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प्रारंभ हुआ श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ अंजनशलाक (मंदिर) प्रतिष्ठा महोत्सव, आज भी होगे अनेक आयोजन

आचार्य हेमचन्द्रसागर सूरिजी ने संपन्न करवाई माणिभद्र और पार्श्व कल्याणक पूजन

मंदसौर। नगर की पावन धरा पर 25 जनवरी को जैन समाज के भगवान श्री शंखेश्वर पार्श्वनाथ अंजनशलाक (मंदिर) का प्रतिष्ठा एवं पन्यास पद प्रदान महोत्सव बंधु बेलड़ी पू आचार्य श्री जिनचंद्रसागरसूरिजी मसा एवं पू आचार्य श्री हेमचन्द्रसागर सूरिजी मसा की प्रेरणा एवं निश्रा में होना है। जिसके लिए 16 जनवरी से पूजन के आयोजन प्रारंभ हो गए है। बुधवार को तलेरा विहार में बने पाण्डाल में प्रातः 10.30 बजे अधिष्टायक देव माणिभद्र जी का पूजन व हवन किया गया। पूजन के लाभार्थी सुभाष नितीनजी रिछावरा और हवन के लाभार्थी गिरधारीलालजी चांदमल जी जावद वाले थे। माणिभद्र पूजन के बाद दोपहर दो बजे श्री पार्श्व कल्याणक पूजन हुआ जिसके लाभार्थी गुलाबबाई बापूलाल जी भावगढ़ वाला थे। दोनो ही पूजा को आचार्य हेमचन्द्रसागर सूरिजी ने संपन्न करवाया। मुनि विराग सागरजी ने बताया कि माणिभद्र देव जिनशासन के रक्षक है वे यक्षराज है प्रतिष्ठा में पधारने स्वरूप उनको आमंत्रित करने के लिए पूजन व हवन किया गया है। वहीं पार्श्व कल्याणक पूजन में पंच कल्याणक यानि च्यवन, जन्म, दीक्षा, केवलज्ञान और मोक्ष की पूजा कि गई। जगत के सभी जीवो का कल्याण हो इसलिए पंच कल्याणक पूजा की जाती है।

माणिभद्र पूजन से पूर्व व्याख्यान हॉल में प्रवचन देते हुए आचार्य हेमचन्द्रसागरसूरि जी मसा ने कहा कि जिन्दगी में दो कार्य होते है अवतार कार्य और अन्य कार्य। अवतार कार्य वह होते है जिससे जीवन की सफलता मानी जाती है अर्थात् प्रभु की भक्ति। प्रभु की भक्ति से हमसब कुछ प्राप्त कर सकते है। मंदिर के शिखर के बारे मेें बताते हुए आचार्यश्री ने कहा कि मंदिर के शिखर पर देशी गाय के घी भरकर रखा जाता है क्योंकि वह खुद तो शु़द्ध होता है अनके शुद्ध तत्वों को प्रवाहित करता है एवं मंदिर में शुभ उर्जा का संचार करता है। आचार्य श्री ने कहा कि याद रखना हमेशा सच्चा साधु वह होता है जिसके मन, वचन और काया में खुद की इच्छा का नहीं प्रभु की आगना का प्रभुत्व हो।

धर्मसभा एवं पूजन के आयोजनों में बड़ी संख्या में समाज के महिला, पुरूष, युवा व बच्चे सम्मिलित हुए।समिति ने सभी धर्म प्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में आयोजन में भाग लेने का निवेदन किया है।

आज होंगे यह आयोजन

आज 17 जनवरी को प्रातः 7.30 बजे कुंभ स्थापना, प्रातः 8.15 बजे ज्वारारोपण, प्रातः 10 बजे क्षेत्रपाल पूजन, प्रातः 10.30 बजे माणेक स्तंभ प्रातः 10.45 बजे वेदिका पूजन और मंगल तोरण एवं प्रातः 11.30 बजे जलयात्रा विधान आयोजन होगे।

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