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प्रशासन की नाक के नीचे हवा में उड़ रही मौत की प्रतिबंधित डोर

मंदसौर. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा पतंगबाजी के लिए इस्तेमाल होने वाली चाइना डोर की बिक्री, भंडारण, उत्पादन, इस्तेमाल, ट्रांसपोर्ट आदि पर जिला प्रशासन द्वारा पूर्ण पाबंदी लगाने के बावजूद जिले में कई स्थानों पर इस्तेमाल किया जा रहा है। कार्रवाई नहीं होने से चाइना डोर की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है। उल्लेखनीय है कि जिले में मकर संक्राति पर्व के अवसर पर वृहद रूप से पतंगबाजी की जाती है। पतंगबाजी में चाइना डोर का प्रयोग भी अधिक मात्रा में होता है। चाइना डोर का मटेरियल अत्यधिक खतरनाक होने के कारण राहगीरों एवं पशु-पक्षियों को इससे शारीरिक क्षति पहुंचती है।

शहर में मकर संक्रांति को लेकर पतंगबाजी के लिए बिकने वाली चाइनीज डोर शहर की विभिन्न दुकानों व पतंग विकेताओं द्वारा स्टॉक फुल कर जमा कर ली गई है व चाइनीज डोर की ब्रिकी धड़ल्ले से हो रही है। गौर हो कि शहर में बिकने वाली चाइनीज डोर जहां हवा में मौत का कहर बरपा रही रही है, तो वहीं इस डोर ने परंपरागत वर्षों से चली आ रही धागा से बनने वाली डोर को काट उसकी ब्रिकी बंद कर दी है व चाइनीज ड़ोर की मांग रह गई है। चाइनीज ड़ोर को लेकर हर बार जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन द्वारा इसके इस्तेमाल को रोकने व विकेताओं को पकड़ने के लिए हर बार प्रयत्न करता देखा जाता है, जो अंत में पूरी तरह से नाकाम हो जाता है व चाइनीज डोर बेचने वालों के हौंसले बुलंद हो रहे है। खूब मुनाफा काटते हैं विक्रेता व्यापारियों द्वारा चाइनीज डोर को बरनाला में लाकर अन्य शहरों, गांव व कस्बों में सप्लाई शुरू कर दी गई है व सख्ती के नाम मंहगी बेची जा रही है। चाइनीज डोर दुकानों पर असानी से मिल जाती है। कई जगह पर पर सप्लाई दी जाती है। फोन पर मंगवाने के बाद एक अज्ञात व्यक्ति उसे पता बता वह डोर ले जाता है। सबसे बड़ी बात चाइनीज डोर को बेचने के लिए नेटवर्क का इस्तेमाल कर दुकानों से बुक करके घरों से सप्लाई की जा रही है।

प्लास्टिक की डोर से हो चुके है हादसे
चाइना के नाम पर देश में ही बनाई जा रही प्लास्टिक की इस डोर के कारण हर वर्ष अनेक हादसे होते हैं। इस डोर के गले में उलझने के कारण कई लोग घायल हो चुके है। पिछले साल भी शहर में बाइक सवार एक बालिका के गले में चाइना डोर फंसने से वह गंभीर घायल हो गई थी। जिसे जिला अस्पताल ले जाया गया था। पिछले वर्ष भी अधिक संख्या में बच्चे चायना डोर के कारण घायल हुए थे। वहीं दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह डोर किसी तेजधार हथियार से किए गए वार का काम करती है, इससे लोगों को जान तक गंवानी पड़ती है। यही नहीं यह डोर पक्षियों के लिए बेहद घातक साबित हो रही है। चाइना डोर में उलझने के कारण हर साल अनेक पक्षी अपनी जान गंवा देते हैं। इस डोर पर पाबंदी है, लेकिन इसके दिसम्बर से लेकर बसंत के त्यौहार तक इस डोर की बिक्री बड़े स्तर पर की जाती है।

कार्रवाई के अभाव कारण हो रही बिक्री 
महानगर में पुलिस द्वारा चाइना डोर की खरीद, बिक्री, भंडारण, इस्तेमाल करने वाले सभी लोगों पर उक्त आदेशों अनुसार सख्त धाराएं लगाकर कार्रवाई नहीं की जाती। इस डोर को लेकर कई सामाजिक संस्थाएं स्कूलों में जाकर बच्चों को जागरुक भी कर रही है लेकिन इसका जागरुकता नहीं होने के कारण बच्चे व उनके परिजन भी ध्यान नहीं दे रहे है। शहर के अलग-अलग स्थानों की निगरानी की तो सामने आया कि लोग तथा बच्चे बेखौफ सार्वजनिक स्थलों पर चाइना डोर के साथ पतंगबाजी कर रहे हैं तथा शहर में चाइना डोर भी धड़ल्ले से बेची जा रही है।

इन धाराओं में होती है कार्रवाई
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा एक याचिका पर दिए गए आदेशों के अनुसार पतंगबाजी के लिए इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक, सिंथैटिक, नायलॉन से बना जानलेवा मांझा (डोर) की खरीद, बिक्री, भंडारण इस्तेमाल करने वालों पर इन्वायरनमेंट प्रोटेक्शन एक्ट, प्रिवैंशन ऑफ क्रयूएल्टी ऑफ एनिमल्ज एक्ट, वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट तथा आईपीसी के तहत कार्रवाई का प्रावधान है। इतना ही नहीं प्रदेश सरकार ने इस संबंध में प्र्रदेश के सभी कलेक्टरों को पत्र भी जारी कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए है।

इनका कहना…
इस संबंध में आदेश जारी हो गए है। चाइना डोर की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया है। बेचने वालो पर टीम भेजकर कार्रवाई की जाएगी।
– अनिल डामोर, अपर कलेक्टर, मंदसौर

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