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पशुपतिनाथ मंदिर के संपूर्ण परिसर में प्राप्त वास्तु दोष का जल्द से जल्द निवारण कराया जायेगा

श्री पशुपतिनाथ मंदिर प्रबंधन समिति की बैठक सम्पन्न, बैठक में कुल 6 एजेन्डा बिन्दुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। जिसमें मंदिर परिसर में वास्तु के अनुरूप कार्य करने के संबंध में प्राप्त वास्तुशास्त्री की रिपोर्ट पर चर्चा, मंदिर गर्भगृह में चांदी की जलाधारी बनाने के संबंध में निविदा में प्राप्त मजदूरी की दर का निर्धारण, मंदिर परिसर की व्यापक साफ-सफाई हेतु सफाई मशीन खरीदने, परिसर में स्थित दिवस बसेरा में यात्रियों एवं आसपास के नागरिकों के लिए निशुल्क चिकित्सा सेवा प्रारंभ करने, मंदिर समिति की ओर से नियुक्त और मंदिर में कार्यरत कर्मचारियों को अवकाश देने एवं मंदिर से निकलने वाले फूलों की खाद बनाने के संबंध में विस्तार सें चर्चा की गई एवं समुचित निर्णय लिये गये।
मंदिर परिसर में वास्तु के अनुरूप कार्य करने के संबंध में वास्तु विशेषज्ञ श्री योगेश गोयल द्वारा मंदिर का स्थल निरीक्षण किया। निरीक्षण के पश्चात मंदिर परिसर में कुछ आवश्यक सुधार करने के संबंध में अपनी रिपोर्ट तैयार कर कार्यालय को प्रस्तुत की गई। इस पर कलेक्टर श्री सिंह ने समिति के सभी सदस्यों को वास्तु शास्त्री के साथ मंदिर परिसर का मुआयना करने, तत्पश्चात दोष निवारण के उपाय प्रारंभ करने को कहा। कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि वास्तुदोष का निवारण कम से कम समय में और मंदिर में कम से कम टूट-फूट के साथ किया जाये। मूर्तिक्षरण को रोकने के लिये इस पर वज्र लेपन कराने पर भी विचार किया गया। इस विषय पर नासिक से आये शिल्पकारों ने अपना प्रेजेन्टेशन दिया। मंदिर गर्भगृह में चांदी की जलाधारी बनाने के संबंध मे निविदा में प्राप्त मजदुरी दर के मामले में बाफना ज्वेर्ल्स प्रा.लि. नासिक (महाराष्ट्र) ने 2800 प्रतिकिलो पर कार्य करने की सहमति दी है। फर्मो के पंजीयन चाये गये थे, परन्तु केवल 2 फर्मो बाफना ज्वेल्स प्रा.लि. नासिक महाराष्ट्र एवं हेमश्री ज्वेर्ल्स मंदसौर के ही पंजीयन प्राप्त हुए। इस पर कलेक्टर ने निविदाकर्ता श्री बाफना ज्वेर्ल्स से निगोशियेशन करने को कहा। मंदिर परिसर मे साफ-सफाई हेतु सफाई मशीन खरीदने पर सहमति बनी।
मंदिर परिसर स्थित दिवस बसेरा में यात्रियों एवं आसपास के नागरिको हेतु निःशुल्क चिकित्सा सेवा प्रारंभ करने के संबंध में विज्ञापन निकालकर किसी चिकित्सक द्वारा निःशुल्क सेवा लेने पर सहमति व्यक्त की गई। मंदिर में कार्यरत कर्मचारियों को साल में 13 आकस्मिक अवकाश और दो एच्छिक अवकाश दिये जाने का निर्णय लिया गया। मंदिर से निकलने वाले फूलों की खाद बनाने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई। अंतिम निर्णय अगली बैठक में लिये जाने पर सहमति बनी। मंदिर की पूर्व कर्मचारी श्रीमती मगनबाई का प्रकरण न्यायालय मंदसौर में प्रचलित है। इस पर अंतिम निर्णय के लिये समिति सचिव को अधिकृत किया गया। बैठक में मौजूद अन्य समिति सदस्यों ने भी अपने सुझाव रखे।

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