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पेपरलेस ट्रेजरी की दिशा में बडा कदम

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पेपरलेस ट्रेजरी की दिशा में लिए गये इस एक और बडे कदम के बारे में जारी इस नये आदेश के परिपालन में कलेक्टर श्री स्वतंत्र कुमार सिंह ने मंदसौर जिले के सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (डीडीओ) को कोष एवं लेखा के नये आदेश के संदर्भ में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किये हैं। जारी दिशा-निर्देशों में उन्होने कहा है कि वित्त विभाग द्वारा प्रथम चरण में ऐसे देयक, जो सी-एसएमएफएस की स्लिम सुविधा से इलेक्ट्रानिक जनरेट होते हैं, को एक अक्टूबर से कोषालय में प्रस्तुत करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। अतः सभी डीडीओ इस संबंध में वित्त विभाग के निर्देशों का कडाई से पालन करें।
इस बारे में अधिक जानकारी देते हुये जिला कोषालय अधिकारी श्री बृजमोहन सुरावत ने आज बताया कि एफव्हीसी देयक के साथ वित्त विभाग द्वारा पूर्व में ही 20000 रूपये के उपप्रमाणक (सब व्हाउचर) लगाने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। अतः ऐसे एफव्हीसी देयक, जिनके साथ 20000 रूपये से अधिक राशि के उपप्रमाणक नही हों, उन्हें कोषालय में प्रस्तुत नही करना है। केवल 20000 रूपये से अधिक राशि के उपप्रमाणक वाले एफव्हीसी देयक ही कोषालय में प्रस्तुत करना है। उन्होने सभी डीडीओ से अनुरोध किया है कि वे 20000 रूपये तक के एफव्हीसी एवं 20000 रूपये से अधिक उपप्रमाणक वाले एफव्हीसी देयक पृथक-पृथक बनायें और कोषालय एवं उप कोषालय में केवल ऐसे ही एफव्हीसी देयक प्रस्तुत करें, जिनके साथ 20000 रूपये से अधिक वाले उपप्रमाणक संलग्न हों। उन्होने बताया कि चूंकि कोषालय में स्लिम से जनरेट देयक नही भेजे जाना हैं, अतः परीक्षण हेतु आवश्यक स्वीकृतियॉ जरूरी होंगी, जो कि पहले देयक के साथ लगा दी जाती थीं। म.प्र. कोषालय संहिता भाग-1 के सहायक नियम 310ध्311 के अनुसार स्वीकृति की केवल कोषालय प्रति ही कोषालय को भेजी जाये एवं स्वीकृति की महालेखाकार की प्रति डाक से सीधे महालेखाकार को प्रेषित करें, कोषालय न भेंजे। इसी प्रकार पहले कोषालय स्तर पर देयक प्राप्त होने पर पारित करने के पूर्व परीक्षण कर लेखाशीर्ष आदि में सुधार कर/करा दिये जाते थे, परन्तु अब चूंकि जनरेट होने वाले देयक कोषालय में प्रस्तुत नही करना है, अतः अब राशि एवं लेखा शीर्ष काम्बीनेशन सही हो एवं उसी लेखाशीर्ष काम्बीनेशन में जनरेशन हो जिससे उस देयक का आहरण किया जाना है। देयक में अंतरण बाय ट्रांसपफर द्वारा जाने वाली राशि यथा जीपीएफ, जीआईएस, पीटी आदि उसी प्राप्ति के लेखाशीर्ष में ही हो, जिनमें उन्हें अन्तरण किया जाना है, अन्यथा अन्तरण द्वारा जमा राशियों का लेखांकन त्रुटिपूर्ण हो जायेगा। अभी नवीन व्यवस्था प्रारंभ हुई है अतः इस माह दो प्रतियां ही देयक की तैयार कर रखे एक कार्यालय प्रति एवं एक मूलप्रति आवश्यकता पर कोषालय द्वारा दूसरी प्रति परीक्षण हेतु बुलाई जा सकती है। चूंकि स्वीकृति की कोषालय प्रति देखकर ही जनरेट देयक पारित करना होगा अतः जनरेट करते समय कम्प्यूटर के सी-एसएमएफएस में स्वीकृति का सही क्रमांक ’दिनांक दर्ज किया जाये। प्रतिदिन जनरेट किये गये देयकों की एक सूची (जिसकी भौतिक प्रति नही भेजी जा रही है), ऐसे देयकों की कार्यालय प्रति से मिलान कर आहरण संवितरण अधिकारी के हस्ताक्षर से दो प्रतियों में प्रतिदिन भेजी जाये। जिसके आधार पर ही देयक पारित किये जा सकेंगे। इससे आहरण संवितरण अधिकारी किसी देयक के त्रुटिवश या जानबूझकर दोहराव से बच सकेंगे। स्वीकृतियों की कोषालय प्रतियॉ इसी सूची के साथ भी भेजी जा सकती हैं। यदि ऐसी सूची में कोई देयक स्लिम से जनरेट होने के बाद अगले दिन तीन बजे अपरान्ह तक प्राप्त नही होता हैं, तो उसे नॉट प्रोड्यूस (Not Produce)/फाल्स देयक मानकर आपत्ति में डाल दिया जायेगा।
जिला कोषालय अधिकारी श्री सुरावत ने सभी डीडीओ को सुझाव देते हुये कहा है कि चूंकि अब स्लिम से जनरेट होने वाले देयकों की कोषालय में प्रस्तुत करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है, इसलिये स्लिम पासवर्ड की सुरक्षा पर एटीएम/ऑनलाईन बैंकिंग ATM/ONLINE BANKING) पासवर्ड की तरह विशेष रूप से ध्यान दें एवं इसे समय-समय पर बदलते भी रहें। उन्होने यह भी बताया कि 31 अक्टूबर तक सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों द्वारा समस्त देयक दो प्रतियों में तैयार कराये जायेंगे तथा कोषालय अधिकारी द्वारा मांगे जाने पर उपलब्ध कराये जायेंगे।

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