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नपा नामांतरण में भारी भ्रष्टाचार-श्रीमती खेड़ीवाला

विधायक ने भी अवलोकन कर उठाये थे प्रक्रिया पर सवाल

मन्दसौर। पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं पार्षद शाकेरा खेड़ीवाला ने बताया कि नगरपालिका में सम्पत्ति के नामांतरण में भारी भ्रष्टाचार व्याप्त है। अगर कोई व्यक्ति भ्रष्टाचार की राशि नहीं देता है तो उसका नामांतरण एक-एक, दो-दो वर्षों तक नहीं होता हैं। कोई भी व्यक्ति 25 लाख रूपये का मकान बनाने हेतु भूखण्ड खरीदता है तो 2 प्रतिशत राशि याने उससे 50 हजार रूपये नामांतरण शुल्क के नाम पर नगरपालिका जमा करवाती है, जबकि मध्यप्रदेश की अन्य नगरपालिकाओं में यह राशि नाम मात्र की ली जाती है। इन्दौर जैसे नगरनिगम में भी मात्र 1500 रूपये नामांतरण शुल्क के नाम पर लिये जाते है। विक्रय पत्र करवाते समय 2 प्रतिशत राशि स्टॉम्प शुल्क के साथ ऑनलाईन नगरपालिका ड्यूटी के रूप में जमा हो जाती है फिर भी दोबारा मंदसौर नगरपालिका 2 प्रतिशत राशि नामांतरण शुल्क के नाम पर पुनः नगरपालिका में जमा करवाती है, इस प्रकार नगरपालिका 4 प्रतिशत राशि सम्पत्ति के मूल्य पर प्राप्त कर लेती है। इतनी बड़ी राशि नगरपालिका द्वारा लिये जाने के बाद भी नामांतरण के लिये आम आदमी को नगरपालिका के चक्कर काटना पड़ते है व जब तक वह भ्रष्टाचार के रूप में 20 से 25 हजार रूपये नहीं दे देता तब तक नामांतरण के लिये फाईल आगे नहीं बढ़ाई जाती है, इस राशि में नगरपालिका के अधिकारियों के साथ सभापतिगण भी अपना हिस्सा ले रहे है। अगर सभापतियों के पास हिस्सा नहीं पहुंचता है तो पीआईसी की बैठक में यह लिखकर फाईल वापस कर दी जाती है कि इसका पुनः मौका देखा जाएगा। इस भारी भ्रष्टाचार से जनता में आक्रोश व्याप्त है। आम जनता लगातार अपना असंतोष जनप्रतिनिधियों को व्यक्त कर रही है। कांग्रेस पार्षदगण ने इस भ्रष्टाचार को समय-समय पर परिषद् में उठाया परन्तु व्यवस्था न तो सुधरी ना ही संबंधितों के कानों पर जूं तक रेंगी। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि, इस प्रकार की शिकायत विधायक यशपालसिंह सिसौदिया के पास लगातार पहुंच रही थी परन्तु अपनी स्वयं की पार्टी की परिषद् होने के कारण उन्होंने अपने स्तर पर कई प्रयास किये जब उनकी बात भी नहीं सुनी गई तो उनको स्वयं नगरपालिका आकर नामांतरण विभाग का अवलोकन करना पड़ा व उन्होंने कई कमियां दर्शाते हुए एक पत्र मुख्य नगरपालिका अधिकारी को भी लिखा। यह अलग बात है कि अपनी पार्टी की परिषद् होने के कारण वो भ्रष्टाचार की बात खुलकर नहीं कह सके व कमियां निकालते हुए इशारे-इशारे में उन्होंने सारी बात कह दी।  श्रीमती शाकेरा खेड़ीवाला ने नगरपालिका अध्यक्ष, मुख्य नगरपालिका अधिकारी एवं पीआईसी सदस्यों से मांग की है कि वे तत्काल नामांतरण को समय सीमा में करने की व्यवस्था करे। अविवादित नामांतरण की प्रक्रिया 60 दिन में पूरी करे। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगावे। नामांतरण रजिस्टर में नामांतरण फाईल किस स्टेज पर चल रही है उसे अंकित करे ताकि संबंधित को जानकारी रहे कि फाईल कहा रूकी हुई है। मौका मोआयना के नाम पर जो भ्रष्टाचार हो रहा है उसे बंद किया जावे, वैसे भी विक्रय पत्र में सम्पत्ति के फोटोग्राफ लगे हुए होते है। विक्रय पत्र ऑनलाईन किया हुआ रहता है, विक्रय पत्र से हो रहे नामांतरण के मौका मुआयना करने की प्रक्रिया को बंद किया जावे ताकि मौका मुआयना के नाम पर जो भारी भ्रष्टाचार अधिकारियों व सभापतियों द्वारा किया जा रहा है वह बंद होगा। नगरपालिका में एकल खिड़की प्रणाली लागू की जावे।

श्रीमती शाकेरा खेड़ीवाला ने बताया कि नामांतरण पीआईसी की बैठक में होते है एवं पीआईसी में सभी सभापति सदस्य होते है। इसमें इन सभी सभापतियों द्वारा ही नामांतरण का ठहराव-प्रस्ताव किया जाता है। नगरपालिका के संबंधित अधिकारी व बाबू तो केवल मात्र विज्ञप्ति निकालकर फाईल पीआईसी में प्रस्तुत करते है फिर आखिरकार इतना भ्रष्टाचार क्यों हो रहा है।

ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष एवं पार्षद मो. हनीफ शेख, कांग्रेस पार्षद शाकेरा खेड़ीवाला, इस्माईल मेव, विजय गुर्जर, डिकपालसिंह भाटी, संगीता शर्मा, रंजना सुदीप पाटील, दीपिका खिंची, राजेन्द्र सोपरा, रूपल संचेती, सबीना आसिफ छीपा, नाजिया आरीफ बेग, रूकसार गोरी, मुमताज बी, हाजी रसीद, नारायण कुराडि़या, पूर्व पार्षद अशोक रैकवार, तरूण खिंची, युसुफ खेड़ीवाला,  राजेश बंधवार, शैलेन्द्र बघेरवाल, लियाकत नीलगर, संजय राठौर, जगदीश जटिया, सलीमुद्दीन शेख आदि ने कलेक्टर से मांग की है कि नामांतरण में किये जा रहे भ्रष्टाचार की जांच की जावे अन्यथा कांग्रेस को आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ेगा।

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