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पशुपतिनाथ की प्रतिमा का संरक्षण करना सबका दायित्व है- पूज्य शंकराचार्य दिव्यानंदजी

मंदिर समिति के निर्णय समयोचित है- मैं भी करूँगा पालन- पूज्य शंकराचार्य दिव्यानंदजी

मंदसौर निप्र। भगवान पशुपतिनाथ की प्रतिमा के संरक्षण के लिए और क्षरण को रोकने की दृष्टि से मंदिर प्रबंध समिति द्वारा जो निर्णय लिए गए है वे समयोचित है। इनका सभी को पालन करना चाहिए। में स्वयं भी इन नियमो का पूरा पालन करूँगा। यह बात भानपुरा पीठ के पूज्य शंकराचार्य स्वामी श्री दिव्यानंदजी महाराज ने मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर ओम प्रकाश श्रीवास्तव से चर्चा करते हुये कही।

आप मनासा से रतलाम जाते समय गुरुवार की शाम कुछ समय के लिए यशोधर्मन हाइवे ट्रीट पर रुके।यहीं कलेक्टर श्रीवास्तव ने आपका पुष्पहारों से स्वागत किया और पशुपतिनाथ मंदिर समिति की और से मंदिर सभागार में शिव तत्व पर व्याख्यान हेतु अनुरोध किया जिसकी स्वीकृति स्वामीजी ने प्रदान की। इसी दौरान वहां पहुँचे पत्रकारों से भी स्वामीजी ने चर्चा की और कहा कि 12 जयोत्रिलिंग में से एक ओकारेश्वर में भी मेरे ही सुझाव पर शिव लिंग का स्पर्श व सीधे अभिषेक को रोका गया है। सोमनाथ, र्त्यम्बकेश्वर, रामेश्वरम में तो गर्भ गृह में प्रवेश निषेध किया गया है। नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में भी यही व्यवस्था है।दक्षिण भारत के मंदिरों में भी गर्भ ग्रह में प्रवेश नही किया जाता और बिजली भी नही जलाई जाती।आपने कहा कि भगवान पशुपतिनाथ की दिव्य विराट प्रतिमा हमारे लिये अमूल्य धरोहर है, युगों-युगों तक इस भव्य प्रतिमा के दर्शन भक्तो को होते रहे इसके लिए आवश्यक है कि हम सभी गर्भ ग्रह की मर्यादा बनाये रखे और समिति के समयोचित निर्णयो का पालन करे।मंदिर समिति ने भगवान की प्रतिमा को केवल पुजारी द्वारा ही स्पर्श करने का जो निर्णय लिया है वह उचित है। यही व्यवस्था होनी चाहिये। इसका में भी पालन करूँगां

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