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नवंबर में शुरू होगी शिवना पुल की मरम्मत, 1.25 करोड़ खर्च होंगे

शहर के 46 साल पुराने शिवना पुल की आखिरकार ब्रिज सेतु विकास निगम ने सुध लेना शुरू कर दिया है। इसकी मरम्मत व रिनोवेशन के लिए निगम ने करीब सवा करोड़ रुपए का एस्टीमेट बनाया गया है। टेंडर के लिए फाइल इंदौर कार्यालय भेजी जा चुकी है। वहां से मरम्मत के लिए टेंडर की प्रक्रिया होगी। अधिकारियों के अनुसार नवंबर तक मरम्मत का काम शुरू हो जाएगा।

शहर से गुजर रहे यातायात को सुगम करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने 1972 में शिवना के ऊपर मुक्तिधाम के पास पुल निर्माण कराया था। तब पीडब्ल्यूडी ने लागत निकालने व रख-रखाव के लिए टोल नाका भी बना था। कुछ समय बाद ही टोल बंद नाका बंद हो गया। वहां जमा 8 करोड़ रुपए से शहर के मध्य महू-नीमच राजमार्ग का निर्माण कराया। करीब 46 साल बाद ब्रिज निर्माण विभाग ने शिवना ब्रिज की सुध ली है। पिछले माह विभाग ने भोपाल से ब्रिज इंस्पेक्शन यूनिट भेज कर ब्रिज की जांच कराई। वाहन में लगी हाइड्रोलिक क्रेन से अधिकारियों ने पुलिया के नीचे देखा तो ब्रिज में लगे बेरिंग खराब मिले। ब्रिज में दरारें व सीसी के टुकड़े गिरे मिले। इसके बाद ब्रिज विकास निगम के एसडीओ प्रवीण नरवरे ने ब्रिज की मरम्मत व रिनोवेशन के 1.25 करोड़ रुपए का एस्टीमेट बना दिया है। जल्द काम शुरू कराने के लिए अधिकारियों ने फाइल इंदौर कार्यालय भी भेज दी है। वहां टेंडर प्रक्रिया होगी। टेंडर स्वीकृत होने के बाद नवंबर में मरम्मत शुरू हो जाएगी।

गर्मी में फूल जाते हैं स्लैब में उपयोग किए गए सरिए
शिवना नदी पर मुक्तिधाम के पास स्थित ब्रिज जिसकी मरम्मत के लिए सवा करोड़ रुपए का एस्टीमेट बनाया गया है।

रेलिंग होगी नई व मरम्मत होगी
ब्रिज के दोनों तरफ आरसीसी से ही बनी रेलिंग जगह-जगह से जर्जर है। ब्रिज विकास निगम नई रेलिंग लगवाएगा और दरारों व जर्जर हिस्से के स्लैब की मरम्मत की जाएगी। इससे ब्रिज की उम्र 30 से 40 साल तक बढ़ जाएगी।

20 दिन लगेंगे वर्क ऑर्डर में
ब्रिज में हर पिलर के बीच स्लैब डाला जाता है। इसके मध्य 5 से 10 एमएमए या आवश्यकता अनुसार कुछ जगह छोड़ी जाती है। गर्मी में स्लैब में उपयोग किए गए स्टील व लोहे के सरिए फूलते हैं। इससे स्लैब फैलने की जगह मिलती है। यह प्रक्रिया थर्मल एक्सपांशन कहते हैं। हर स्लैब अपनी जगह बैठाए रखने व भारी वाहन के समय लगने वाला दबाव कम करने के लिए इसके नीचे बेरिंग लगाए जाते हैं। ये भारी वाहनों के दबाव को सीमेंट-कंक्रीट पर डालने की बजाय स्वयं झेलते है। बेरिंग खराब होने पर स्लैब में दरार आने लगी है। ब्रिज विकास निगम द्वारा मरम्मत कराई जाएगी। इसके लिए बाहर से बड़ी क्रेनें आएंगी जो स्लैब उठाकर बेरिंग सुधारने में मददगार होंगी।

रोज निकलते हैं 80 हजार से ज्यादा लोग
पुल महू-नीमच राजमार्ग को जोड़ता है। रतलाम व नीमच जाने व वहां से आने के लिए रोज करीब 80 हजार लोग इस ब्रिज का उपयोग करते हैं। यातायात दबाव अधिक होने पर हाल ही में सेतु विकास निगम ने वनवे बनाने के लिए इसके समकक्ष एक और ब्रिज निर्माण की स्वीकृत कराई है। गुजरात की कंपनी का ठेका हो गया। जल्द ही नया ब्रिज बनेगा।

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