पिछली सरकार युवाओं को रोजगार नहीं दे पाई। युवा को रोजगार देना हमारी घोषणा नहीं वचन है। जिन युवाओं को रोजगार दिया जाएगा उन्हें भत्ता नहीं देंगे और जिन्हें हम रोजगार नहीं दे पाए, उन्हें भत्ता दिया जाएगा।-प्रकाश रातडिय़ा, जिलाध्यक्ष, कांग्रेस

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