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पशुपतिनाथ मंदिर के रुद्र यंत्र की चमक हो गई काली

  • दरवाजे, त्रिशूल पर भी लगा जंग, अब कर्मचारियों को सफाई में लगा दिया समिति ने
  • दो साल पहले 1.10 करोड़ की लागत से लगे थे रुद्र यंत्र व चांदी के दरवाजे
  • पशुपतिनाथ मंदिर गर्भगृह में लगा रुद्र यंत्र इस तरह हो गया काला।
  • मंदिर कर्मचारी चांदी के दरवाजों की सफाई कर रहे।

मंदसौर। भगवान श्री पशुपतिनाथ मंदिर गर्भगृह में लगी करीब 1.10 करोड़ की चांदी की चमक बार-बार काली होने से चांदी में मिलावट की आशंका भी बढ़ती जा रही है। गर्भगृह में लगे चांदी के दरवाजों से अब चांदी की परतें भी निकलने लगी है एवं रुध यंत्र भी काला पड़ गया है। जबकि हाल ही में मंदिर प्रबंधन समिति ने चांदी के दरवाजों को साफ करवाया था। इसके बाद दरवाजों से चांदी निकलना शुरू हो गई। करोड़ों की चांदी बार-बार काली होने के पीछे क्या कारण है इसका पता लगाने के लिए प्रबंधन समिति चांदी की जांच भी नहीं करा रही है।

पशुपतिनाथ मंदिर गर्भगृह में साढ़े तीन क्विंटल चांदी का रुध यंत्र एवं 11-11 कि लो चांदी के दरवाजे लगे हुए है। वर्ष 2016 में इनका निर्माण कि या गया। इसके बाद से ही मंदिर में चांदी चमकने की बजाय बार-बार काली हो रही है। जंग भी लगने लगी है। अब चांदी की परते भी निकलने लगी है। नदी प्रतिमा के सामने मंदिर गर्भगृह के मुख्य द्वार से चांदी की परत निकल रही है। जबकि कुछ ही दिन पहले के मिकल से इस दरवाजे को साफ कि या गया था। इसके बाद यह शिकायत सामने आ रही है। लेकि न मंदिर समिति चांदी की जांच नहीं करवा रही है। इस संबंध में सर्‌राफा व्यापारी उमेश पारिख का कहना है कि चांदी बार-बार काली पड़ना एवं उसमें पीलापन होना मिलावट का संके त हो सकता है। जांच में ही पता चल सकता है। वहीं मंदिर प्रबंधक राहुल रुनवाल चांदी काली पड़ने के कारणों को वातावरण में नमी ही मान रहे है।

पशुपतिनाथ मंदिर के गर्भगृह में चांदी का रुद्र यंत्र दरवाजे, त्रिशूल आदि लगाए गए थे। इन सब पर करीब 800 किलो चांदी लगी थी। सितंबर-2016 में रुद्र यंत्र लगाते समय ही चांदी काली होने लगी थी। रुद्र यंत्र लगने के पश्चात पहली बार फरवरी-2017 में मंदिर प्रबंध समिति ने ठेकेदार विपिन शर्मा से रुद्र यंत्र की सफाई करवाई थी एवं शपथ पत्र भी लिया। ठेकेदार ने चांदी काली होने का कारण गर्भगृह में कपूर, अगरबत्ती के धुएं एवं नमी को कारण बता दिया और हर माह सफाई की जिम्मेदारी ली थी। सफाई के कुछ माह बाद ही चांदी फिर काली हो गई। रुद्र यंत्र से लेकर दरवाजे, त्रिशूल आदि काले होने लगे। लेकिन फिर भी बाद ठेकेदार ने सफाई नहीं की और मंदिर प्रबंध समिति ने भी ठेकेदार को याद नहीं दिलाई। चांदी की चमक पर काली परत जमती रही। बाद में जून 2017 में श्रावण माह से पहले 6 हजार रुपए खर्च कर प्रबंध समिति ने दरवाजे और त्रिशूल की सफाई करवाई थी। रुद्र यंत्र को साफ नहीं किया गया। आरती मंडलों एवं मंदिर पर आने वाले भक्तों ने रुद्र यंत्र, दरवाजों व चांदी की अन्य वस्तुओं की सफाई के लिए मौखिक शिकायत की तो मंदिर प्रबंध समिति ने 5 दिसंबर 2017 को निविदा जारी कर टेंडर मंगवाए, लेकिन तय समय में एक भी टेंडर नहीं आया। इसके कारण रुद्र यंत्र की सफाई अटक गई। दो माह पहले समिति ने सोने-चांदी के आभूषण बनाने वाले कर्मचारियों को भी रुद्र यंत्र एवं दरवाजे दिखाए थे, लेकिन सफाई की बात नहीं बन पाई। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद दरवाजो की मंदिर के कर्मचारी ही कर रहे हैं। हालांकि इस तरह ही हर बार केमिकल से सफाई होती है और एक-दो माह में ही चांदी फिर काली होने लगती है। रुद्र यंत्र पर काली परत जमी हुई है, पीला भी हो रहा है। मंदिर गर्भगृह में 800 किलो चांदी से बने रुद्र यंत्र, त्रिशूल, दरवाजे आदि बार-बार काले हो जाने और ठेकेदार द्वारा हर माह सफाई की जिम्मेदारी नहीं निभाई जाने का जवाब प्रबंध समिति के पास भी नहीं है।

रुद्र यंत्र सहित मंदिर गर्भगृह में चांदी से बने त्रिशूल, चारों दरवाजों, सर्प आदि काले हो गए हैं। अभी कर्मचारियों से दरवाजों की सफाई करवाई जा रही है, उसके बाद रुद्र यंत्र की सफाई भी की जाएगी। मंदिर नदी तट पर होने से नमी बनी रहती है, स्वाभाविक है नमी के कारण चांदी काली पड़ती है।

-राहुल रुनवाल, प्रबंधक, पशुपतिनाथ मंदिर समिति

 

– चांदी बार-बार काली होने तथा पीलापन होना मिलावट का संकेत ही है। पशुपतिनाथ मंदिर गर्भगृह में लगी चांदी भी बार-बार काली हो रही है, इसमें कहीं मिलावट तो नहीं है। इसके लिए मंदिर समिति जांच करवा सकती है। चांदी में कभी जंग भी नहीं लगता है।

-उमेश पारिख, सचिव, सराफा व्यापारी संघ

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