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प्रभारी मंत्री ने नहीं किया श्रमदान, कमेटी सदस्य देखते रह गए और पुल से निकल गई चिटनीस

शिवना नदी के महत्व को समझना होगा नगरवासियों को

सोमवार तक 2050 ट्रॉली और 325 डम्पर गाद निकाली गई

5250 लोगों ने अब तक किया श्रमदान : नदी का पाट हुआ 10 मीटर चौड़ा

मंदसौर। नगर में इन दिनों शिवना के सौन्दर्यकरण के लिए जन अभियान परिषद् के नेतृत्व में विभिन्न सामाजिक संगठन, समाजसेवी एवं नगर के नागरिक श्रमदान कर शिवना को शुद्ध करने का प्रयास कर रहे है। लेकिन दूसरी ओर कई ऐसे लोग भी हैं जो लगातार इस अभियान की आलोचना कर रहे है। आलोचना करना सरल है लेकिन कार्य करना उतना ही कठिन।

नगर के श्रमदानी 1 मई से इस कार्य में लगे है जो 15 जून तक इस कार्य को करेगे। जन अभियान परिषद द्वारा अभी तक इस अभियान के माध्यम से 2050 ट्राली और 330 डम्पर मिट्टी, गाद निकाली जा चुकी है जिसमें 5250 लोगों ने अपना श्रमदान किया है। वहीं दूसरी ओर नदी का पाट भी 10 मीटर चौड़ा कर दिया है।

शिवना पुल से निकल गई प्रभारी मंत्री पर नहीं किया श्रमदान
प्रभारी मंत्री 21 मई सोमवार को मंदसौर के दौरे पर थी। उनके सरकारी प्रेसनोट में भी जिक्र किया गया था कि वे शिवना सौन्दर्यकरण का हिस्सा बनेगी और श्रमदान करने आएंगी। लेकिन तय समय के बाद प्रातः 10 बजे तक भी श्रीमती चिटनीस श्रमदान करने नहीं आई। कोर कमेटी के सदस्य उनका इंतजार करते रहे और 10.15 बजे वे अपनी कार में बैठकर शिवना पुल से निकल गई लेकिन न तो श्रमदान किया और नहीं उनका इंतजार कर रहे जनअभियान परिषद् के सदस्यों से मुलाकात की।

शिवना रही तो हम रहेगे
आज जब शिवना शुद्धीकरण का कार्य चल रहा हैं तो कई लोग इसकी आलोचना कर रहे है। लेकिन इस पवित्र काम में सहभागी नहीं बन रहे है। इतने वर्षो में शिवना की सुध किसी ने न ली। क्या शिवना का पानी किसी को नहीं चाहिए। नगरवासियों को व आलोचना करने वालों को यह याद रखना चाहिए कि यदि शिवना रहेगी तो हम रहेगे अन्यथा 20 रू प्रति लीटर का पानी खरीद कर पीना पड़ेगा नहीं तो जहॉ नदी नहीं है वहां के लोगों से पूछो क्या हालात होते है गर्मीयों में। शिवना का गंदा होना क्षेत्रीय जनप्रतिधियों का विफल होना तो है ही। लेकिन क्या सिर्फ जनप्रतिनिधियों और शासन की योजना के भरोसे बैठना उचित होगा। आज जनअभियान परिषद् द्वारा जो कार्य शिवना को बचाने के लिए किया जा रहा है निश्चित रूप से यह सरहानीय कार्य है और सबको इसका हिस्सा एक बार जरूर बनना चाहिए।

मात्र 3 लाख ही आये
शिवना शुद्धीकरण के नाम पर अब 10 लाख रूपये दान देने की घोषणाएं हों चुकी है। जिनमें अकेले सांसद द्वारा 5 लाख की घोषणा की गई है। लेकिन परिषद् के पास अब तक 3 लाख रूपये ही आ पाए है। उसमें भी परिषद् ने कई बड़े कामों को अंजाम दे दिया है।

नाला बन चुकी शिवना अब लगने लगी नदी
शिवना नदी जिसने कई वर्षो से नाले का रूप ले लिया अब नदी का स्वरूप लेने में सफल हो पाई है। नदी के पाट को चौड़ा कर 10 मीटर अधिक कर दिया है। वहीं अभियान समिति ने मांग कि है कि पुराने नक्शे के आधार पर नदी का सीमांकन कराया जाए ताकि नदी पर हुए अतिक्रमणों को चिन्हित का उन्हें हटाया जा सकें।

कोई और सरकारी उपक्रम करता तो चढ जाता भ्रष्टाचार की भेंट
यह बात निश्चित है कि शिवना के साफ सफाई का कार्य यदि किसी सरकारी विभाग या नगर पालिका को दे दिया जाता तो यह अभियान भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता। यह तो जन अभियान परिषद् है जिन्होने इतने कम समय और कम संसाधनों में नदी का पाट भी चौड़ा कर दिया और सौन्दर्य भी बढ़ा दिया। एवं यह कार्य निरंतर जारी है।

आओ फोटो खिंचाओं, सोशल मीडिया पर वायरल करो पर श्रमदान तो करो
कई लोग इस अभियान को फोटो खिंचाउ अभियान तक ही समिति मान रहे है। लेकिन यदि ऐसा होता तो आज शिवना का स्वरूप जो हमें दिखाई दे रहा है ऐसा नहीं होता। परिषद् का तो कहना है कि शिपना तट पर श्रमदान करों फोटो खिंचों सोशल मीडिया पर वायरल करो इसमें कोई समस्या भी नहीं और इससे तो अन्य लोगो भी प्रेरणा दी जा सकती है।

कलेक्टर की अहम भूमिका
शिवना सौन्दर्यकरण अभियान में जितना अहम योगदान जन अभियान परिषद का है उतना ही योगदान कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव का भी है जिन्होने स्वयं रूचि लेकर न सिर्फ इस अभियान को आगे बढ़ाया अपितु कई बार श्रमदान भी कर चुके है।

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