Breaking News

परिवारों में दिल भरे जाना चाहिए कान नहीं – पं मेहता

मंदसौर। भारत विश्व के देशों से बहुत पीछ है। लेकिन परिवार जो भारत के पास है व किसी देश के पास नहीं है। भारत में भी परिवारों में बिखराव की शुरूआत हो गई है। हमने अमेरिका का मॉडल अपना लिया है। लेकिन जो गलती अमेरिका ने की है वह हम नहीं कर जावें नहीं तो आने वाले 15 वर्षो बाद हमें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। देश में वृक्ष, पर्यावरण जल आदि बचाने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्य हो रहा है। लेकिन हमें अब परिवारों को बचाने के लिए भी आगे आने पड़ैगा।

यह उद्गार जीवन प्रबंधन गुरू पं विजयशंकर मेहता ने कृषि उपज मंडी परिवार द्वारा नपा हॉल में आयोजित एक शाम परिवार के नाम कार्यक्रम में प्रकट किए है। श्री हनुमान चालिसा मंत्र बने का अलख जगाने वाले पं मेहता ने परिवार बचाने के लिए भूषा, भाषा, भोजन व भजन को बचाने का मंत्र देते हुए कहा कि भूषा का आवरण न ओडे़ जीत हट व परम्परा का आवरण ओढ़ने से बचे। परिवारों में प्रेम की भाषा होना चाहिए बैर की नहीं पति पत्नी का रिश्ता खुला रिश्ता है इसमें कोई पर्सनल नहीं होता है। परिवारों में दिल भरे जाना चाहिए, कान नहीं भोजन शाकाहारी होना चाहिए। गलत ढंग से कमाए गए धन से बना भोजन परिवार को अशांत करता है। हमारे घरों में घर के अंदर भी एक ओर घर होता है वह है रसोई घर जो मॉ प्रधान होता है। मॉ रिश्ता नहीं भाव में देखना पड़ता है। रसोईघरों में मात्त्व होना चाहिए। अगर मातृत्व मर गया तो परिवार अशांत हो जाता है।

आपने कहा कि ईश्वर ने स्त्रियों को एक अतिरिक्त अंग प्रदान किया है वह है गर्भाशय जहॉ से करूणा अपनापन और प्रेम प्रकट होता है जो भोजन को अमृत में बदल देता है। भजन के बारे में आपने कहा कि भक्त भगवान के भरोसे है। भक्त का मतलब तेरे भरोसे रहना। मन को कंट्रोल में रखने के लिए ध्यान योग आवश्यक है।

व्याख्यान के प्रारंभ में पं मेहता ने बालाजी के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर पूजा अर्चना की। पं मेहता का स्वागत मंडी अध्यक्ष श्रीमती रमादेवी गुर्जर, प्रदेश भाजपा के महामंत्री बंशीलाल गुर्जर, नपाध्यक्ष प्रहलाद बंधवार, मंडी व्यापारी संघ के अध्यक्ष श्री नाहर, विनोद मेहता, अशोक कुमठ, शिक्षाविद् रमेशचन्द्र चन्द्रे आदि ने किया। इस अवसर पर मडी परिवार द्वारा पं मेहता को शॉल श्रीफल से सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन बृजेश जोशी ने किया पं मेहता का परिचय पत्रकार डॉ घनश्याम बटवाल ने दिया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में नगर के प्रबुद्धजन एवं मातृशक्ति उपस्थित थी।

About The Author

I am Brajesh Arya

Related posts