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पवित्र नगरी में आम नागरिकों की अनदेखी कर नगर के मध्य रिहायशी इलाके में शराब की दुकान का क्या औचित्य – टांक

मन्दसौर। सामाजिक कार्यकर्ता पतंजलि योग संस्थान जिला अध्यक्ष बंसीलाल टाक ने बताया कि चाहे 200 मीटर की परिधि ही क्यों न हो नगर को जब पवित्र नगरी का दर्जा मिल चुका है उस अवस्था में पवित्र नगरी शब्द की लाज रखते हुए शराब की दुकान को नगर के मध्य और वह भी रिहायशी इलाके में जहां बाजू में छात्राओं का एकमात्र उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पास में छबिगृह होने के साथ ही मात्र जीवागंज, जनकुपूरा,नरसिंहपुरा ही नहीं खानपुरा से गांधी चौराहा, होकर हॉस्पिटल, नई आबादी, स्टेशन आदि स्थानों पर जाने के लिए सावरकर पुल से सीधे कालाखेत होकर पैदल आमजनों के लिए और समय की बचत को देखते हुए सीधा सुविधाजनक मार्ग होने से ऐसे सार्वजनिक मार्ग के समीप शराब की दुकान का भला क्या औचित्य है और वह भी जब इस क्षेत्र में शराब की दुकान को 2 साल पहले मोहल्ले की परेशान महिलाओं ने धरना आंदोलन और तालाबंदी कर बंद करवा दिया था और दो ढाई साल बाद पुनः फिर माता बहनों को दुखी होकर वैसा कदम ही नहीं उठाना पड़े बल्कि लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने तक की धमकी देकर दुकान का शटल बन्द करना पड़े तो क्या इसे उचित कहां जा सकेगा।

टांक ने बताया कि रिहायशी इलाका, सार्वजनिक आवागमन मार्ग, एक तरफ पूर्व में छात्राओं का स्कूल, दूसरी तरफ पश्चिम में छात्रों का उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और अन्य विद्यालयों के साथ खेल मैदान इन सबके बीच में शराब की दुकान जिसके लिये खोले जाने तथा बन्द करने का भी कोई नियम नहीं।

एक तरफ सरकार का नारकोटिक्स विंग विभाग लगभग 2 साल से लगातार मध्य निषेध-नशा मुक्ति अभियान छेड़े हुए है और दूसरी तरफ सरकार का ही आबकारी विभाग महिलाएं, छात्र-छात्राओं तथा आमजन की मानसिक परेशानियों को दर किनार करते हुए ऐसी जगह शराब की दुकान संचालित कर रखी है जिससे जनभावनाएं भावनाएं आहत हो रही है।

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