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नानीबाई रो मायरो कथा मे प्रथम दिवस मे आचार्य श्री माधवरामानुजजी शास्त्री ने कहा

मनुष्य का आवरण संयम व सहयोग है

मन्दसौर। ब्रजप्रिया अग्र महिला मण्डल नानी बाई रो मायरो कथा मे प्रथम दिवस मे परम् पूज्य आचार्य श्री माधवरा मानुजजी शास्त्री ने कहा कि मनुष्य का आवरण संयम व सहयोग है, यदि इस भाव को अपने जीवन मे ना उतार पाया तो वह व्यर्थ ही जीवन जी रहा है। नरसिंह मेहता ने बाल्यावस्था से ही शिव की आराधना कर बहुत हट करने पर उन्हे दर्शन देने के लिये प्रकट होना पड़ा। नरसिंह मेहता से वरदान मांगने को कहा। नरसिंह मेहताजी को वरदान दे कर अन्तरध्यान हो गये। नरसिंह मेहता का विवाह हुआ। उनकी पत्नी को सासुजी व ससुराल पक्ष के बहुत ताने मारते थे, परेशान करते थे। उसे पीहर नहीं जाने दिया। एक भाई के विवाह की कंकू पत्रिका आई कि बाई ने विवाह मे लेवा भेजा। जना सासु कयो तेरा भाई रा ब्याव माय जायेगा तो तेरो भाई मर जावेगो। इस प्रकार नरसिंह मेहताजी की पत्नी नहीं गई और कुछ दिन बित गये। बाई के पीहर से एक सज्जन आया तो बताया कि तेरो भाई तो मर गयो। तू मिलवाने आई भी कोनी। उसने अपना कलेजा पर पत्थर रख वचन का पालन करा।

प्रथम दिवस कि कथा अधिक से अधिक संख्या श्रृद्धालुजन ने कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। समाज के पुरूषजन ने भी अधिक संख्या मे कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। ब्रजप्रीया अग्र महिला मण्डल द्वारा सभी का स्वागत अभिनंदन किया गया।

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