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नित्यानंदजी के विग्रह प्रतिष्ठापित प्रस्तावित भूमि का पूजन किया 

महाराजजी को दी श्रद्धांजली व षोड़शी कार्यक्रम सम्पन्न ब्रह्मचारी महेश चैतन्य महाराज का हुआ पट्टाभिषेक

मन्दसौर। श्री चैतन्य आश्रम मेनपुरिया के संरक्षक ब्रह्मलीन पूज्य सन्त नित्यानंद महाराज का षोड़शी भण्डारा-महाप्रसादी कार्यक्रम चैतन्य आश्रम मेनपुरिया में विभिन्न क्षेत्रों से आये 16 से अधिक संतों की उपस्थिति में आश्रम संरक्षक वरिष्ठ सन्त पू. श्री धीरेशानन्दजी महाराज की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। युवाचार्य संत महेश चैतन्यजी ब्रह्मचारी का विधिवत वेद मंत्रो  संतों तथा लोकन्यास ट्रस्टीगणों द्वारा पट्टाभिषेक कर चादर उड़ाई गई। अन्य कई श्रद्धालुओं द्वारा भी ब्रह्मचारीजी की शाल श्रीफल भेंटकर बहुमान किया। पट्टाभिषेक के समय सस्वर वेदमंत्रों का उच्चारण श्री पशुपतिनाथ संस्कृत पाठशाला आचार्य श्री विष्णुप्रसाद ज्ञानी के नेतृत्व में बटुकों द्वारा किया गया। पूजन-आरती पश्चात् सन्तों द्वारा ब्रह्मलीन स्वामी भागवतानन्दजी महाराज मंदिर के पार्श्व में स्वामी नित्यानंदजी श्री विग्रह प्रतिष्ठापित प्रस्तावित भूमि का पूजन किया गया। हवन पूजन पं. पंकज उपाध्याय एवं पं. कमलेश शर्मा ने सम्पन्न कराया।

इस अवसर पर  विधायक यशपालसिंह सिसौदिया, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक अध्यक्ष मदनलाल राठौर, पं. कृष्णवल्लभ शास्त्री, सामाजिक समरसता मंच विनोद मेहता, श्री चैतन्य आश्रम लोक न्यास मेनपुरिया ट्रस्ट अध्यक्ष प्रहलाद काबरा, उपाध्यक्ष दयाराम दग्धी, आदि सम्मिलित हुए।

स्वागत उद्बोधन लोक न्यास अध्यक्ष प्रहलाद काबरा ने दिया। यशपालसिह सिसौदिया ने कहा कि स्वामी नित्यानंदजी का सानिध्य और आशीर्वाद का लाभ सम्पूर्ण क्षेत्र को यथा समय बराबर मिलता रहता था। उनका ब्रह्मलीन होना और वह भी काशी में जाकर मुक्ति के अभिलाषी प्रत्येक को नहीं मिल पाता वह स्वामीजी को सहज में मिलना और ऐसे पुनीत अवसर पर जब एक ओर मकर सक्रांति पर्व सोमवार और माँ गंगा का पवित्र तट सब अति दुर्लभ संयोग जो स्वामीजी के त्याग-तपस्या का ही प्रतिफल है। हम उनके बताये मार्ग पर चले, उन्हें प्रतिपल अपने समीप अनुभव करे जिससे धर्म मार्ग को कभी न छोड़े यही सच्ची श्रद्धांजली होगी।  बंशीलाल टांक ने स्वामीजी द्वारा अपनी मृत्यु के पूर्व आभास का जिक्र करते हुए कहा कि स्वामीजी की भगवान शंकर में विशुद्ध नेष्ठिक भक्ति थी। भागवत प्रवक्ता श्री प्रेमप्रकाश शर्मा, ओम शर्मा, राजेन्द्र जोशी ने भी स्वामीजी के प्रेरणास्पद प्रसंगों का उल्लेख किया।

मौके पर सन्तों के प्रवचन भी हुए। संचालन साहित्याचार्य भागवत प्रवक्ता कमलेशजी शास्त्री ने किया। आभार राधेश्याम सिंखवाल ने माना। कार्यक्रम में सम्मिलित श्रद्धालुओं की अपार भीड़ से जहां श्री प्रत्यक्षानंद सत्संग सभागार तिलभर भी खाली नहीं रहा वहीं बाहर सम्पूर्ण आश्रम श्रद्धालुओं से खचाखस भरा था। अंत में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भण्डारा प्रसादी ग्रहण किया।

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