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पीजी कालेज मंदसौर बना नकचीयों का अड्डा

पीजी काॅलेज में अभी सेमेस्टर परीक्षा के नकल करने वाालों का पकड़ा जाना मानों आम बात हो गई है। इस दौरान 9 दिन में 30 नकलची पकड़े गए हैं। कॉलेज की तीन फ्लाइंग स्कवॉड ने गुरुवार को 6 विद्यार्थियों को नकल करते पकड़ा। इनसे नकल के लिए नकल लाई गई किताबों की फोटोकॉपियां जब्त की गईं। कॉलेज प्रशासन ने नकलचियों की रिपोर्ट यूनिवर्सिटी भेज दी है। मई-जून में हुई सेमेस्टर परीक्षा के दौरान भी यहां 54 केस बने थे।

विक्रम यूनिवर्सिटी की स्नातक-स्नातकोत्तर की पहले, तीसरे व पांचवें सेमेस्टर की परीक्षा 30 नवंबर को शुरू हुई थी। पहले दिन नकल का 1 केस बना। इसके बाद 6 दिसंबर को 12 व 7 दिसंबर को 5 नकलची पकड़े गए। 8 दिसंबर को तीन पारियों में साइंस, आर्ट्स व कॉमर्स की परीक्षा के दौरान नकल के 6 केस बने। इनमें से 2 केस सुबह 7 से 10 बजे के दौरान, 3 सुबह 11 से दाेपहर 2 बजे और 1 केस दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक चली परीक्षा के दौरान बना। नकलचियों ने उत्तरपुस्तिकाओं के बीच में विषय की किताबों की फोटोकॉपियां छिपा रखीं थी और उनसे नकल कर रहे थे। केंद्राध्यक्ष डॉ. आर. के. बाकलीवाल ने बताया छात्र फोटोकॉपीयर पेज में विषय संबंधी सामग्री लेकर आते हैं। परीक्षा प्रारंभ होने के 15 मिनट तक तो ये अलर्ट रहते हैं। फ्लाइंग स्क्वॉड इसके बाद ही कार्रवाई करते हैं।

पीजी कॉलेज प्रभारी प्राचार्य डॉ. बी. आर. नलवाया ने बताया केंद्राध्यक्ष के साथ मैं खुद रोज हर पाली में चैकिंग टीमों के साथ जाता हूं। पहले दिन से सख्ती बरत रहे हैं। इसी से नकल के 30 केस बने। इनमें से 6 केस गुरुवार को ही बने। कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। इसी से नकलचियों को सबक मिलेगा।

केंद्राध्यक्ष के साथ स्टूडेंट की खुद भी चैकिंग कर रहा हूं
नकल मामले में यूनिवर्सिटी के नियम सख्त हैं। केस बनने पर पूरा साल खराब होता है। उक्त विषय का रिजल्ट रोक दिया जाता है। रेगुलर छात्र नकल करते पकड़े जाने पर वह अगली परीक्षा में प्राइवेट के रूप में ही शामिल हो सकता है। पिछले सेमेस्टर में बने 54 नकल प्रकरणों में से 35 विक्रम यूनिवर्सिटी से जुड़े थे जबकि 19 भोजमुक्त यूनिवर्सिटी की परीक्षाओं से संबंधित थे। इस बार अभी सिर्फ विक्रम यूनिवर्सिटी के पेपर ही हो रहे हैं।

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