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पहाड़ व धरातल

पहाड़-

जिले का अधिकांश भाग मैदानी है। उत्तरपूर्व में अरावली पर्वत की पहाड़ियाँ हैं। ऐसी पहाड़ियाँ जिले के पश्चिमी-उत्तरी कोने पर है। ये पहाड़ियाँ मध्‍यप्रदेश व राजस्‍थान की सीमा बनाती है उत्तर-पूर्व की पहाड़ियों में कई विशाल प्राकृतिक गुफाएँ बनी हैं। इन गुफाओं में आदि मानव के निवास के प्रमाण मिल हैं। कई गुफाओं में आदि मानव के द्वारा गनाए चित्र मिले हैं। ये चित्र गुफाओं की चट्टानों (शैल) पर बने हैं। अत: ये शैलचित्र कहलाते हैं।
जिले के पूर्वी भाग में कुछ पहाड़ी क्षेत्र लाल मिट्टी से निर्मित चट्टानों का है। इसमें गेलाना, घसोई, धर्मराजेश्‍वर, पोलाडूंगर, खेजड़ियाभूप, धानखेड़ी के पहाड़ प्रमुख है। लाल मिट्टी की चट्टानों वाले इन पहाड़ों में कलात्‍मक खुदाई का काम आसानी से हो सकता है। सैंकड़ों वर्ष पहले राजाओं ने इन पहाड़ों को खुदवाकर इनमें बौद्ध धर्म से सम्‍बन्धित चैत्‍य (पूजा घर) विहार (बौद्ध भिक्षुओं के निवास हेतु कक्ष) स्‍तूप (बौद्ध धर्म का पवित्र प्रतीक) का निर्माण कराया। इन गुफाओं को शैलोत्‍कीर्ण गुफाएँ कहते हैं।
पहाड़ों को काटकर मंदिर निर्माण की प्राचीन परम्‍परा रही है। ऐसे मंदिर एलोरा (महाराष्‍ट्र), महाबलिपुरम् (आंध्र प्रदेश) व मसरूर (हिमाचल प्रदेश) इन तीन स्‍थानों पर हैं। भारत का चौथा शैलोत्‍कीर्ण मंदिर म.प्र. के मन्‍दसौर जिले की गरोठ तहसील में चंदवासा के समीप धर्मराजेश्‍वर में हैं। मन्‍दसौर जिले के पश्चिमी-उत्तरी कोने पर स्थित पहाड़ियाँ बिनोटा शैल (स्‍लेट पत्‍थर) की है। इन्‍हें खोदकर स्‍लेट पत्‍थर निकाला जाता है।

धरातल –

धरातल का शाब्दिक अर्थ है – पृथ्‍वी की ऊपरी बनावट यह एक जैसी नहीं होती है। मन्‍दसौर जिला मालवा के पठार के उत्तरी भाग में है। इसके उत्तरी-पूर्वी भाग में अरावली की पर्वत श्रेणियाँ फैली है। दक्षिण-पूर्वी सीमा से शामगढ़ (467 मी.), धमनार (486 मी.), दक्षिण में लदूना से ऐरिआ व बर्डिया (सीतामऊ से पश्चिम) और जमुनिया मीना (414.4 मी.) से कलवा (451.7 मी.), तक फैली है। ये पहाड़िया रेवास देवड़ा (555.55 मी.) से नीमच जिले के जलेरी महादेव (555.6 मी.), तक पश्चिम में भी फैली है।
जिले में पुराण महाकल्‍पी शैलों के समूह तथा विन्‍धसमूह की शैलें (चट्टानें) मिलती हैं। इनमें कुडप्‍पा काल की शैलें चम्‍बल नदीं क्षेत्र में मिलती हैं। विन्‍ध्‍य समूह की शैलें जिले के पश्चिम में पाई जाती है। इसके सिवाय लावा निर्मित अतिनूतन चट्टानें भी मिलती है।