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प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के प्रथम सूत्रधार के रूप में उभरें विधायक डंग

भाजपा की राजनीति भी होगी प्रभावित

(बलवंत फांफरिया)

मंदसौर। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के सूत्रधार के रूप में सर्वप्रथम उभरें सुवासरा विधायक हरदीपसिंह डंग ने सबसे पहले बगावत का झंडा उठाकर अंत तक उसे थामे रखा जब तक देश में सत्ता परिवर्तन नहीं हो गया।

वर्ष 2014 मेें भाजपा के तूफान में सुवासरा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में विजयी होकर विधानसभा में पहुंचने वाले उज्जैन संभाग के एकमात्र कांग्रेसी विधायक थे। 2018 के चुनाव में मंदसौर संसदीय क्षेत्र से एकमात्र कांग्रेसी विधायक के रूप में हरदीपसिंह डंग विधानसभा पहुंचे थे। हालांकि इस बार अल्पमत से ही जीतें थे। प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता काबिज हुई अपेक्षा था कि श्री डंग को सत्ता में पद देकर नवाजा जायेंगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कारण भी जो उभरकर सामने आया कि वे न तो कमलनाथ गुट के थे और न ही दिग्विजयसिंह गुट के और न ही वें सिंधिया दरबार के सदस्य रहें थे। वे तो मात्र कांग्रेसी ही थे किसी गुट में नहीं होने के कारण वे मंत्री बनने से वंचित रह गये। यही नहीं अपनी ही सरकार मंे हर स्तर पर अपनी उपेक्षा से दुखी श्री डंग अपने मतदाताओं के काम भी कराने में असफल हो रहे थे और आखिरकार उन्होनें बगावत का झंडा उठाकर यह जता दिया था कि सच कहना बगावत हैं तो समझों हम भी बागी है और अंत तक अपने बागी तेवर पर कायम रहें। उन्हें मनाने के लिए शाम दाम दंड भेद सभी तरह के जतन हुए लेकिन सरदार ने अपना असर दिखाई ही दिया।

हालांकि प्रदेश में हुए सत्ता परिवर्तन का श्रेय कांग्रेस के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को दिया जा रहा है परंतु सत्ता परिवर्तन की इस क्रांति की पहली मशाल को जलाकर निकलने का श्रेय डंग को ही मिला। उनके बागी होने के पीछे मंदसौर जिले के भाजपा के कद्दावर नेता की भूमिका को भी नकारा नहीं जा सकता है। जिनकी राजनीतिक सूझबूझ और दूरदृष्टि के कारण ही यह संभव हो पाया है।

भाजपा की नई सरकार में उनको मौका मिलेगा ही यह तो तय माना जा रहा है। वहीं आगामी मेें कुछ माहों में उपचुनाव में वे भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनावी रणक्षेत्र में उतरेंगे यह भी पूरी – पूरी संभावना है।

श्री डंग के साहस भरे इस कदम से कांग्रेस तो आहत हो ही गई है। लेकिन अब भाजपा का जिले में राजनीतिक गणित भी गड़बढ़ायंेगा ही इसमें कौन – कौन प्रभावित होगा यह कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन डंग के बागी तेवर से दोनों दलों के नेता प्रभावित होंगे ही।

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