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पति ने लिया बड़ा फैसला : पत्नि के ब्रेन के डेड होने पर शरीर के महत्वपूर्णअंगों को दान किया

हर वर्ष लाखों लोग मात्र इस वजह से मौत के मुंह में समा जाते हैं, क्योंकि उन्हें कोई डोनर नहीं मिल पाता. कभी ऑर्गन फेलियर के चलते, तो कभी एक्सीडेंट्स के कारण ऑर्गन ट्रांसप्लांट करना ज़रूरी हो जाता है और उसके बाद जान भी बच जाती है, लेकिन ऑर्गन डोनेट करनेवालों की कमी के चलते ऐसे मामलों का अंत भी अक्सर मौत के रूप में ही होता है.

शहर के जनकूपुरा क्षेत्र के राकेश डोसी ने पत्नी अर्चना की बे्रन डेड होने के बाद निर्णय ले लिया था कि वे पत्नी के सभी महत्वपूर्णअंगों को दान कर उन लोगों का जीवन बचाएंगे जो लंबे अरसे से मौत से संघर्षकर रहे है। उनके इस बड़े फैसले को परिवार ने भारी मन से मान लिया। इस पर पत्नी के मृत देह से दोनों किडनी, ह्दय, लीवर, आंखे यहां तक स्कीन भी दान कर दी। वे तो लंग्स और पेन-क्रियाज भी दान करना चाहते थे। पर इन दोनों अंगों से संबंधित कोईमरीज नहीं मिला। जिसे तुरंत ट्रांसप्लांट किया जा सके।

राकेश डोसी बताते है कि उनकी पत्नी अर्चना डोसी को रविवार की सुबह सिर में तेज दर्द हुआ। ब्लड प्रेशर भी बड़ा हुआ था। घर पर ही उपचार हुआ। तबियत ज्यादा बिगडऩे पर शाम करीब सात बजे शहर के निजी अस्पताल में ले जाया गया। जहां डॉक्टर ने बताया कि अर्चना को ब्रेन हेमरेज हुआ है। उनको तुरंत हायर सेंटर पर ले जाए।मात्र 30 मिनट में राकेश एवं परिवारजन अर्चना को मेदांता अस्पताल ले गए। वहां तुरंत अर्चना का उपचार शुरु हुआ।पर स्थिति में सुधार होने के बजाए और बिगड़ती चली गई।मंगलवार की दोपहर डॉक्टरों ने पहला ब्रेन डेड घोषित किया। वहीं शाम को डॉक्टरों ने दूसरा ब्रेन डेड घोषित कर दिया। 42 वर्षीय अर्चना की मृत देह से महत्वपूर्णअंगों को दान करने का निर्णय पति राकेश लिया। इस निर्णय की जानकारी परिवार के अन्य सदस्यों को दी। आखिर में पूरे परिवार ने अंग को दान करने के लिए सहमति दे दी।बाद में इंदौर के मुस्कान गु्रप के सदस्यों से विचार विमर्श किया।और जरूरत मंद मरीजों को अंग ट्रांसप्लांट करने की बात कही।

इंदौर संभागायुक्त संजय दुबे की मौजुदगी में मंगलवार की शाम इंदौर में 23वें ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण कर आर्गन टं्रासप्लांट की तैयारियां हुई । बुधवार प्रात: अर्चना डोसी का ह्दय बारह वर्षो से ह्दय रोग से पीडि़त रोगी को मेदांता अस्पताल में टांसप्लांट किया गया । तत्पश्चात लीवर चोईथराम हॉस्पीटल साढ़े 13 मिनिट में तथा एक किडनी 2.45 मिनिट में बाम्बे हॉस्पीटल तथा दूसरी किडनी 3.40 मिनिट में ग्रेटर कैलाश हॉस्पीटल में ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से पहुंचाई गई । डोसी के दोनों नेत्र एमके इंटरनेशनल आई बैंक ने उत्सारित किए। उनकी त्वचा इंदौर के चोईथराम हॉस्पिटल स्थित स्किन कलेक्शन सेंटर ने संग्रहित की।

आर्गन दान के पश्चात डोसी की पार्थिव देह सायं 5.30 बजे इंदौर से मंदसौर में तुलसीदास गली स्थित आवास पर लाया गया। जहां से अंतिम यात्रा निकली। मुक्तिधाम पर पार्थिव देह को जिनेन्द्र डोसी, राकेश डोसी, विरेन्द्र डोसी तथा रितेश डोसी व पुत्र अमन ने मुखाग्नि दी । मुक्तिधाम पर आयोजित शोकसा में नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार, सकल जैन समाज अध्यक्ष गजेन्द्र हिंगड़, नरेन्द्र अग्रवाल, लोकेश पालीवाल, महेन्द्र चौरडिय़ा, अरूण शर्मा, कमल कोठारी, नरेन्द्र मेहता, विरेन्द्र ंडारी, अजीत नाहर, संजय मुरडिया, शरद धींग, सुनील बंसल सहित अन्य लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। डोसी परिवार ने उठावना रस्म 28 जुलाई शुक्रवार को सायं 4 बजे राजेन्द्र विलास में होगा।

 

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