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नालछा माता जलती चूल पर से श्रद्धालु इस तरह नंगे पैर निकले…

नालछा माता मंदिर में शनिवार को दशहरा पर्व मनाया गया। इसके तहत शाम को चूल का आयोजन हुआ। यहां धधकते अंगारों में घी डालकर उन्हें बार-बार प्रज्वलित किया जा रहा था और इन्हीं पर हंसते-मुस्कराते भक्त निकलते गए। कई बार एसा लगा कि आस्था के आगे अंगारे भी नतमस्तक हो रहे हैं। वहां मौजूद लोगों ने थोड़ी-थोड़ी देर में माता के जयकारे लगाकर वातावरण को धर्ममय कर दिया। शनिवार शाम को मंदिर से माताजी की वाड़ी निकली। उसमें शामिल भक्त ढोल-धमाकों के साथ मां के जयकारे लगाते हुए मंदिर परिसर में ही घूमकर सीधे चूल स्थल पर पहुंचे।

यहां से एक-एक कर भक्तों ने धधकते हुए अंगारों पर से निकलना शुरू किया। जैसे-जैसे लोग चूल से निकलते गए वहां मौजूद लोगों ने माता के जयकारे लगाते हुए पूरे परिसर को गुंजायमान कर दिया। नवरात्रि महोत्सव में नालछा माता मंदिर में शनिवार को चूल का आयाेजन हुआ। दो घंटे में तैयार चूल पर 10 श्रद्धालु अंगारों से निकले। चूल के बाद बाड़ी विसर्जन हुआ और महाआरती की गई।

नालछामाता मंदिर में मंगलवार को हुए चूल के लिए 21 फीट लंबा, डेढ़ फीट गहरा और इतना ही चौड़ा गड्ढा तैयार किया। 2 क्विंटल आम की लकड़ी सहित अगरबत्ती का बुरादा और अन्य सामग्री से तैयार चूल में शाम 4.30 बजे पूजन के बाद आग जलाई। अंगारे धधकने में करीब एक घंटा लगा। शाम 6 बजे चूल का पूजन किया। शाम 6.25 बजे अंगारों से श्रद्धालु निकलना शुरू हुए। 10 श्रद्धालु जयकारों के साथ चूल से निकले। शाम 6.29 बजे चूल बंद कर दी गई। एहतियात बतौर एम्बुलेंस सहित अन्य सुरक्षा इंतजाम किए थे। चूल के बाद बाड़ी का विसर्जन हुआ। इसके बाद नालछामाता की महाआरती हुई। मंदिर समिति के कंवरलाल प्रजापत, वासुदेव माली, राजे सतीदासानी, जसवंत माली, भगवती सोनी, विष्णु माली सहित अन्य मौजूद थे।

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