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नपा कार्यवाहक अध्यक्ष का पेंच फिर फसा : कॉंग्रेस पार्षदो के विरोधी सूरो ने

मंदसौर. नगर पालिका अध्यक्ष के कार्यवाहक के नाम पर मुहर लगने से पहले ही कांग्रेस पार्षदों में विरोध का दौर शुरु हो गया है। भोपाल में हुई बैठक में एक नाम आगे बढऩे के बाद अन्य दावेदारों ने विरोध शुरु कर दिया है। इसके लिए अन्य पार्षदों से विरोध में पत्र लिखवाने का दौर शुरु हो गया है तो जो नाम आगे बढ़ा। उस पर मुहर लगवाने पार्षदों ने भोपाल में ही डेरा डाल रखा है। इधर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जिसे सभी पार्षदों से रायशुमारी के लिए जिसे जिम्मा सौंपा था। उन्होंने किसी भी पार्षद से संपर्क कर राय नहीं जानी। इधर पार्षद प्रदेश सचिव राजीवसिंह के फोन का इंतजार ही करते रहे। एक माह तक पार्टी अंदरखानों में विरोध के इसी डर के कारण निर्णय नहीं कर पाई और अब निर्णय से पहले ही नाम पर सहमति के बजाए विरोध तेज हो गया है। बैठक में नाम आने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि सोमवार तक नाम पर मुहर लग जाएगी, लेकिन पार्षदों में बढ़ते विरोध के कारण ऐसा नहीं हो सका।

17 जनवरी को नगर पालिका अध्यक्ष प्रहलाद बंधवार की हत्या के बाद से नपाध्यक्ष की कुर्सी खाली पड़ी है। एक माह से अधिक समय बीत गया। खाली पड़ी कुर्सी ने शहर का विकास ही रोक दिया। तो सरकार की योजनाओं के पात्र हितग्राही भी बिना अध्यक्ष के इनका लाभ नहीं ले पा रहे है। इतना ही नहीं नपा का संचालन भी प्रभावित हो रहा है। तो एक माह से अध्यक्ष नहीं और एक सप्ताह से सीएमओ नहीं। ऐसे में न तो स्वीकृति काम शुरु हो पा रहे है और न नए कामों की प्लानिंग बन पा रही। सीएमओ के नहीं होने से पूरी नपा बेलगाम हो गई है। हर समय हर कक्ष पर ताला लटकता रहता है। हर कोई अपनी मर्जी से आ रहा है और आ रहा है। कुछ दिनों में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगना है और एक माह से नपा में काम ठप्प पड़े है। ऐसे में शहर का विकास पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है।

अंतिम मुहर लगवाने लगा रहे जोर
इधर मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में नाम बढऩे के बाद पार्षद हनीफ शेख ने अपने नाम पर अंतिम मुहर लगवाने के लिए भोपाल में डेरा डाल रखा है। कार्यवाहक अध्यक्ष की चर्चाओं के साथ ही शेख ने अपनी दावेदारी को तेजी से आगे बढ़ाया और अब तक अंतिम मुहर के लिए भोपाल में जोर लगा रहे है। सीएम के निर्देश के बाद तैयार नोटशीट में अपना नाम जुड़वाने के लिए शेख जहां भोपाल में लगे हुए है तो अन्य दावेदार मंदसौर से ही अपने नेताओं से संपर्क कर अपने पक्ष में निर्णय करवाने में लगे है।

फोन का इंतजार करते रहे पार्षद
प्रदेश सचिव राजीवसिंह को नपा के सभी १७ पार्षदों से रायशुमारी कर सीमम को रिपोर्ट देना है। इसके बाद इस पर अंतिम मुहर लगेगी। ऐसे में सभी पार्षदों को उम्मीद थी कि सोमवार को फोन आएंगे या उनसे संपर्क होगा, लेकिन दिनभर बीत जाने के बाद भी किसी के पास भी फोन नहीं आया और न हीं कोई संदेश आया। पार्षदों के साथ ही जो अध्यक्ष के लिए दावेदार है, उनके पास भी किसी का भी फोन नहीं आया। ऐसे में दिनभर सभी पार्षद नेताओं के फोन का इंतजार करते रहे।

