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नेत्रदान शिविर से शुभारंभ हुआ गीता जयंती महोत्सव का

राष्ट्रधर्म को सर्वोपरी बताया गीता ने-पूज्य आचार्य रामदयालजी महाराज

मन्दसौर। धर्मधाम गीता भवन में 46वें गीता जयंती महोत्सव तथा 43वें निःशुल्क नेत्रदान शिविर शाहपुरा पीठाधीश्वरश्रीमद् जगद्गुरू पूज्य स्वामी श्री रामदयालजी महाराज के पूज्य स्वामी श्री रामनिवासजी महाराज के सानिध्य में शुभारंभ हुआ।

प्रारंभ में नेत्रदान शिविर का शुभारंभ पूज्य श्री रामनिवासजी महाराज एवं अतिथियों विधायक यशपालसिंह सिसौदिया करेंगे, नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार, जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश रातडि़या, गौशाला अध्यक्ष अनिल संचेती ने भगवान श्री कृष्ण के श्री विग्रह के सामने दीप प्रज्जवलन कर किया गया।

संतों एवं अतिथियों का पुष्पहारों से स्वागताध्यक्ष राजेन्द्रसिंह अखावत, कार्यवाहक अध्यक्ष जगदीश चौधरी, सचिव पं. अशोक त्रिपाठी, ट्रस्टीगण धीरेन्द्र त्रिवेदी एडव्होकेट, बंशीलाल टांक, सत्यनारायण पलोड़, सुरेश डगवार, गीता भवन निर्माण समिति अध्यक्ष मोहनलाल मरच्या, अन्तर्राष्ट्रीय रामस्नेही ज्योतिष सेवा ज्योतिषज्ञ भाणेज सुश्री लाड़कुंवर, नेत्र शिविराध्यक्ष दीपक चौधरी, शेषनारायण माली, विनोद चोबे, वरिष्ठ पत्रकार डॉ. घनश्याम बटवाल, राजेन्द्र सेठिया, जगदीश काला, सूरजमल गर्ग चाचा, विनोद मेहता, राजाराम तंवर, डॉ. दिनेश तिवारी, राव विजयसिंह, भागीरथ दशोरा, शशीकांत गर्ग, ठा. अर्जुनसिंह राठौर, अजीजुल्लाह खान, रमेश ब्रिजवानी, बंशीलाल काबरा, धनराज धनगर आदि ने किया।

पूज्य आचार्य श्री ने गीता के आधार पर राष्ट्रधर्म को सर्वाेपरी बताते हुए कहा कि राष्ट्रधर्म सुरक्षित रहने पर ही हम सुरक्षित रह सकते है।

आपने कहा कि मंजिल तक पहुंचने में यात्रा चाहे जितनी लम्बी क्यों न हो, रास्ता चाहे जितना टेढ़ा-मेढ़ा, कंटीकाकीर्ण क्यों न हो, पार करने में चाहे जितनी वेदना पीड़ा क्यों न सहना पड़े परन्तु मंजिल पर पहुंचते ही जो मन में अपार आनन्द की अनुभूति होती है उससे रास्ते के समस्त कष्ट मन से दूर व ओझल हो जाते है।

समय की महत्ता बताते हुए आपने कहा कि मैं चांद सूरज की तरह ढलना नहीं जानता, समुद्र की तरह मचलना नहीं जानता, मेरे साथ चलना है तो तेज रफ्तार कर अपनी, मैं वक्त हूॅ जो एक पल ठहरना नहीं जानता। आपने कहा हमने चाहे चारों वेद नहीं पढ़े हो परन्तु जो जवाबदारी जिम्मेदारी, ईमानदारी और वफादारी को समझकर यदि इस पर कायम रह गये तो समझो हमने चारों वेदों का स्वाध्याय कर लिया।

प्रत्येक कार्य में समझदारी की अनिवार्यता बताते हुए आपने कहा कि परिवार में पति समझदार है तो मकान जल्द बन जाता है। पत्नी यदि समझदार है तो घर जल्दी संवर जाता है, बच्चे भी समझदार है तो घर स्वर्ग बन जाता है और पति-पत्नि दोनों समझदार है तो घर मंदिर बन जाता है। मॉ-बाप समझदार है तो घर दिव्य लोक बन जाता है। गीता का आश्रय लेकर भगवान तीन लोक का पालन करते है तो फिर गीता का आश्रय लेकर हम परिवार, समाज, राष्ट्रहित में सहभागी क्यों नहीं हो सकते।

पूज्य श्री शंभुरामजी महाराज भण्डारीजी श्रीरामद्वारा धलपट ने कहा कि समय, सम्पत्ति का जितना सदुपयोग हम करेंगे उतनी ही अधिक आत्मशांति व आत्म सुख का अनुभव हमें होगा। धर्मकार्य को भार समझकर नहीं बल्कि यदि भाव से किया जाएगा तो उसका प्रभाव अवश्य होगा।

धर्मसभा में पूज्य श्री नरपतरामजी महाराज उदयपुर, पूज्य श्री रामस्वरूपजी महाराज इंदौर, पूज्य श्री रमतारामजी महाराज चित्तौड़ का भी सानिध्य प्राप्त हुआ।

विधायक यशपालसिंह सिसौदिया ने कहा कि राजनीतिज्ञ, बुद्धिजीवी, अमीर, फकीर, गरीब, धनवान कोई भी क्यों न हो जीवन में सुख-शांति आनन्द की प्राप्ति के लिये सब कोई धर्मलाभ लेना चाहता है और यह लाभ संतों के सानिध्य, उनके मार्गदर्शन से ही मिल सकता है। आपने एकात्म यात्रा के संदर्भ मे नर्मदा तट पर ओकारेश्वर में 108 फीट की विशाल प्रतिमा स्थापना का उल्लेख करते हुए गीता जयंती की स्थापना में ब्रह्मलीन स्वामी अनुरागी बापू के त्याग, तपस्या, समर्पण को स्मरण किया। साथ ही गीता भवन के कोषाध्यक्ष स्व. जगदीशचन्द्र चौबे को भी याद किया।

नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार ने युवा पीढ़ी को पाश्चात्य संस्कृति से बचाने के लिये गीता अनुसरण का सुझाव दिया। आपने नेत्रदान शिविर को सबसे बड़ा पुण्य कार्य बताया।

जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रकाश रातडि़या ने कहा कि जीवन में उच्च लक्ष्य तभी प्राप्त होगा जब हम प्रथम लक्ष्य निर्धारित करे और लक्ष्य निर्धारित करने का मार्ग प्रशस्त गीता करती है। भावी युवा पीढ़ी को संस्कारित करने के लिये गीता का स्वाध्याय जरूरी हैं।

गौशाला अध्यक्ष अनिल संचेती ने धर्म, ज्ञान, संस्कारों की गंगा प्रवाहित करने में धर्मधाम गीता भवन की अहम् भूमिका की सराहना की।

डॉ. दिनेश तिवारी ने भी धर्मसभा को संबोधित किया। प्रारंभ में स्वागत उद्बोधन राजेन्द्रसिंह अखावत ने दिया। संचालन पं. अशोक त्रिपाठी ने किया।
43वें नेत्र शिविर समाजसेवी स्व. श्री बद्रीनारायण चौधरी की स्मृति में जगदीश-सुमित्रा चौधरी परिवार (चौधरी ट्रेक्टर), मंदसौर के सौजन्य से आयोजित हो रहा है।

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