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निजीकरण के विरोध में बैंककर्मियों का प्रभावी प्रदर्शन

मन्दसौर। सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण के विरोध में बैंक कर्मियों का गांधी चैराहे पर विशाल प्रदर्शन हुआ। सरकार एवं रिजर्व बैंक, बैंकों के खराब ऋणों की वसूली के लिये ठोस कदम उठाने के बजाय सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों के निजीकरण जैसे भड़काऊ बयान देकर बैंकों को मानसिक रूप से कमजोर कर निजी बैंकों को प्रोत्साहित कर रही है। बैंकों के खराब ऋणों में लगातार वृद्धि हो रही है। खराब ऋणों की राशि लगभग 13 लाख करोड़ के खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। अधिकतर खराब ऋण कार्पोरेट घरानों के है। यह अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह केन्द्र सरकार ऋण वसूली के बजाय विभिन्न तरीकों से छूट देकर उपकृत कर रही है। खराब ऋणों को सस्तें मूल्य पर बेचा जा रहा है। सरकार कार्पोरेट घरानों तथा बड़े बकायादारों के नाम भी सार्वजनिक नहीं करना चाहती बल्कि लीपापोती कर बैंकों को चूना लगाने के प्रयास किये जा रहे है। सार्वजनिक बैंके जनता की धरोहर है। इन्हें हर हाल में बचाना होगा। साथियों संगठित होकर ऐसे किसी भी कदम का हम पूरजोर विरोध करते है। आगे भी संघर्ष को तेज किया जाएगा।
उक्त उद्गार विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों, कामरेड सर्वश्री महेश मिश्रा, श्रीनिवास मोड़, रमेश जैन, युक्तेशवर सूद, राम अजमेरा, गजेन्द्र तिवारी, शिव शाष्टा ने व्यक्त किये।
प्रदर्शन में विभिन्न बैंकों के कर्मचारी कामरेड विजय देवड़ा, रवि जांगड़े, शिवरमन पाटीदार, मनीष कोठारी, कन्हैया जाटव, भरत नागर, भोलेश्वर पाठक, रवि गेहलोत, संजय शुक्ला, अरविन्द दुबे, जिनेन्द्र राठौर, कैलाश मांझी, शैलेन्द्र जैन, भूपेश भटेवरा, यशवंत देवड़ा, कमलेश भावसार, नरेन्द्र श्रीवास्तव, राहुल सेठिया, पियुष घाटिया, मिथुन राठौर, एम.एल. चैहान, संजय सेठिया, राॅकी नगारे, लोकेन्द्रसिंह सिसौदिया, गौतम सेन, विकास भूरिया, पिंकेश चैहान, दीपक चंदेल एवं महिला विंग से अर्चना मीणा, प्रमिला बामनिया, संतोष गुर्जर, प्रज्ञा जैन, पुनम गुप्ता, आशा, प्राची कुलकर्णी, अमृत देवड़ा, निलीमा, कंचन देवी, माधुरी पोरवाल सहित अनेक बैंककर्मी शामिल हुए।
प्रदर्शन का संचालन कामरेड सुरेन्द्र संघवी ने किया और आभार प्रदर्शन कन्हैयालाल पारूण्डिया ने किया।

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