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न्यायालय में फिर भिडे़ मुल्तानी, जमकर चलें लातें घुसे और चाकू से एक गंभीर 

जिला न्यायाधीश ने तलब किया पुलिस अधिकारियों को कोर्ट परिसर में नहीं ले जा सकेंगे अब वाहन

मंदसौर। चुनाव को लेकर आचार संहिता लगी होने के बावजूद भी अपराधियों में पुलिस और कानून व्यवस्था का कोई खौफ नजर नहीं आ रहा है। लगातार हो रहे गोलीकांड के बाद मंगलवार को फिर से एक अनोखी घटना हो गई। अभी तक मारपीट खून खराबे जैसे अपराधों का न्याय करने वाले न्यायालय परिसर में ही मंगलवार को मारपीट की घटना हो गई। एक व्यक्ति ने दिनदहाड़े खुलेआम कोर्ट परिसर में चाकूबाजी की घटना को अंजाम दे दिया वकिलों के बीच बचाव के बाद मामला शांत हुआ। घटना के बाद जिला न्यायाधीश माननीय श्री तारकेश्वर सिंह ने जिले के बड़े पुलिस अधिकारियों को तलब किया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मंगलवार को हत्या के प्रयास मे मामले में इनू पिता अनवर जो कि मुलजिम था कोर्ट में पेशी के लिए साथियों के साथ आया था यहां पर उसका सामने दूसरे पक्ष जो कि गवाही देने के लिए आया था पप्पू सुसाडीया से हो गया। देखते ही देखते दोनों में कहासुनी मारपीट में बदल गई। मुलजिम और फरियादी के बीच जमकर लाते घुसे चले वहां खड़े लोग बीच बचाव के लिए आते इतने पप्पू ने चाकू निकाल लिया और इनू पर हमला कर दिया। वकिलों ने बीच बचाव कर इनू को बचाया।

पप्पू वहां से भागने लगा तो उसे वहां खडे लोगों ने पकड़ लिया और पुलिस जवान के सुपुर्द कर दिया। चाकू को पप्पू ने कुएं में फंेक दिया था जिसे नपा के गोताखोरों द्वारा निकलवाया गया। मामले में कोतवाली पुलिस ने पप्पु सुसांडिया, मुख्तियार और साकेत के विरूद्ध 307 में मामला दर्ज किया है।

जिला न्यायाधीश ने किया तलब

घटना के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश माननीय श्री तारकेश्वर सिंह ने एएसपी मनकामना प्रसाद, सीएसपी नरेन्द्र सोलंकी और टीआई नरेन्द्र यादव के साथ एक घंटे तक बंद कमरे में चर्चा कर तलब किया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बैठक में यह भी तय किया गया कि अब वकीलों को छोड़कर कोई भी व्यक्ति अपना वाहन न्यायपति बालाजी मंदिर से आगे नहीं ला पाएंगा।

नहीं दिख अपराधियों में आचार संहिता का असर, आमजन को किया जा रहा परेशान

आचार संहिता में खुलेआम गोलीकांड, मारपीट, चाकूबाजी की घटना हो रही है। मंगलवार को तो न्यायालय परिसर जो अब तब इन सबसे अछूता था वहां पर भी चाकू चल गए। अपराधियों में आचार संहिता या कानून व्यवस्था का कोई भय नहीं है। आचार संहिता के नाम पर पुलिस द्वारा सिर्फ आमजन और प्रतिष्ठित व्यापारियों को ही परेशान किया जा रहा है। यह पहली बार देखने को मिला हैं कि चुनावी आदर्श आचार संहिता का इतना माखौल उड़ा हो।

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