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नपाध्यक्ष की हत्या के बाद : भाजपा व कांग्रेस ने तोड़ा नपा से नाता

वेतन को छोड़कर सारे कार्य ठप्प

मंदसौर। नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार की हत्या के बाद से नगर पालिका जैसे लावारिस हो गई। 17 जनवरी 19 को श्री बंधवार की हत्या होने के बाद से नपा के सारे कार्य ठप्प हो गए है। जैसे तैसे कर्मचारियों को वेतन तो मिल गया है। लेकिन अन्य भुगतान नहीं होने के कारण विकास कार्य बंद होने की कगार पर है। नये कार्यो के टेण्डर की फाइलें हस्ताक्षर के अभाव में धुल खा रही है।

नपा परिषद पर भाजपा का कब्जा होने के बाद भी विभिन्न समितियों के सभापति भी नपा नहीं जा रहे है। वहीं कर्मचारी भी अनमने मन से नपा जाते है। कारण भी स्पष्ट हैं कि काम क्या करें। नपा उपाध्यक्ष के पद पर भाजपा के सुनिल जैन काबिज जरूर हैं पर वे भी एक दिन ही कुछ समय के लिए नपा गए थे। एक माह से उनका कक्ष भी बंद ही है। छोटे छोटे कार्यो के लिए आमजन भटक रहा है। जिसकी सुध लेने वाला कोई नजर नहीं आता है। नपा एक्ट की धारा 57 के तहत विशेष टिप्पणी में अध्यक्ष के अभाव में उपाध्यक्ष को परिषद की बैठक बुलाने के अधिकार जरूर दिए गए है। लेकिन भाजपा के शीर्ष नेता ऐसा क्यों नहीं करवा पा रहे है। किसी के समझ में नहीं आ रहा है।

वहीं कांग्रेस भी इस ओर ज्यादा चिंतन कर रही हो ऐसा आभास नहीं हो रहा है। पिछली भाजपा सरकार ने नपा एक्ट में संसोधन किया था कि अध्यक्ष के नहीं रहने की दशा में राज्य शासन नपा अध्यक्ष का मनोनयन अध्यक्ष के उप चुनाव तक कर सकता है। राज्य शासन नपा के निर्वाचित पार्षदों में से ही किसी को अध्यक्ष मनोनित कर नपा का संचालन करवाकर कार्य को आगे बढ़ा सकते है। वर्तमान में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार हैं तो कांग्रेस पार्षद ही अध्यक्ष मनोनित होगा यह तो तय हो गया है। लेकिन कांग्रेस भी ठीक एक माह बाद भी अध्यक्ष पद पर अपने किसी पार्षद को नहीं बैठा पाई जो कहीं न कहीं गुटबाजी ही दिखती है। वैसे जिला कांग्रेस ने पार्षद हनीफ शेख के नाम पर अपनी सहमति दे दी थी। इस नाम पर भी एक माह में भी शासन निर्णय नहीं ले सका जो किसी के समझ में नहीं आ रहा है। वैसे अध्यक्ष पद की दौड़ में रूपल संचेती, विजय गुर्जर, दिकपालसिंह भाटी, शाकेरा खेड़ीवाला भी है।

नए नपाध्यक्ष की नियुक्ति में विलंब होना आगामी लोकसभा चुनाव भी एक कारण हो सकता है कि अध्यक्ष उसे मनोनित किया जाए जो सर्वमान्य हो। हालांकि नये अध्यक्ष कि नियुक्ति के बाद उन्हें बहुत समय कार्य करने के लिए मिलेगा ऐसा नहीं लगता है। मार्च में कभी भी आचार संहिता की घोषणा हो सकती है।

सीएमओं भी प्रभारी  नपाध्यक्ष की हत्या के बाद मुख्य नपाधिकारी सविता प्रधान भी स्थानानंतरित होकर खण्डवा के लिए रवाना हो गई है। वहीं सतना नगर निगम से स्थानांनतरित होकर आने वाले आर पी मिश्रा भी मंदसौर नहीं पहुंचे है। इसके चलते प्रभारी सीएमओं ही आवश्यक कार्य कर रहे हे।

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