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पानी के कुछ प्रयोग

पानी के इस प्रयोग से कुछ ही दिन में जग जाता है भाग्य

1. किस्मत: कहते हैं किस्मत हर किसी पर मेहरबान नहीं होती, लेकिन जिस पर होती है उसे फिर पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं होती।
2. भाग्य: बहुत से लोगों को लगता है कि उनकी किस्मत उनका साथ नहीं देती, यकीन मानिए अगर आप भी इसी श्रेणी में आते हैं तो आप अकेले नहीं हैं। अकसर लोगों को यही लगता है कि उनका भाग्य उनके साथ नहीं है।
3. मेहनत और ईमानदारी: सफलता पाने के लिए मेहनत और ईमानदारी का साथ बहुत जरूरी है लेकिन अगर पूरी मेहनत और लगन के बावजूद सफलता प्राप्त नहीं हो पा रही है तो इसके लिए कुछ शास्त्रीय उपाय हैं जो आपकी इस समस्या का समाधान कर सकते हैं।
4. ज्योतिष शास्त्र: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर व्यक्ति की कुंडली में बैठे ग्रह उसका साथ नहीं दे रहे हैं तो निश्चित तौर पर व्यक्ति की परेशानी लाजमी है।
5. अशुभ प्रभाव: अशुभ प्रभाव वाले ग्रहों को नियंत्रित कर या उन्हें प्रसन्न करना बहुत जरूरी है, ताकि बुरे परिणामों से बचा सके।
6. कुंडली: कुंडली में बैठे ग्रहों के दुष्प्रभाव को टालने के लिए ज्योतिष शास्त्र में उपाय मौजूद हैं जो वाकई कारगर हैं।
7. बर्तन में पानी: रात को सोते समय एक बर्तन में पानी भरकर उसे अपने बिस्तर के पास रख दें। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर वह पानी बाहर फेंक दें।
8. शिवलिंग: इसके अलावा प्रतिदिन शिवलिंग पर दूध और जल से अभिषेक करें।
9. ईर्ष्या: अपने मन में किसी के लिए भी ईर्ष्या का भाव ना रखें और ना ही किसी को दुखी करें।

सेहत के लिए अमृत है घड़े का पानी

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गरीबों का फ्रिज घड़े का पानी स्‍वास्‍थ्‍य के लिहाज से अमृत होता है, लेकिन इसे ऐसे ही अमृत नहीं बोलते, बल्कि वास्‍तव में घड़े का पानी सेहत के लिहाज से बहुत फायदेमंद है, इसके फायदों को जानकर घड़े का पानी पीना शुरू कर देंगे आप।

1:- अमृत है घड़े का पानी: पीढ़ियों से, भारतीय घरों में पानी स्‍टोर करने के लिए मिट्टी के बर्तन यानी घड़े का इस्तेमाल किया जाता है। आज भी कुछ लोग ऐसे हैं जो इन्हीं मिट्टी से बने बर्तनो में पानी पीते है। ऐसे लोगों का मानना है कि मिट्टी की भीनी-भीनी खुशबू के कारण घड़े का पानी पीने का आनंद और इसका लाभ अलग है। दरअसल, मिट्टी में कई प्रकार के रोगों से लड़ने की क्षमता पाई जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार मिट्टी के बर्तनों में पानी रखा जाए, तो उसमें मिट्टी के गुण आ जाते हैं। इसलिए घड़े में रखा पानी हमें स्वस्थ बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
2:- चयापचय को बढ़ावा: नियमित रूप से घड़े का पानी पीने से प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद मिलती है। प्‍लास्टिक की बोतलों में पानी स्‍टोर करने से, उसमें प्‍लास्टिक से अशुद्धियां इकट्ठी हो जाती है और वह पानी को अशुद्ध कर देता है। साथ ही यह भी पाया गया है कि घड़े में पानी स्‍टोर करने से शरीर में टेस्‍टोस्‍टेरोन का स्‍तर बढ़ जाता है।
3:- पानी में पीएच का संतुलन: घड़े का पानी पीने का एक और लाभ यह भी है कि इसमें मिट्टी में क्षारीय गुण विद्यमान होते है। क्षारीय पानी की अम्लता के साथ प्रभावित होकर, उचित पीएच संतुलन प्रदान करता है। इस पानी को पीने से एसिडिटी पर अंकुश लगाने और पेट के दर्द से राहत प्रदान पाने में मदद मिलती हैं।
4:- गले को ठीक रखे: आमतौर पर हमें गर्मियों में ठंडा पानी पीने की तलब होती है और हम फिज्र से ठंडा पानी ले कर पीते हैं। ठंडा पानी हम पी तो लेते हैं लेकिन बहुत ज्‍यादा ठंडा होने के कारण यह गले और शरीर के अंगों को एक दम से ठंडा कर शरीर पर बहुत बुरा प्रभावित करता है। गले की कोशिकाओं का ताप अचानक गिर जाता है जिस कारण व्याधियां उत्पन्न होती है। गले का पकने और ग्रंथियों में सूजन आने लगती है और शुरू होता है शरीर की क्रियाओं का बिगड़ना। जबकि घडें को पानी गले पर सूदिंग प्रभाव देता है।
5:- गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद: गर्भवती को फ्रिज में रखे, बेहद ठंडे पानी को पीने की सलाह नहीं दी जाती। उनसे कहा जाता है कि वे घड़े या सुराही का पानी पिएं। इनमें रखा पानी न सिर्फ उनकी सेहत के लिए अच्‍छा होता है, बल्कि पानी में मिट्टी का सौंधापन बस जाने के कारण गर्भवती को बहुत अच्‍छा लगता है।
6:- वात को नियंत्रित करे: गर्मियों में लोग फ्रिज का या बर्फ का पानी पीते है, इसकी तासीर गर्म होती है। यह वात भी बढाता है। बर्फीला पानी पीने से कब्ज हो जाती है तथा अक्सर गला खराब हो जाता है। मटके का पानी बहुत अधिक ठंडा ना होने से वात नहीं बढाता, इसका पानी संतुष्टि देता है। मटके को रंगने के लिए गेरू का इस्तेमाल होता है जो गर्मी में शीतलता प्रदान करता है। मटके के पानी से कब्ज ,गला ख़राब होना आदि रोग नहीं होते।
7:- विषैले पदार्थ सोखने की शक्ति: मिटटी में शुद्धि करने का गुण होता है यह सभी विषैले पदार्थ सोख लेती है तथा पानी में सभी जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व मिलाती है। इसमें पानी सही तापमान पर रहता है, ना बहुत अधिक ठंडा ना गर्म।
8:- कैसे ठंडा रहता है पानी: मिट्टी के बने मटके में सूक्ष्म छिद्र होते हैं। ये छिद्र इतने सूक्ष्म होते हैं कि इन्हें नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता। पानी का ठंडा होना वाष्पीकरण की क्रिया पर निर्भर करता है। जितना ज्यादा वाष्पीकरण होगा, उतना ही ज्यादा पानी भी ठंडा होगा। इन सूक्ष्म छिद्रों द्वारा मटके का पानी बाहर निकलता रहता है। गर्मी के कारण पानी वाष्प बन कर उड़ जाता है। वाष्प बनने के लिए गर्मी यह मटके के पानी से लेता है। इस पूरी प्रक्रिया में मटके का तापमान कम हो जाता है और पानी ठंडा रहता है।

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