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फर्जी मतदाताओ से मंदसौर जिला भी अछुता नहीं!

मंदसौर। चुनाव आयोग ने पूरे प्रदेश की मतदाता सूचियों का डोर टू डोर सर्वे कराया है। मंदसौर जिले की चारों विधानसभा क्षेत्रों मंदसौर, मल्हारगढ़, सुवासरा व गरोठ में लगभग एक माह तक चले सर्वे के बाद 41 हजार 356 बोगस मतदाता मिले हैं। इनमें से सर्वाधिक ऐसे हैं, जो दर्ज पते पर मिले ही नहीं और न ही आसपास वाले उनकी पहचान बता पाए। इसके अलावा इन मतदाता सूचियों में एक ही व्यक्ति के दो जगह या उससे अधिक जगह नाम भी मिले हैं। अब सबसे ज्यादा 11433 नाम मंदसौर विधानसभा और सबसे कम 8021 मल्हारगढ़ विधानसभा में कटे हैं।

मंदसौर जिले की चारों विधानसभाओं में नवंबर-2013 से लेकर जनवरी 2018 के बीच 60823 मतदाताओं की वृद्धि हुई थी। इसमें भी सबसे ज्यादा मंदसौर में 20769 मतदाता बढ़े थे। वहीं मल्हारगढ़ में 12012, सुवासरा में 15143 मतदाता, गरोठ में 12890 की वृद्घि हुई है। इस पर कांग्रेस द्वारा प्रदेशभर में बोगस मतदाताओं की शिकायत करने के बाद निर्वाचन आयोग ने पूरे प्रदेश में मतदाता सूचियों की डोर टू डोर सर्वे करने को कहा था। मंदसौर जिले की मंदसौर, सुवासरा, मल्हारगढ़ व गरोठ विधानसभा में भी कर्मचारियों ने लगभग डेढ़ माह तक घर-घर जाकर सर्वे किया और सूची से एक-एक नाम का मिलान करने की कोशिश की गई है। चुनाव आयोग के कड़े रुख के चलते कर्मचारियों ने एक-एक नाम की तसदीक की तो जिलेभर में 41 हजार 356 बोगस नाम मिले, जो मौके पर नहीं थे। इनमें सर्वाधिक नाम ऐसे हैं, जो सूची में बताए पते पर पहले कभी नहीं रहते थे। इससे यह भी साबित हो रहा है कि कर्मचारियों ने इससे पहले वास्तविक सूची का कभी मिलान ही नहीं किया हो।

 

सबसे ज्यादा संख्या मिली गलत पते वालों की

हालांकि निर्वाचन कार्यालय में पदस्थ कर्मचारी इन 41 हजार 356 नामों में यह नहीं बता पाए कि किस कारण से नाम कटे हैं, पर यह जरूर बता रहे हैं कि सर्वाधिक नाम वे कटे हैं, जो मौके पर अनुपस्थित मिले अर्थात जिनके पते गलत लिखा रखे थे। आसपास वालों ने भी इन नामों को लेकर अनभिज्ञता जाहिर की थी। इसके अलावा मृतक, बाहर चले गए व दो जगह नाम वाले मतदाता भी यहां मिले। अब सूचियों से सभी को विलोपित करने का कार्य चल रहा है। अंतिम सूची का प्रकाशन जल्द ही होगा।

 

 

चुुनाव में होता है बोगस मतदाताओं का उपयोग

आमतौर पर विभिन्ना चुनावों में उम्मीदवार और राजनीतिक दल इन बोगस मतदाताओं के मतों का उपयोग अपने-अपने पक्ष में करते रहे हैं। तभी राजनीतिक दलों के बूथ लेवल के कार्यकर्ता भी इन नामों को कटवाने में रुचि नहीं दिखाते। हालांकि इस बार चुनाव आयोग ने दिल्ली से ही इस पूरे कार्य की मॉनीटरिंग की तो सभी कर्मचारियों ने छंटनी कर दी।

 

डोर टू डोर हुए सर्वे में 41 हजार 356 नाम मतदाता सूचियों में से कटे हैं। इस बार कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश थे कि एक-एक मतदाता का भौतिक सत्यापन किया जाए। अभी फिर से मतदाता पुनरीक्षण अभियान चल रहा है। इसके बाद मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन होगा।- ओमप्रकाश श्रीवास्तव, कलेक्टर।

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