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पश्चिमी देश हमारे देश की संस्कृति को बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं – श्री अरूण जी जैन

मन्दसौर निप्र। अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा द्वारा आयोजित तीन दिवसीय तेरवें राष्ट्रीय अधिवेशन एवं राष्ट्रीय वाल्मीकि प्रतिनिधि सम्मेलन के तीसरे दिन समापन सत्र दोपहर बाद शुरु हुआ जिस में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचारक श्री अरुण जी जैन थे। अध्यक्षता वाल्मीकि महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरदयाल सिंह विश्नार ने की विशिष्ट अतिथि के रुप में विजय हंस पंजाब, सफाई कर्मचारी आयोग राजस्थान के अध्यक्ष गोपाल पचेरवाल ,जिला उपाध्यक्ष भाजपा मंदसोर के राजेंद्र सुराणा ने की। इस समापन सत्र में जिला प्रभारी मंत्री अर्चना चिटनीस, सांसद सुधीर गुप्ता, विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया, पूर्व मंत्री व विधायक जगदीश देवड़ा, जिला पंचायत अध्यक्ष , जिला कार्यवाह दशरथ झाला, विभाग संपर्क प्रमुख श्याम चौधरी, विभाग धर्म जागरण युवराज चौहान, जिला सामाजिक समरसता प्रमुख जितेंद्र गहलोत, भाजपा जिलाध्यक्ष देवीलाल धाकड़ उपस्थित रहे। राष्ट्रीय वाल्मीकि महासभा के सह सचिव जीवन गोसर को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया । विशिष्ट अतिथि विजय हंस ी ने पंजाब में वाल्मीकि समाज को 50 प्रतिशत आरक्षण है इस कारण विभिन्न उच्च पदों पर वाल्मीकि समाज के लोग है मैं चाहता हूं कि कुछ ऐसी ही व्यवस्था अन्य राज्यों में भी हो।

श्री अरुण जी भाई साहब ने अपने विचार रखते हुए कहा अंबेडकर को पढ़ते हुए मुझे पता चला कि मुगल जब इस देश में आए तब अपने शरीर को मुगलों से बचाने के लिए परास्त हुए राजाओं की रानियों ने अपने आपका दहन कर दिया। तब पहलीबार इस अछूत शब्द का प्रयोग हुआ था कि हम अपने शरीर को इन मुगलों को नहीं छूने देंगे । चाहे अपने शरीर को दहन कर देंगें। उन्होंने सामाजिक समरसता पर बहुत उच्च स्तर का उद्बोधन दिया और कई उदाहरण देकर यह बताया कि पश्चिमी देश हमारे देश की संस्कृति को बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं उन्होंने ऐसा सोच लिया है कि जरूरी नहीं है कि हिंदुस्तान के हिंदू इसाई बने । उनको संस्कार व व्यवहार से हम इसाई बना सकते हैं। उनका धर्म हिंदू होगा लेकिन वैचारिक रूप से व्यवहारिक रूप से यह ईसाई हो जाएंगे । अंग्रेजो ने पंजाब में खालसा कॉलेज की स्थापना की जिसके पीछे भी उनके कोई नेक इरादे नहीं थे । उसके बाद उन्होंने अलीगढ़ में मुस्लिम कालेज की स्थापना में अंग्रेजों ने अपने पैसे लगा कर कि उसके पीछे भी उनके इरादे कोई नेक नहीं थे ।

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