शेख के विरोध में शुरु हुआ लेटर लिखवाने का दौर
इधर भोपाल में मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में शेख का नाम आगे बढऩे के बाद अन्य दावेदार जो शेख के विरोध में है, उन्होंने पार्टी स्तर पर विरोध में मोर्चा खोल दिया है। किसी ने विरोध में पार्षदों से लेटर लिखवाकर भेजना शुरु कर दिया तो कोई हाईकमान में बैठे अपने नेताओं से संपर्क कर शेख के नाम पर आपत्ति लगाकर अपने नाम की पैरवी करवाने में लगा है। शेख के विरोध में इतना तक लेटर में लिखवाकर भेज दिया है कि यदि शेख को अध्यक्ष बनाया तो सभापति पद मंजूर नहीं होगा।

आवास से लेकर संबल के लिए भटक रहे हितग्राही
प्रधानमंत्री आवास योजना में किश्तों के लिए संबल योजना की मिलने वाली राशि, अनुमति, पेंशन, राशनकार्ड, नामांतरण के प्रकरणों के साथ ही अलग-अलग योजनाएं जो नपा के माध्यम से शहर में संचालित होती है। उनके लाभ लेने के लिए हितग्राही यहां नियमित भटक रहे है। शहर विकास के साथ ही हजारों हितग्राही भी पिछले एक माह से परेशान हो रहे है।

अधिकारी-कर्मचारी सब असमंजस में
एक माह हो गया। नपा में कोई अधिकारी-कर्मचारी नहीं टिक रहा है। जो भी आ-जा रहा है अपनी मनमर्जी से। कोई नया काम नहीं हो रहा है तो पूराने कामों को भी गति नहीं मिल रही है। नपा में कम और बाहर चौराहों पर अधिक कर्मचारी-अधिकार मिल रहे है। अध्यक्ष को लेकर निर्णय नहीं होने और सीएमओ के भी नहीं होने के कारण यह स्थिति बनी है। इन दिनों काम तो पूरी ठप्प हुआ है। संचालन भी प्रभावित हुआ है, लेकिन नपा भी पूरी तरह बेलगाम हो चुकी है। अधिकारी-कर्मचारी भी काम को लेकर पूरी तरह असमंजस में है। अध्यक्ष-सीएमओ के नहीं होने के कारण किसी का भी अंकुश नहीं रहा है।

खाली कुर्सी से नपा में यह काम पूरी तरह हुए ठप्प
-नगर पालिका का सम्मेलन व पीआईसी की बैठकें नहीं होने से एक भी नए कामों को मंजूरी नहीं मिल पा रही है।
-शहर में चल रहे निर्माण कार्यों के करीब २ करोड़ से अधिक के भुगतान अटक गए है।
-भुगतान नहीं होने के कारण दूसरे स्वीकृत काम भी नहीं हो पा रहे। क्योंकि जिन ठेकेदारों ने काम लिया, उनका भुगतान हो तो वह आगे के काम शुरु करें।
-चल रहे काम भी बंद हो रहे है। काम की प्रगति के अनुसार भुगतान नहीं होने के कारण कई काम अधूरे ही पड़े है।
– ५० से ६० ऐसे काम है। जिनकी स्वीकृति के साथ पूरी फाईल तैयार है, जिनके सिर्फ टैंडर लगना बाकी है। टैंडर के अभाव में यह आगे नहीं बढ़ पा रहे है।
-करीब ५ से १० काम ऐसे है। जिनके वर्कऑर्डर नहीं होने के अभाव में काम शुरु नहीं हो पा रहे है।
-शहर से जुड़े कई बड़े व करोड़ो के प्रोजेक्ट अधर में लटक गए। जिन पर पिछले एक माह से कोई नया अपडेट नहीं आया है। इसमें अलग-अलग कामों के करीब १० से १५ बड़े प्रोजेक्ट है। जिनकी लागत ५ से लेकर ३० करोड़ से अधिक तक की है।
-बिजली, पानी, उद्यान, सफाई शाखा में भी सिर्फ बिलों का भुगतान हो रहा है। नई सामग्री खरीदी से लेकर अन्य काम इन शाखाओं में भी रुकें। जिनकी नियमित जरुरत होती है।

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