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नोटबंदी के दौरान उपजी समस्या के विरोध में बैंक कर्मियों का जंगी प्रदर्शन

देश में 2 लाख 28 हजार के करीब ए.टी.एम. है, चूंकि ए.टी.एम. को नये नोटों के भुगतान हेतु नोटबंदी के पूर्व केलीबरेट नहीं किया गया, अतःएव अधिकतम ए.टी.एम. विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के बन्द पड़े हुए है और महानगरों में जो ए.टी.एम. चल रहे है, उसमें केश की पर्याप्त आपूर्ति न होने की वजह से नोट नहीं रखे जा रहे है। जिसके फलस्वरूप ग्राहकों को व्यक्तिगत रूप से बैंकों में जाकर नगदी निकालना व जमा करना पड़ रही है। व स्टाॅफ की कमी होने के कारण ग्राहक व बैंककर्मी दोनों परेशानियां झेल रहे है। सरकारी तंत्र के अपरिपक्व निर्णय जो कि प्रतिदिन सुबह-शाम बदलते रहे है एवं आर.बी.आई. द्वारा रसूकदारों के इशारों पर प्रायवेट बैंकों को ज्यादा नगदी प्रदान की जा रही है। जबकि सार्वजनिक क्षेत्रों की बैंकों की शाखा अधिक होकर गांव-गांव में फैली हुई हैं। इन सारी तकलीफों के बावजूद भी बैंककर्मियों ने 50 दिनों तक अपनी अभूतपर्व धैर्यता का परिचय देते हुए रात-दिन 12-14 घण्टे एवं अवकाश के दिनों में भी नफा-नुकसान व्यक्तिगत रूप से वहन करते हुए ग्राहकों एवं जनता को अपनी कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया। देश के बैंककर्मी राष्ट्रीयकरण को सफल बनाने हेतु विगत 46 वर्षों से प्रतिबद्ध व कटीबद्ध है। व एक दशक से मांग करते आ रहे है कि जानबूझकर ऋण नहीं चुकाने वाले कारर्पोरेट घरानों के विरूद्ध कड़े कानून बनाये जाये क्योंकि जनता का धन कानून की बारिकियों का फायदा उठाकर हड़प कर रहे है। देश के बैंककर्मियों ने केन्द्र सरकार को सीधे-सीधे ज्ञापन देते हुए मांग की है कि-
मांगेः-
1. बैंकों को पर्याप्त नगदी राशि दी जाये।
2. सारे ए.टी.एम. अविलम्ब चालु किये जाये।
3. आर.बी.आई. द्वारा नगदी देने में भेदभाव को रोका जाए एवं उनके द्वारा नगदी आपूर्ति में पारदर्शिता रखी जाए।
4. शाखाओं में नगदी की कमी होने के बावजूद कुछ प्रभावी लोगों के पास भारी मात्रा में करेंसी मिल रही है इसकी सी.बी.आई. द्वारा जांच कराई जावे।
5. नोट बंदी के कारण जिन बैंक स्टाॅफ एवं ग्राहक की मृत्यु हुई है, उनके परिजनों को मुआवजा दिया जावे।
6. एक माह से अधिक समय से बैंककर्मियों एवं अधिकारियों द्वारा किए गए अतिरिक्त कार्यों का उचित पारिश्रमिक का भुगतान तुरन्त किया जाये।
7. बैंककर्मियों को शाखा में व केश लाने-लेजाने में सुरक्षा मुहैया कराई जाये।
उक्त प्रदर्शन में बैंककर्मियों के 7 लाख से अधिक सदस्यों वाले संगठन आॅल इण्डिया बैंक एम्पलाईज एसोसिऐशन एवं आल इण्डिया बैंक आफीसर्स एसोसिऐशन के आव्हान पर नगर के 16 सार्वजनिक क्षेत्र के बैकों के कर्मचारियों व अधिकारियों द्वारा देना बैंक गांधी चैराहे के समक्ष जोर-शोर से एक घण्टे तक नारेबाजी कर प्रदर्शन करते हुए कर्मचारियों को बैंक कर्मी नेताओं ने संबोधित करते हुए उक्त विचार व्यक्त किये।
सभा को रमेशचन्द्र जैन, महेश मिश्रा, सुरेन्द्र संघवी, शिवराजेन्द्र चाष्टा, रवि गेहलोत, सूर्यप्रकाश सालगिया, अनिल जैन, आशीष जोशी, जिनेन्द्र राठौर ने संबोधित किया। प्रदर्शन में दिव्या गुप्ता, संतोष गुर्जर, प्रज्ञा जैन, प्रमिला, चन्द्रेश कुमार कुंदवानी, रवि जान्डे, बाबूलाल सौलंकी, लालसिंह, राहुल सेठिया, रमेश पालीवाल, रमेश देवड़ा, यशवंत देवड़ा, कैलाश मांझी सहित सैकड़ों अन्य कर्मचारियों ने भाग लेकर अपनी सहभागिता की। सभा का संचालन जिनेन्द्र राठौर व आभार सुरेन्द्र संघवी ने व्यक्त किया।

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