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प्रसंग – आपातकाल पर काले दिवस का : इंदिरा गांधी ने कुर्सी के लिए लोकतंत्र का ही गला घोंट दिया था

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कांग्रेस सरकार ने विपक्षी नेताओं को तो ठीक अपने ही लोगों को जेलों में बंद कर दिया था

मंदसौर। तत्कालिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मांत्र अपनी कुर्सी बचाने के लिए लोकतंत्र का गला घोटते हुए 25, 26 जून 1975 की रात्रि को देश में आपातकाल लगाकर देशभर के विरोधी दलों के नेताओं के साथ आपातकाल का विरोध करने वाले अपनी ही पार्टी के लोगों को जेलों में बंद कर दिया था। आपातकाल के दौरान जो अत्याचार व अन्याय जेल में बंद देशभक्तों के साथ किए गए उनको याद करते ही आज भी रूह कांप जाती है।

यह बात लोकतंत्र सेनानी द्वारा आपातकाल लगाए जाने की तारीख 26 जून को काला दिवस मनाने के अवसर पर आयोजित पत्रकार वार्ता में मीसाबंदी व भाजपा के जिला अध्यक्ष देवीलाल धाकड ने कही है। आपने कहा कि आपातकाल के दौरान गरीब बस्तियों को बुल्डोजर से ध्वस्त कर दिया गया था। कुंआरों की नसबंदियॉ कर अत्याचारों का तांडव किया गया। आपातकाल के दौरान हुए अन्याय व अत्याचारों को लेकर देश भर में लोकतंत्र सेनानी संघ द्वारा 26 जून को काला दिवस मनाया जा रहा है। ताकि आज की युवा पीढी आपातकाल की विभिशिकाओं को परिचित हो सके कि आज जो लोग देश में लोकतंत्र की बात कर रहें है उसी कांग्रेस ने मात्र सत्ता में बने रहने के लिए लोकतंत्र का किस तरह गला घोटा था। लोकतंत्र को देश में पुनः स्थापित करने के लिए देश भर में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने सत्याग्रह चलाकर अलख जगाया था।

जेलों में गए देशभक्तों को पता नहीं था कि वे जिंदा आयेंगे
पत्रकारवार्ता में लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष मोहनलाल मरच्या ने कहा कि आपातकाल के दौरान संघ के वरिष्ठ स्व श्री ओमप्रकाश जी पुरोहित ने घर घर जाकर आपातकाल के विरूद्ध सत्याग्रह करने के लिए कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने का कार्य किया था। सत्याग्रह के दौरान जेल जाने वाले कार्यकर्ताओं को यह भी मालूम नहीं था कि वे जेल से जिंदा वापस लौटेगे। देश की विभिन्न जेलों में अनेकों मीसाबंदियों ने इलाज के अभाव में दम तोड़ा था।

परिजनों की मृत्यु पर नहीं पसीजी थी सरकार
वरिष्ठ मीसाबंदी मनोहरलाल जैन ने बताया कि आपातकाल के दौरान जेलो में बंद नेताओं के परिजनों की मृत्यु के बाद भी कांग्रेस की सरकार का दिल नहीं पसीजा व जेल में बंद कार्यकर्ताओं को हथकड़ी लगाकर उन्हें दाह संस्कार में सम्मिलित होने की छूट दी थी। आपातकाल के दौरान जेलो में बंद लोगों के परिवार को बिखेरने व तोड़ने का काम कांग्रेस की सरकार ने करते हुए उनके व्यापार को ध्वस्त करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी।

आपातकाल के दौरान जनसंघ कार्यालय के तोड़े थे ताले
लोकतंत्र सेनानी संघ के जिलाध्यक्ष हंसराज कबाड़ी ने कहा कि आपातकाल के दौरान जनसंघ कार्यालय के ताले तोड़ अन्याय व अत्याचार की पराकाष्ठा कांग्रेस की सरकार ने की थी। इस अवसर मीसाबंदी राजेन्द्र जैन गरोठ ने भी आपातकाल की विभिषिकाओं के बारे में बताया।

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