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पार्षद बताये उनका विज़न क्या है :  नाहटा 

पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा ने विश्वास व्यक्त किया है की राज्य शासन शीघ्र अध्यक्ष मनोनीत करेगा।   परन्तु यह मान लेना कि केवल अध्यक्ष मनोनीत हो जाने से शहर का विकास हो जाएगा , सही नहीं होगा। इस तथ्य पर कोई विवाद नहीं हो सकता है की निर्वाचित अध्यक्ष और पार्षद होने के बावजूद शहर में समस्याएं पैदा  हुई है।

श्री नाहटा ने नगरपालिका के दोनो पक्षों के पार्षदों से निवेदन किया है कि अपने वार्ड के विकास कार्यों  अवश्य प्रयास करें परन्तु समूचे शहर की बढ़ती समस्याओं की तरफ भी ध्यान दें |

पार्षद गण  इस बात  से इंकार नहीं कर सकते की शहर के अवैध निर्माण और नामांतरण , निर्माण कार्यों की अनुमति में होने वाले भ्रष्टाचार , अतिक्रमण, और ट्रैफिक जैसी समस्याओं के लिए वे भी सामान रूप से जिम्मेदार हैं | पहले काला  भाटा   और अब चम्बल से पानी लाने की योजना में जिस तरह जन धन का दुरुपयोग हुआ है उसकी लड़ाई तो पार्षदों को ही लड़ना थी।   यह एक आम जनधारणा  है कि पिछले वर्षों में सभी पक्षों को तुष्ट करके नगर पालिका संचालित करने  की नीति ने अनेक समस्याये पैदा की है।  शहर का स्वरुप बिगड़ा है तथा आम नागरिक को परेशानियों का सामना करना पड़ा है | आखिर उनके होते हुए वर्षों पूर्व हुए बर्मा शेल पेट्रोल पंप की जमीन पर हुए  कब्जे  के लिये के उत्तरदायित्व से बच नहीं सकते हैं |  नगर पालिका के  ठेको को लेकर जन  चर्चाये क्यों रही ? अमृत योजना के अंतर्गत जन शिकायत निवारण के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था  का प्रावधान था।  वह आज तक क्यों नहीं बन पाई।   क्यों नहीं  ऑन लाइन जैसी सुविधाएं निर्माण , नल कनेक्शन , राशन कार्ड इत्यादि केलिए नहीं बन पाई।  पशुपतिनाथ मेले को लेकर किस तरह के विवाद होते रहे। डॉ  मनमोहन सिंह के के प्रधान मंत्री काल में नगर के  विकास के  लिए  लिए जो लाखो रूपये लगा कर प्लान बनाया गया था उसका क्या हुआ ?

मंदसौर एक सुव्यवस्थित शहर था।   पहली कॉलोनी नई  आबादी बनी।  आज भी इस शहर में उससे बेहतर कॉलोनी नहीं है।   बाद के वर्षो में जिस तरह शहर  का बेतरतीब विस्तार हुआ, उसने  शहर के स्वरुप को ही बर्बाद कर दिया है।   परिषद्  नागरिको से ज्यादा कुछ बड़े लोगो केलिए काम करती रही।  आवश्यकता है कि पार्षद गण इस शहर को यदि अमृत या स्मार्ट शहर नहीं बना सके तो कम से कम ऐसा शहर तो बना दे जहा आम नागरिक की कठिनाइयाँ कम हो सके।

यह भी आवश्यक है परिषद् के सदस्य बजाय समितियों के सभापति पद और दूसरे हितों के लिए संघर्ष करने के स्थान पर मंदसौर को एक आधुनिक शहर बनाने के लिए अपना विज़न जनता के समक्ष प्रस्तुत करें और क्रियान्वित करवायें |

पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा ने मुख्यमंत्री जी को पत्र लिख कर आग्रह किया है कि मंदसौर के कांग्रेस पक्ष के पार्षदों का निवेदन स्वीकार कर अध्यक्ष मनोनीत करें |

नाहटा ने आग्रह किया है कि पिछले वर्षों में शहर का विस्तार नगरपालिका की सीमाओं के बाहर तक हुआ है | नगर की सीमा से जुड़े अनेक ग्राम अब शहर का हिस्सा बन चुके हैं | परन्तु न.पा. का सीमा का विस्तार नहीं होने से उन इन ग्रामों के शहरीकरण पर नियंत्रण भी नहीं हो सका और शहर की नागरिक सुविधाओं पर बोझा बढ़ा है | नाहटा ने नये  कहा शीघ्र  परिसीमन  होना चाहिये |

नाहटा ने आग्रह किया है की न.पा. जल आवर्धन योजना के डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क कार्य की वित्तीय स्वीकृति जारी होना है | शहर का मास्टरप्लान 2003 से 2011 के कार्यकाल के लिए बना था | इसका लाभ उठा कर अनेक व्यक्तियों ने विभाग की मिली भगत से भू उपयोग कर  बदलवाया |

यश नगर जैसे अनेक क्षेत्र है जहा ग्रीन बेल्ट के निर्माण कार्य होते रहे और अब राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल ने रोक दिए हैं जिसके  कारण  प्लाट धारी कष्ट में आगये हैं |

श्री नाहटा ने कहा  कि चम्बल जलाशय से मंदसौर शहर को जल आपूर्ति करने का प्रोजेक्ट भी अधिकारियों और कतिपय जनप्रतिनिधियों की गलती से पूरा नहीं हो पाया है. जिस  तरह काला भाटा  बाँध का प्रोजेक्ट अपने उद्देश्यों में सफल नहीं हो सका , लगभग वही स्थिति इस प्रोजेक्ट की भी है. ड र है की राज्य शासन  का करोडो रुपया व्यर्थ नहीं हो जाए और मंदसौर शहर सुविधाओं से वंचित हो जाए।

श्री नाहटा ने कहा कि  पिछली कांग्रेस सरकार के द्वारा मंदसौर में फ़ूड प्रोसेस पार्क का निर्माण किया गया था।  लेकिन जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के कारण पूरी तरह से बना हुआ प्रोजेक्ट बर्बाद कर दिया गया।   वर्ष २०१८ में जब राहुल गांधी जी मंदसौर आये थे तब   उनने मंदसौर में छोटे उद्योगों को प्रोत्साहन देने की बात कही थी.  मंदसौर कृषि क्षेत्र में अग्रणी जिला है।  आवश्यकता है कि इस जिले को एक नया फ़ूड प्रोसेस पार्क स्वीकृत किया जाए।

श्री नाहटा ने कहा की मंदसौर शहर में भू माफिया  और जन प्रतिनिधियों द्वारा मिल कर अनेक अवैधानिक कार्य  गए।   कुछ में जांच के आदेश तो पिछली सरकार ने ही दे दिए थे. परन्तु  स्थानीय प्रशासन ने जांच नहीं की।   अब आवश्यकता है की उन सब प्रकरणों में जांच कर दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध कार्यवाही की जाए.

श्री नाहटा ने कहा पिछले वर्षों में नगरपालिका की भूमि पर अवैध कब्जों से लगा कर अवैध नामांतरण , निर्माण होते रहे हैं | भ्रष्टाचार चलता रहे इसी कार्बन अमृत योजना का हिस्सा होने के बावजूद निर्माण कार्य एवं जन  शिकायत  जैसे कार्यो के लिए ऑन  लाइन व्यवस्था  कायम नहीं हो सकी।   आवश्यकता हैं कि दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध कार्यवाही हो तथा भविष्य के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था कायम हो |

श्री नाहटा ने विश्वास व्यक्त किया की शीघ्र कार्यवाही होगी।

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